उतरौला बलरामपुर - तीन दिन से हो रही मूसलाधार बारिश व तेज हवाओं के चलते किसानों के लिए एक तरफ संजीवनीबनकर आई तो दूसरी तरफ आफत भी ले आई। सूख रही धान की फसल को जहांजीवन दान मिला, तो वहीं पर तेज हवाओं ने धान, गन्ना, आम, सागौन और लिप्टस जैसे कीमती पेड़ों को जमींदोज कर दिया। खेतों में मुस्कुराते किसान के चेहरे पर भीतर का दर्द साफ दिख रहा है। सबसे बड़ा डर राप्ती नदी का बढ़ता जलस्तर है। लगातार बढ़ते पानी ने तटवर्ती किसानों की नींद उड़ा दी है। विकास खण्ड उतरौला के ग्राम तिल खी बढ़या, बभनी बुजुर्ग, मटियरिया कर्मा, देवरिया अर्जुन के अलावा दर्जनों गांव चारों तरफ से बाढ़ के चपेट में घिर गए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान तिलखी बढ़या के गनियारी भू-भाग में होने की आशंका जताई गई है। यहां हजारों एकड़ में लगी धान कीफसल डूबी हुई है। अगर दो दिन में पानी नहीं उतरा तो पूरी फसल सड़कर बर्बाद हो जाएगी।किसान गोपाल चौधरी, आनन्द मणि तिवारी देवेन्द्र कुमार,और दिलीप कुमार मिश्र ने बताया,हम लोग दश कों से राप्ती पर तट बंध करने की मांग करते हुए चले आ रहे हैं। सांसद गोण्डा कीर्तिवर्धन सिंह जब भी आते हैं, वह आश्वा सन देकर चले जाते हैं, होता कुछ नहीं है।
किसान जितेन्द्र कुमार, माधव श्रीवास्तव ने कहा तटबंध न बनने से हर साल हमारी फसल बर्बाद होती है। आज तक एक रुपये की क्षति पूर्ति नहीं मिली।
72 घण्टे से अंधेरे में गांव बारिश के साथ ही तीन दिन सेबिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है। इससे कम्युनि केशन टूट गया है। किसान न तो बाढ़ नियंत्रण कक्ष से सम्पर्क कर पा रहे हैं, न ही अपने रिश्तेदारों से।किसानों ने शासन- प्रशासन से तीन मांगें की हैं - 1. राप्ती नदी पर तत्काल तटबंध बने, 2. बर्बाद फसलों का सर्वे कर क्षतिपूर्ति दी जाए, 3. बिजली आपूर्ति फौरन बहाल की जाएं।तिलखी बढ़या, बभनी बुजुर्ग, मटियरिया कर्मा, देव रिया अर्जुन केअलावा दर्जनों गांव गनियारी क्षेत्र में हजारों एकड़ धान, गन्ना जलमग्न आम, सागौन, लिप्टस के दर्जनों पेड़ गिरे 72 घण्टे से बिजली गुल, 10 साल से तटबंध की मांग अधूरी हर साल राप्ती में आती है बाढ़, फिर भी तटबंध का प्रस्ताव फाइलों में कैद है।
हिन्दी संवाद न्यूज से
असगर अली की खबर
उतरौला बलरामपुर।
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts, please let me know