बलरामपुर - अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने सम्मानजनक वेतन, सेवा सुरक्षा और विनियमितीकरण की मांग को लेकर बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने कहा कि सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान किए बिना कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ उनके लिए पर्याप्त नहीं है।
ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में करीब 3000 शिक्षक पिछले 25 वर्षों से दोहरी व्यवस्था में कार्य कर रहे हैं। सेवाओं की अनिश्चितता के बीच शिक्षक पिछले नौ वर्षों से विनियमितीकरण अथवा उचित मानदेय मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। संघ ने मुख्यमंत्री से शिक्षकों को जीविकोपार्जन के लिए सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।
संघ के वरिष्ठ  सदस्य डॉ. के पी मिश्र ने कहा कि शिक्षक लंबे समय से महाविद्यालयों में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन सेवा की स्थिरता और उचित मानदेय का इंतजार अब भी जारी है। डॉ पंकज गुप्त व डॉ दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की आर्थिक और सेवा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए। इस दौरान मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय शैक्षिक महासंघ इकाई के अध्यक्ष प्रोo एस पी मिश्र भी मौजूद रहे।
     ज्ञापन देने वालों में डॉ एस के त्रिपाठी, डॉ राजन सिंह, डॉ सुनील कुमार शुक्ल, डॉ. अर्चना शुक्ला,  समेत अन्य शिक्षक शामिल रहे। 

             हिन्दी संवाद न्यूज से
              रिपोर्टर वी. संघर्ष
                  बलरामपुर। 

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