मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में दै0 अमर उजाला द्वारा
आयोजित बाल मेला सम्मान समारोह को सम्बोधित किया

विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजयी
प्रतिभागियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया

जीवन में अंकों का महत्व, लेकिन केवल अंक ही सफलता का आधार नहीं, बच्चों को खेलना, अच्छी पुस्तकें पढ़ना, पाठ्यक्रम समय से पूरा करना और विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए : मुख्यमंत्री

प्रतियोगिता में पुरस्कार अथवा स्थान प्राप्त करना उपलब्धि,
इससे भी महत्वपूर्ण उसमें प्रतिभाग करना, स्वयं को
चुनौती देना और आगे बढ़ने का प्रयास करना

बेसिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा विभाग
से विद्यालयों में समाचार-पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया

हिन्दी और अंग्रेजी के समाचार-पत्र पढ़ने
से भाषा और व्याकरण में भी सुधार होता

ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमण्डल खेल और विश्व चैम्पियनशिप
में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था

अब तक लगभग 500 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में अवसर दिया
जा चुका, 500 से अधिक अन्य खिलाड़ियों को भी नियुक्ति दी जाएगी

 जब समाज बेटियों को अवसर और महत्व देता, तो वह अपनी प्रतिभा के बल पर प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकतीं, बेटियों को लेकर समाज में मौजूद
संकोच और पुरानी मानसिकता से बाहर निकलना होगा

सफलता के लिए लगातार प्रयास आवश्यक, असफलता को चुनौती
के रूप में स्वीकार करें, कमी को दूर कर उसमें सुधार करें
 
सामान्य परिवार और सीमित संसाधनों के बावजूद डॉ0 ए0पी0जे0
अब्दुल कलाम ने निराशा को स्वयं पर हावी नहीं होने दिया
और आगे चलकर देश के महान वैज्ञानिक बने

अपने शहर की विरासत को जानना बच्चों
के ज्ञान और दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा

बच्चों की भारत भ्रमण यात्रा केवल खान-पान और मनोरंजन तक सीमित न हो, जहाँ जाएं, वहाँ की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कनेक्टिविटी, लोगों की आय के स्रोत, सामाजिक परिस्थितियों तथा पौराणिक एवं ऐतिहासिक विरासत को समझें

ए0आई0 कार्यों को सरल कर सकती और प्रश्नों के उत्तर दे
सकती, लेकिन सही प्रश्न करना, गहराई से सोचना और
समझ विकसित करना अच्छी पुस्तकों से सीखा जा सकता
 
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया, प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाई, पुलिस
की अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत किया और नई शाखाएँ स्थापित कीं

गोरखपुर की टेराकोटा कला को ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना
से जोड़ा गया, इससे स्थानीय कारीगरों को पहचान, सम्मान और
बाजार मिला तथा उत्पादों की बिक्री से आय के अवसर बढ़े

उ0प्र0 इण्टरनेशनल ट्रेड शो से प्रदेश के उत्पादों को
देश-दुनिया के बाजार से जोड़ने का प्रयास किया
जा रहा, ट्रेड शो में बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे
 
लखनऊ : 28 सितम्बर, 2026

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि जीवन में अंकों का महत्व है, लेकिन केवल अंक ही सफलता का आधार नहीं हैं। बच्चों को खेलना, अच्छी पुस्तकें पढ़ना, पाठ्यक्रम समय से पूरा करना और विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। अभिभावकों को भी केवल अंकों के दबाव में बच्चों का खेलना, सोना और खाना-पीना प्रभावित नहीं करना चाहिए। बच्चों का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास साथ-साथ होना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी आज गोरखपुर में हिन्दी दैनिक अमर उजाला द्वारा आयोजित ‘बाल मेला सम्मान समारोह’ को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने बच्चों को राष्ट्र निर्माण की शपथ दिलायी तथा कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रतियोगिता में पुरस्कार अथवा स्थान प्राप्त करना उपलब्धि है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण उसमें प्रतिभाग करना, स्वयं को चुनौती देना और आगे बढ़ने का प्रयास करना है। बाल मेला बच्चों की प्रतिभा को मंच देने और उनके सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम है।
सम्मान समारोह में बेटियों की संख्या अधिक देखकर प्रसन्नता हुई। जब समाज बेटियों को अवसर और महत्व देता है, तो वह अपनी प्रतिभा के बल पर प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। बेटियों को लेकर समाज में मौजूद संकोच और पुरानी मानसिकता से बाहर निकलना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने श्री सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है। मन का विश्वास रगों में साहस भरता है, चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है। आखिरि उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है, जा-जा कर खाली हाथ लौट कर आता है। मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में, बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में। मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सफलता के लिए लगातार प्रयास आवश्यक है। असफलता को चुनौती के रूप में स्वीकार करें, यह देखें कि कहाँ कमी रह गई और उसमें सुधार करें। सफलता मिलने तक संघर्ष जारी रखें और कठिन परिस्थितियों से घबराकर पीछे न हटें। छोटी चींटी के बार-बार फिसलकर फिर चढ़ने और समुद्र में गोताखोर के बार-बार डुबकी लगाने के उदाहरण बताते हैं कि निरन्तर प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।
पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बच्चे वह वायुसेना के लड़ाकू पायलट बनना चाहते थे, लेकिन चयन में सफल नहीं हुए। सामान्य परिवार और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने निराशा को स्वयं पर हावी नहीं होने दिया और आगे चलकर देश के महान वैज्ञानिक बने। राष्ट्रपति बनने से पूर्व उन्हें भारत रत्न मिला और बाद में उन्होंने देश के राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया। मुख्यमंत्री जी ने उनके जन्मस्थान रामेश्वरम के निकट धनुषकोडी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उसे भगवान श्रीराम की लंका यात्रा और रामसेतु की परम्परा से जोड़ा।
मुख्यमंत्री जी ने बच्चों को गोरखपुर को अपनी पाठशाला की तरह देखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि अपने शहर की विरासत को जानना बच्चों के ज्ञान और दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा। छुट्टी या समय मिलने पर गोरखनाथ मन्दिर, गीता प्रेस, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, रोडवेज बस स्टेशन, रामगढ़ताल, बुढ़िया माई मन्दिर, राप्ती-रोहिणी संगम, प्राचीन स्थलों और गुरुद्वारों को देखें तथा उनके इतिहास और कार्यप्रणाली को समझें। रेती चौक और मुक्तेश्वरनाथ मन्दिर के नामों एवं इतिहास को जानने की जिज्ञासा पैदा करें।
मुख्यमंत्री जी ने अमर उजाला प्रबन्धन से बच्चों को समाचार-पत्र के कार्यालय एवं मुद्रण व्यवस्था को देखने का अवसर प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को यह समझना चाहिए कि पत्रकार किस प्रकार कठिन परिस्थितियों में काम कर सही समाचार जनता तक पहुँचाते हैं और अफवाहों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाचार संकलन से लेकर मुद्रण तक की प्रक्रिया को जानना भी उनके लिए सीखने का एक अवसर होगा।
मुख्यमंत्री जी ने बच्चों को भारत भ्रमण के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यात्रा केवल खान-पान और मनोरंजन तक सीमित न हो। जहाँ जाएं, वहाँ की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कनेक्टिविटी, लोगों की आय के स्रोत, सामाजिक परिस्थितियों तथा पौराणिक एवं ऐतिहासिक विरासत को समझें। यह भी जानें कि उस क्षेत्र का इतिहास किन महापुरुषों से जुड़ा है।
आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता की चर्चा तेजी से हो रही है। ए0आई0 कार्यों को सरल कर सकती है और प्रश्नों के उत्तर दे सकती है, लेकिन सही प्रश्न करना, गहराई से सोचना और समझ विकसित करना अच्छी पुस्तकों से सीखा जा सकता है। इसलिए बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना जरूरी है। बेसिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा विभाग से विद्यालयों में समाचार-पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया है। हिन्दी और अंग्रेजी के समाचार-पत्र पढ़ने से भाषा और व्याकरण में भी सुधार होता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उनके बचपन में संसाधन सीमित थे, लेकिन उपलब्ध साधनों का भरपूर उपयोग किया जाता था। आज सरकार और अभिभावकों के पास बच्चों को आगे बढ़ाने के अधिक अवसर हैं। जरूरत इन अवसरों का सदुपयोग करने और कुछ अच्छा कर गुजरने की इच्छा पैदा करने की है।
लगभग 09 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में सरकार बनने के समय प्रदेश के समक्ष कानून-व्यवस्था, रोजगार और विकास की गम्भीर चुनौतियाँ थीं। प्रदेश की छवि खराब थी। युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के अवसरों का संकट था। आए दिन दंगे होते थे और लम्बे समय तक कर्फ्यू रहता था। उत्तर प्रदेश पुलिस में लगभग दो लाख पद रिक्त थे।
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया, प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाई, पुलिस की अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत किया और नई शाखाएँ स्थापित कीं। विगत 09 वर्षों में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में साढ़े 09 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई गई। उत्तर प्रदेश पुलिस में 02 लाख 30 हजार से अधिक भर्तियां हुई हैं। युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण है।
विगत 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तीन गुना हुई है। प्रति व्यक्ति आय भी तीन गुना बढ़ी है। उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं है। प्रदेश अब भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश की 03 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में उत्तर प्रदेश का नाम आता है। सामर्थ्य पहले भी थी, आवश्यकता उसे परिणाम में बदलने की इच्छा शक्ति और निरन्तर प्रयास की थी।
मुख्यमंत्री जी ने गोरखपुर की टेराकोटा कला का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना से जोड़ा गया है। इससे स्थानीय कारीगरों को पहचान, सम्मान और बाजार मिला है तथा उनके उत्पादों की बिक्री से आय के अवसर बढ़े हैं। आज प्रदेश के प्रत्येक जिले की अपनी विशिष्ट पहचान और उत्पाद है।
मुख्यमंत्री जी ने नोएडा में 25 से 29 सितम्बर, 2026 तक आयोजित किए जा रहे उत्तर प्रदेश इण्टरनेशनल ट्रेड शो का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में निर्मित उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ट्रेड शो में रविवार को डेढ़ लाख से अधिक लोग आए। आज भी बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं। 2,400 से अधिक एग्जिबिटर्स शामिल हुए हैं। इसके माध्यम से 90 से अधिक देशों से 650 फॉरेन बायर्स आ रहे हैं। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की उत्पादन क्षमता और उद्यमिता का उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में स्टार्ट-अप की संख्या करीब 120 थी, जबकि आज प्रदेश में 24 हजार से अधिक स्टार्ट-अप हैं। उत्तर प्रदेश का युवा अब केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला भी बन रहा है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्टार्ट-अप अथवा नवाचार में अपनी रुचि का क्षेत्र चुनकर पूरी मेहनत और प्रतिबद्धता से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
खेलों में करियर बनाने वाले युवाओं को भी सरकार आर्थिक सहायता और सरकारी सेवा के अवसर दे रही है। ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमण्डल खेल और विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था है। पदक विजेता हॉकी खिलाड़ियों श्री ललित उपाध्याय और श्री राजकुमार पाल को उत्तर प्रदेश पुलिस में डिप्टी एस0पी0 जैसे पदों पर नियुक्ति दी गई है। अब तक लगभग 500 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में अवसर दिया जा चुका है। अगले सप्ताह 500 से अधिक अन्य खिलाड़ियों को भी नियुक्ति दी जाएगी।
मेजर ध्यानचन्द ने सीमित संसाधनों के बावजूद हॉकी में विश्वस्तरीय पहचान बनाई। हॉकी स्टिक तक उपलब्ध न होने पर पेड़ की टहनी से खेलना शुरू करने वाले मेजर ध्यानचन्द आगे चलकर ‘हॉकी के जादूगर’ कहलाए। उनकी नेतृत्व क्षमता में भारत ने ओलम्पिक में स्वर्ण पदक हासिल किए। मेरठ में मेजर ध्यानचन्द के नाम पर खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है।
बच्चे अच्छे शिक्षाविद, वैज्ञानिक, उद्यमी, खिलाड़ी, समाजसेवी अथवा कलाकार बन सकते हैं। उन्होंने सांसद श्री रवि किशन से आग्रह किया कि बच्चों को एक दिन शूटिंग स्थल पर ले जाकर फिल्म निर्माण और अभिनय प्रक्रिया से परिचित कराएं।
प्रदेश में युवाओं के लिए आगे बढ़ने के अनेक अवसर हैं, लेकिन सफलता के लिए हौसला, परिश्रम और लगातार प्रयास जरूरी है। विषम परिस्थितियों से जूझने और असफलता के बाद पुनः प्रयास करने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी। अमर उजाला परिवार के बाल मेला सम्मान समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिला तथा उनके सपनों को नई उड़ान देने के लिए मंच उपलब्ध हुआ।
समारोह को सांसद श्री रवि किशन शुक्ल ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर विधायक श्री विपिन सिंह, महापौर डॉ0 मंगलेश श्रीवास्तव, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 अनुपमा शर्मा कौशिक, अमर उजाला के सम्पादक श्री महेन्द्र तिवारी, यूनिट हेड श्री अरुण कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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