औरैया // जिले में इस समय धान की फसल अपने शबाब पर है खेतों में लहलहाती ये शानदार बालियाँ किसी महंगी उन्नत किस्म का नहीं, बल्कि जैविक खेती के कमाल का जीता जागता नमूना हैं। तस्वीर में दिख रही हाइब्रिड संकर बासमती ताज धान की फसल ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।
किसान ने बताया कि इस खेत में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का नाममात्र ही उपयोग किया गया है जीवामृत से तैयार इस फसल में न तो भूरा फफूंद (ब्राउन स्पॉट) है, न तना छेदक और न ही पत्ती लपेटक का कोई प्रकोप जहाँ आसपास के कई खेतों में किसान फसल में लग रहे रोगों से परेशान हैं वहीं यह खेत पूरी तरह स्वस्थ और हरा भरा नजर आ रहा है एक-एक पौधे में 20 से 25 कल्ले (टिलर्स) हैं और हर बाली दानों से पूरी तरह भरी हुई, वजन के कारण झुकी हुई है जो बम्पर पैदावार का स्पष्ट संकेत दे रही है ज्यादातर किसानों ने बताया जब रसायनिक और जैविक से उत्पादन में कोई अन्तर नहीं तो फिर क्यों न चुने जैविक विकल्प।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि जैविक पद्धति से खेती करने पर पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और जमीन की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है।
किसान ने कहा "खर्च आधा फसल डबल" मिट्टी भी बची सेहत भी न यूरिया का ज्यादा बोझ न महंगी दवाओं का खर्च सिर्फ जीवामृत और मेहनत का फल है इस बार बम्पर पैदावार पक्की है।
निश्चित रूप से यह तस्वीर उन तमाम किसानों के लिए प्रेरणा है जो कम लागत में अधिक, जहर मुक्त और टिकाऊ उत्पादन लेना चाहते हैं।
रिपोर्ट :- जितेन्द्र कुमार हिन्दी-संवाद NEWS औरैया उ.प्र.
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