LUCC घोटाले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 14 FIR अब एक ही केस में होंगी शामिल

ललितपुर में जमा रकम की मैच्योरिटी न मिलने का मामला | 18 जुलाई 2024 की पहली FIR बनेगी मुख्य आधार

प्रयागराज। ललितपुर के चर्चित LUCC घोटाले से जुड़े मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने अलग-अलग थानों में दर्ज 14 FIR को एक ही मामले से जुड़ा मानते हुए पहली FIR के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। अब इन सभी मामलों की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई एक मुख्य मामले के आधार पर आगे बढ़ेगी।

न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने सुनवाई के दौरान माना कि सभी मामलों में घटना, आरोप और लेन-देन का आधार काफी हद तक समान है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल अलग-अलग थानों में FIR दर्ज होने से मामलों की मूल प्रकृति अलग नहीं हो जाती।

2024 में मैच्योरिटी पूरी, लेकिन नहीं मिली जमा रकम

मामले के अनुसार, लोगों ने LUCC में फिक्स्ड डिपॉजिट और आवर्ती जमा के रूप में अपनी मेहनत की कमाई जमा की थी। वर्ष 2024 में जमा की अवधि पूरी होने के बाद भी जब रकम वापस नहीं मिली तो निवेशकों में नाराजगी बढ़ी।

इसके बाद ललितपुर के अलग-अलग थानों में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ मामले दर्ज होने लगे। 18 जुलाई 2024 को कोतवाली ललितपुर में पहली FIR दर्ज हुई थी, जिसे हाईकोर्ट ने मुख्य FIR के रूप में माना है।

एक ही कंपनी और लेन-देन का हवाला देकर हुई थी एक केस की मांग

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जी.के. दीक्षित और अनुराग त्रिपाठी ने अदालत के सामने दलील दी कि सभी FIR एक ही कंपनी और समान प्रकार के लेन-देन से संबंधित हैं।

अलग-अलग मुकदमों की जांच होने पर जांच की पुनरावृत्ति के साथ-साथ अलग-अलग निष्कर्ष सामने आने की स्थिति बन सकती है। वहीं राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ताओं और घटनास्थलों में अंतर है।

हाईकोर्ट ने कहा—अलग-अलग जांच से बढ़ सकती है कानूनी जटिलता

पीठ ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए माना कि जिन मामलों का आधार और आरोप एक ही लेन-देन से जुड़े हैं, उन्हें अलग-अलग चलाने से कानूनी प्रक्रिया जटिल हो सकती है।

अदालत ने घटनाओं की निरंतरता और आरोपों की समानता को ध्यान में रखते हुए 18 जुलाई 2024 की FIR को मुख्य मामला माना और बाकी मामलों को उसके साथ जोड़ने का निर्देश दिया।

अब क्या होगा?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिन मामलों में अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है, उनकी जांच से संबंधित रिकॉर्ड कोतवाली ललितपुर भेजे जाएंगे। वहीं जिन मामलों में अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी है, उन्हें भी मुख्य मामले के साथ जोड़कर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

पीड़ितों के लिए फैसले का क्या मतलब?

एक ही FIR के आधार पर मामलों की जांच और सुनवाई आगे बढ़ने से जांच की दिशा एक रखने और समान आरोपों से जुड़े मामलों को एक साथ देखने की व्यवस्था बनेगी। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर पीड़ितों और निवेशकों की नजर रहेगी।

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