आत्म मंथन के बाद ही कोई निर्णय लें
— डॉ. भारती गांधी, संस्थापिका-निदेशिका, सी.एम.एस.
लखनऊ, 21 सितंबर। “ईश्वर ने जब दुनिया बनाई तो उसमें मानव, जानवर, पेड़-पौधे, नदियां, पहाड़ आदि सब बनाए, परन्तु मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है क्योंकि ईश्वर ने मनुष्य को ही अच्छे-बुरे की पहचान करने की समझ दी है। अतः मनुष्य को चाहिए कि वह आत्म मंथन एवं सोच-विचार करके लोकहित में निर्णय ले।”
ये विचार सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की संस्थापिका-निदेशिका डॉ. भारती गांधी ने सी.एम.एस. प्रधान कार्यालय में आयोजित ‘आध्यात्मिक सत्संग सभा’ की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।
आगे बोलते हुए डॉ. गांधी ने कहा कि प्रभु की अनन्त श्रेष्ठता पाने के लिए मनुष्य को अपना हृदय शुद्ध, पवित्र, दयालु व प्रकाशमय बनाना होगा। स्वच्छ एवं निर्मल हृदय में ही ईश्वर का वास होता है। उन्होंने माता-पिता, अभिभावकों एवं गुरुजनों से अपील की कि भावी पीढ़ी को सेवा, त्याग एवं सत्य की शिक्षा दें। उन्होंने जनमानस का आह्वान किया कि अच्छे व लोकहित के कार्यों द्वारा सभ्य समाज के निर्माण में योगदान दें और ऐसा समाज बनाएं जो सेवा, त्याग, सत्य एवं न्याय की नींव पर आधारित हो।
सत्संग सभा में श्री रॉबर्ट गांधी समेत 96 से अधिक विभिन्न धर्मानुयायी उपस्थित रहे।
आगे बोलते हुए डॉ. गांधी ने कहा कि हमें अपने संस्कारों को भूलना नहीं चाहिए। दयालु हृदय के साथ सच्चे मन से सबकी सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को मर्यादा पुरुषोत्तम राम जैसा जीवन बनाना चाहिए। मनुष्य अपने अहं का त्याग कर ईश्वर के भेजे अवतारों की दी हुई शिक्षाओं को मानकर ही ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें अपने बच्चों को 21वीं सदी की पुस्तकीय शिक्षा के साथ-साथ विश्व-एकता, विश्व-शान्


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