बलरामपुर- अनुदानित महाविद्यालय  स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश लखनऊ के अध्यक्ष अरुणेश अवस्थी के  निर्देश पर आज  21 सितंबर 2026 को एम एल के पी जी कॉलेज स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के सदस्यों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को  संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि सेवाओं की अनिश्चितता तथा बौद्धिक मजदूरी से बेहाल असिस्टेंट प्रोफेसर निराश और दुःखी होकर शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना  बहिष्कार का कर रहे हैं।
सोमवार को संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुचकर अपर जिलाधिकारी संदीप केला को ज्ञापन सौंपा। संघ के अध्यक्ष डॉ के पी मिश्र ने कहा कि  331 अनुदानित महाविद्यालयों में 25 वर्षों से संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की दोहरी व्यवस्था में कार्यरत लगभग 3000 असिस्टेंट प्रोफेसर सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक मानदेय एवं सेवा विनियमन की मांग को लेकर आस देख रहे हैं।
वर्ष 2000 में शासन द्वारा शुरू की गई उक्त दोहरी व्यवस्था में कार्यरत शिक्षक वर्तमान सरकार से पिछले 9 वर्ष से विनियमितीकरण किए जाने अथवा यूजीसी वेतनमान दिए जाने के साथ सेवाओं की सुरक्षा की मांग लगातार करते आ रहे हैं। परन्तु शासन द्वारा उनकी मांग पर विचार न किए जाने के कारण प्रदेश भर के शिक्षक निराश हैं।  संघ के महामंत्री डॉ पंकज गुप्ता ने कहा कि सभी शिक्षक मुख्यमंत्री जी की लोकहितकारी शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के उद्देश्य के विरोधी नहीं हैं, बल्कि पिछले 25 वर्षों से लंबित अपनी मूल सेवा समस्याओं के समाधान की मांग को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए इस योजना का बहिष्कार कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
शिक्षकों के अनुसार पिछले चार वर्षों में प्रदेशव्यापी स्तर पर हजारों पत्र शासन एवं जनप्रतिनिधियों को प्रेषित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा  कि पिछले 25 वर्षों से अनुदानित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की यह दोहरी व्यवस्था लाखों विद्यार्थियों और हजारों शिक्षक परिवारों को प्रभावित कर रही है। इन पाठ्यक्रमों में कार्यरत शिक्षक यूजीसी की निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप चयनित होकर वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी सेवा की स्थिरता, सम्मानजनक पारिश्रमिक और भविष्य की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकी है।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों से लिया जाने वाला शुल्क तथा उसके कारण सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त राजस्व व्यय का विषय भी गंभीर विचार की अपेक्षा करता है। शिक्षकों के अनुसार शुल्क प्रतिपूर्ति के कारण प्रतिवर्ष लगभग 82 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व व्यय होने की स्थिति में यदि इस व्यवस्था का नीतिगत पुनर्गठन किया जाए तो विद्यार्थियों को राहत देने के साथ-साथ कार्यरत शिक्षकों के हितों का भी समाधान संभव है।
शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की दोहरी व्यवस्था को समाप्त कर संबंधित विषयों को अनुदान पर लिया जाए तथा उनमें यूजीसी की निर्धारित योग्यता के अनुरूप कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं को नियमानुसार विनियमित/संरक्षित किया जाए। वैकल्पिक रूप से शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान के अनुरूप निश्चित एवं सम्मानजनक मानदेय प्रदान करते हुए उनकी सेवाओं को सुरक्षित किया जाये।
इस अवसर पर संघ के पूर्व महामंत्री डॉ राजन प्रताप सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ सुनील कुमार शुक्ल व डॉ दिनेश त्रिपाठी सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।

         हिन्दी संवाद न्यूज से
           रिपोर्टर वी. संघर्ष
              बलरामपुर। 

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