बलरामपुर-  जिला पंचायत सभागार में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा शैक्षिक उन्नयन संगोष्ठी एवं शिक्षक सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। संगोष्ठी में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षकों की भूमिका,विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बदलते समय के साथ शिक्षण पद्धतियों में सकारात्मक बदलाव आवश्यक है,ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा मिल सके।
सदर विधायक पल्टूराम ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा मजबूत होगी तो देश का भविष्य भी मजबूत होगा। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने शिक्षक समाज को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल ने कहा कि शिक्षकों के कंधों पर आने वाली पीढ़ी को दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। शिक्षक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा का लाभ मिल सके।
उप्र प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार तिवारी ने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल बच्चों को पाठ्यक्रम की जानकारी देने तक सीमित नहीं है,बल्कि उन्हें संस्कारवान,अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बनाने की भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों की समस्याओं का समाधान और विद्यालयों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी जरूरी है। संगठन शिक्षकों के हितों के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।
 ने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माता हैं और उनके योगदान को किसी भी स्तर पर कम करके नहीं आंका जा सकता। शैक्षिक उन्नयन के लिए शिक्षक,अभिभावक और जनप्रतिनिधि मिलकर कार्य करें तो विद्यालयों में सकारात्मक बदलाव तेजी से लाया जा सकता है। बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार,अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराना भी शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
संगोष्ठी में शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं, शैक्षिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तथा विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने आधुनिक तकनीक एवं नवीन शिक्षण विधियों का उपयोग करते हुए बच्चों की रुचि और क्षमता के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण बनाने तथा शिक्षा के स्तर को निरंतर ऊंचा उठाने का संकल्प लिया। संगोष्ठी में शिक्षक संघ के पदाधिकारी,शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

             हिन्दी संवाद न्यूज से
               रिपोर्टर वी. संघर्ष
                 बलरामपुर। 

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know

और नया पुराने