भाकृअनुप–भारतीय
मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून
द्वारा “स्वच्छता
एवं जनभागीदारी: स्वच्छ, स्वस्थ
एवं सतत् भारत की ओर” विषय पर ग्राम कैंचीवाला,
ब्लॉक सहसपुर में दिनांक सितम्बर 23, 2026
को जागरूकता कार्यक्रम का
आयोजन
दिनांक 23 सितम्बर 2026 को ग्राम कैंचीवाला, देहरादून में “स्वच्छता एवं
जनभागीदारी : स्वच्छ, स्वस्थ एवं सतत्
भारत की ओर” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन पादप विज्ञान
प्रभाग, ICAR–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR–IISWC), देहरादून द्वारा किया
गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय, विशेषकर किसानों
को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, जैविक कचरे के
सदुपयोग, प्लास्टिक के न्यूनतम उपयोग तथा पर्यावरण
संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की
अध्यक्षता डॉ. जे.एम.एस. तोमर, प्रधान
वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष, पादप विज्ञान, ने की तथा कार्यक्रम
को संबोधित करते हुए डॉ. जे.एम.एस. तोमर ने स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी
बताते हुए कचरे के स्रोत पर उचित पृथक्करण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने “अब दो नहीं, चार” के संदेश के
माध्यम से कचरा पृथक्करण तथा जैविक कचरे से कम्पोस्ट तैयार करने के महत्व को
रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कचरे का उचित प्रबंधन मृदा, जल एवं पर्यावरण
संरक्षण से सीधे जुड़ा है।
डॉ. विभा सिंघल प्रधान वैज्ञानिक, ने जैविक कचरे
के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं कम्पोस्टिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पत्तियों, पौध अवशेषों एवं
अन्य जैविक सामग्री से कम्पोस्ट तैयार कर उसका उपयोग कृषि एवं हरित क्षेत्रों में
करने पर जोर दिया। उन्होंने एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने तथा Reduce, Reuse
and Recycle के सिद्धांत को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
डॉ. जे. जयप्रकाश ने स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में
जनभागीदारी की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने Repair, Reuse,
Redistribution and Recycling (RRR) की अवधारणा के माध्यम से उपयोगी वस्तुओं
के पुनः उपयोग एवं पुनर्वितरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने ग्रामीण
समुदाय को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों से निरंतर जोड़ने पर बल
दिया।
श्री राकेश कुमार, मुख्य तकनीकी
अधिकारी ने कार्यक्रम के दौरान किसानों को घरेलू एवं कृषि अवशेषों
के उचित प्रबंधन, कम्पोस्टिंग, कचरा पृथक्करण
तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों को “स्वच्छता से हरियाली और हरियाली से
पर्यावरणीय स्थिरता”के संदेश के साथ स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को दैनिक
जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में
उपस्थित कुल 50 किसानों ने प्रतिभाग
किया, जिनमें 18 महिला एवं 32 पुरुष किसान शामिल थे। किसानों
एवं प्रतिभागियों ने कचरे का उचित पृथक्करण करने, प्लास्टिक के
उपयोग को कम करने, पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण को बढ़ावा
देने तथा गांव एवं सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ एवं हरित रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन “स्वच्छ परिसर —
स्वस्थ पर्यावरण — सुरक्षित प्राकृतिक संसाधन — सतत् भविष्य” के संदेश के साथ
हुआ।






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