उ0प्र0 ने बॉटम थ्री से निकलकर देश की टॉप थ्री इकोनॉमी के रूप में स्वयं को स्थापित किया
तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए, परम्पागत उद्यमों को पुनर्जीवित किया गया
96 लाख एम0एस0एम0ई0 यूनिट संचालित, इनमें सवा तीन करोड़ युवा रोजगार के साथ जुडे़
लखनऊ : 15 जुलाई, 2026 :ः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि विगत 09 वर्षों में प्रदेश में राज्य सरकार ने स्पष्ट नीति और दृढ़ नीयत के साथ कार्य करते हुए कानून का राज स्थापित किया है। आज सरकार के पास नीति भी है और उसे जमीनी धरातल पर उतारने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति भी है। पिछले 09 वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था तथा प्रति व्यक्ति आय को 03 गुना करने में सफलता प्राप्त हुई है। प्रदेश में विमेन वर्क फोर्स की भागीदारी तीन गुना बढ़ी है। जो उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था, वह आज बॉटम थ्री से निकलकर देश की टॉप थ्री इकोनॉमी के रूप में स्वयं को स्थापित किया है।
मुख्यमंत्री जी आज यहां ‘पंचायत आज तक उत्तर प्रदेश’ कॉन्क्लेव में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज राजधानी लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों, जनपदों तथा व्यवसायों से जुड़े लोग उपस्थित हैं। उत्तर प्रदेश की प्रगति को हम सभी ने पिछले एक दशक में देखा है। बदलते हुए भारत में उत्तर प्रदेश की भूमिका क्या हो सकती है, उत्तर प्रदेश कैसे आगे बढ़ सकता है, उत्तर प्रदेश की क्या आकांक्षाएं हैं। इन सभी बातों को अनुभव किया होगा। आज उत्तर प्रदेश की आकांक्षाएँ और उनकी पूर्ति सभी के सामने स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने से पहले देश की संसद में सांसद के रूप में उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने अवसर मिला था। उस दौरान उन्होंने प्रदेश की अनेक मूलभूत समस्याओं को निकट से देखा तथा संसद सहित विभिन्न मंचों पर उन्हें लगातार उठाया। उस समय उत्तर प्रदेश में बीमारी से मरना तथा माफिया के सामने नतमस्तक होना नियती बन चुकी थी। प्रदेश में विद्युत संकट, बुनियादी सुविधाओं का अभाव तथा युवाओं के सामने पहचान का संकट था। किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर था। ऐसी स्थिति देखकर अन्तःकरण में पीड़ा होती थी कि क्या इन समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में पिछले 09 वर्षों से डबल इंजन सरकार को शासन व सत्ता संचालन करने का अवसर मिला है। सत्ता में आने के बाद उपलब्ध प्रशासनिक व्यवस्था व टीम के साथ कार्य करते हुए उनकी कार्यशैली तथा मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया गया। आज उसके परिणाम सभी के सामने हैं। विगत 09 वर्षों में हम लोगों ने उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट से उबारा है। यदि यही बातें 09 वर्ष पूर्व कही जातीं तो शायद लोग विश्वास नहीं करते, किन्तु आज उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के संकट से बाहर निकलकर देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बना रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2014 से पूर्व केन्द्र में कॉग्रेस और यू0पी0ए0 की गवर्नमेन्ट थी। वर्ष 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। दोनों सरकारें मिलकर कार्य करने के बावजूद आमजन का विश्वास उन पर नहीं था। इसके विपरीत जब डबल इंजन सरकार बनी तो, पिछले 09 वर्षों में सरकार की नीतियाँ धरातल पर दिखाई दे रही हैं। पहले उत्तर प्रदेश का युवा अपनी पहचान छिपाता था, योग्य होने के बावजूद उसे रोजगार नहीं मिलता था तथा सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता का अभाव था। नौकरी पर कुछ सीमित जनपदों का कब्जा था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में सुरक्षा की स्थिति बदहाल थी। प्रदेश की कानून-व्यवस्था अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी। बहन-बेटी, व्यापारी, उद्यमी, मीडिया तथा आम नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे। अनेक जनपदों में परिवार अपनी बेटियों को स्थानीय विद्यालयों में भेजने के बजाय बाहर हॉस्टल अथवा रिश्तेदारों के यहाँ भेजने को विवश थे। प्रदेश में माफिया समानान्तर व्यवस्था चलाते थे। यहां निवेश का वातावरण अनुकूल नहीं था। अराजकता चरम पर थी। पूर्ववर्ती सरकारों की सहानुभूति प्रदेश के नागरिकों बहन-बेटी के लिए नहीं, बल्कि माफिया के प्रति थी। उनकी सहानुभूति आज भी प्रदेश के नागरिकों के लिए नहीं दिखती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विगत 09 वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश को अपराध, माफिया, दंगा और अराजकता से मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया तथा उसे धरातल पर लागू किया। देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य आज दंगा मुक्त, कर्फ्यू मुक्त, माफिया मुक्त तथा अराजकता मुक्त हो चुका है। उत्तर प्रदेश अपनी परम्परागत पहचान, उत्सवों और विकास की नई यात्रा के साथ आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यदि वर्ष 2017 से वर्ष 2026 तक की उपलब्धियों की तुलना पूर्ववर्ती सरकारों से की जाए और यह रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा जाए, तो प्रदेश की जनता स्वयं परिवर्तन का आकलन कर सकती है। वर्ष 2003 से 2017 के बीच प्रदेश में शासन करने वाले समाजवादी पार्टी और अन्य सरकारों की कार्य पद्धतियां भी जनता के सामने हैं। प्रदेश सरकार की 09 वर्षों की कार्यप्रणाली पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने है। सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता के समक्ष उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री जी के विजनरी और डायनेमिक लीडरशिप में विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सभी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सफल हुआ है। विकसित भारत का मतलब किसी व्यक्ति, जाति, क्षेत्र, भाषा या पार्टी का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का भारत कैसा होना चाहिए। इसमें 140 करोड़ भारतीय के चेहरे पर खुशहाली, हर हाथ को काम, हर खेत को पानी, हर बहन और बेटी स्वावम्बन की दिशा में अग्रसर, हर व्यापारी मजबूती के साथ राष्ट्र की जीवन रेखा बनकर स्वयं को आगे बढ़ा सके। उस नये भारत के निर्माण के लिए हम विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प के साथ जुड़े हुए हैं। विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को केवल डबल इंजन सरकार ही पूरा कर सकती है। इस बार एक रिकॉर्ड टूटने वाला है। पहली बार कोई सरकार तीन बार लगातार रिपीट करेगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने कहा था कि सरकार द्वारा भेजे गए 100 रुपये में से केवल 15 रुपये ही लाभार्थी तक पहुँचते हैं। शेष राशि अलग-अलग स्तरों पर समाप्त हो जाती थी, जिससे गरीब, छात्र, किसान, वृद्धजन, महिलाओं तथा अन्य पात्र लाभार्थियों का अधिकार प्रभावित होता था। लेकिन आज डी0बी0टी0 के माध्यम से यदि 100 रुपये यदि हम लाभार्थी के खाते में भेजते है, तो वह सीधे लाभार्थी तथा पात्र व्यक्ति तक पहुंचता है। आज केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर वर्ष इन्सेफेलाइटिस से लगभग 1,200 से 1,500 मौतें होती थीं। हर परिवार संशकित रहता था कि पता नहीं कौन बच्चा इसकी चपेट में आ जाए। लेकिन आज इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौतों पर प्रभावी अंकुश लगा है। प्रदेश में भूख से भी कुछ मौतें होती थी। आज हम उन्हें 100 प्रतिशत सैचुरेट कर चुके हैं, जो लोग भूख से मरते थे। उन्हें जमीन के पट्टे मिल चुके हैं। उनका अपना आवास बन चुका है। उन गरीबों के कल्याण के लिए उन्हें आयुष्मान भारत योजना का लाभ, रसोई गैस कनेक्शन तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही, प्रदेश को पहचान दिलाने वाले परम्पागत उद्यमों को फिर से पुनर्जीवित किया गया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आजादी के बाद वर्ष 1950 के आस-पास भारत की अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 14 प्रतिशत था, जो वर्ष 2017 में घटकर लगभग 07 प्रतिशत रह गया था। देश प्रगति कर रहा था, लेकिन उत्तर प्रदेश अवनति की ओर उन्मुख था। प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगातार घट रही थी। किसान अपने खेत में जाने से डरता था। इसका प्रमुख कारण अन्नदाता किसानों को समय पर सिंचाई, बीज, बिजली तथा अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध न होना था। कृषि उत्पादन होने के बावजूद किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता था और बिचौलियों को लाभ प्राप्त होता था। एग्रीकल्चर प्रदेश का आधार थी, लेकिन सरकार के स्तर पर कोई प्रोत्साहन नहीं था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब मैन्युफैक्चरिंग पावर परम्परागत उद्यम के साथ जुड़ती है, तो बेहतर परिणाम देती है और इकोनॉमी को गति प्रदान करती हैं। मैन्युफैकचरिंग के लिए हमारे पास एम0एस0एम0ई0 का बेहतरीन नेटवर्क था। लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों के इन्सपेक्टर राज ने उसे तबाह कर दिया। उद्यमी विभागीय उत्पीड़न का शिकार थे। उनके पास टेक्नोलॉजी, पैकेजिंग और मार्केटिंग की सुविधा नहीं थी। वह लोग निराश और हताश होकर पलायन करने के लिए मजबूर थे, जो कभी आत्मनिर्भर इकाई बनकर स्वावलम्बन का जीवन व्यतीत करते थे। प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2017 से वर्ष 2026 के बीच कृषि विकास दर 08 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई सुविधा तथा अन्य कृषि संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश में किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 1970 के दशक से लम्बित सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को पूर्ण कर लगभग 14 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ दिया गया है। विगत 10 वर्षों में प्रदेश में 24 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी गई है। दशकों से लम्बित परियोजनाओं का कार्य पूर्ण हुआ। बुन्देलखण्ड में अर्जुन सहायक परियोजना तथा अन्य सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई एवं पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसी प्रकार बाणसागर परियोजना के भी बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। आज प्रदेश के किसानों को खेती के लिए प्रतिदिन 10 घंटे निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। 14-16 लाख प्राइवेट ट्यूबवेलों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध करायी गई है। इससे किसानों की लागत कम हुई है और कृषि उत्पादन को प्रोत्साहन मिला है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2007 से 2017 के मध्य 29 चीनी मिलें बंद हो चुकी थीं। 21 चीनी मिलें बेच दी गई थीं। पूर्वी उत्तर प्रदेश की एक ऐसी चीनी मिल जिसकी जमीन की कीमत 100 करोड़ रुपये से ऊपर थी, उसे मात्र 03 करोड़ रुपये मे बेच दिया गया। वर्ष 2017 में जब हमारी सरकार बनी, तब प्रदेश में अन्नदाता किसानों का 10 वर्ष का गन्ना मूल्य भुगतान लम्बित था। प्रदेश सरकार ने विगत 09 वर्षों में 3.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान सीधे किसानों के खातों में कराया है। 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य किसानां को उपलब्ध कराया जा रहा है। आज प्रदेश में 122 चीनी मिलों का संचालन किया जा रहा है। इन चीनी मिलों में 105 चीनी मिलें ऐसी है, जो चार दिन के अन्दर गन्ना मूल्या का भुगतान कर रही हैं। शेष चीनी मिलों को 15 दिन के अन्दर गन्ना किसानों को भुगतान करने के लिए कहा गया है। सरकार गन्ना किसानों को समय से उनके गन्ना मूल्यों का भुगतान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज सरकार किसानों की उपज बिचौलियों के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे उनसे खरीदती है। यदि बाजार में बेहतर मूल्य उपलब्ध हो, तो किसान स्वतंत्र रूप से अपनी उपज बेच सकते हैं, अन्यथा सरकार एम0एस0पी0 में लागत का डेढ़ गुना दाम पर खरीद करती है। साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, स्वॉयल हेल्थ कार्ड तथा अन्य योजनाओं के माध्यम से किसानों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। खेती की बढ़ी विकास दर डबल इंजन सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गई सुविधाओं का परिणाम है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एम0एस0एम0ई0) जो दम तोड़ चुके थे, वह आज फिर से आगे बढ़े हैं। सरकार के प्रयासों से एम0एस0एम0ई0 क्षेत्र को नई गति मिली है। आज प्रदेश मे सबसे ज्यादा 96 लाख एम0एस0एम0ई0 यूनिट संचालित हैं। प्रत्येक एम0एस0एम0ई0 को सरकार 05 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा बीमा उपलब्ध करा रही है। इन इकाइयों के अन्तर्गत सवा तीन करोड़ युवा रोजगार के साथ जुड़ चुके हैं। इसके लिए उन्हें टेक्नोलॉजी, डिजाइन, पैकेजिंग तथा बाजार से जोड़ना पड़ा। सरकार ने कॉमन सर्विस सेन्टर बनाकर टेक्नोलॉजी को भी अपग्रेड किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सुशासन के लिए कानून का राज और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश ने इस दिशा में प्रभावी कार्य करते हुए आज राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नई पहचान स्थापित की है। विगत 12 वर्षां में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 100 से अधिक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रारम्भ की गई हैं। इन योजनाओं में उत्तर प्रदेश अग्रणी है। गरीबां को वह सभी सुविधाएं दी जा रही है, जिसके लिए वह दशकां से लालायित था। आज कोई भी उनके पास राशन या अनाज नहीं मिलने की शिकायत लेकर नहीं आता है। वर्ष 2017 के समय सर्वाधिक शिकायत गरीबों को राशन न मिलने से सम्बन्धित आती थीं। हमने फेयर प्राइस शॉप पर ई-पॉस मशीने लगायी हैं, ताकि गरीबों के हक पर कोई डकैती न डाल सके। 80 हजार फेयर प्राइस शॉप की निगरानी की जा रही है। यदि किसी गांव में फेयर प्राइस शॉप पर घटतौली होती है, तो हमारी टीम वहां जाकर छापेमारी तथा अन्य कार्यवाही करती है। हम मॉडल शाप बना रहे हैं। आज प्रदेश में लगभग 16 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन की सुविधा का लाभ दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गरीबों के घर में शौचालय बनाए गए हैं। आज किसी बहन-बेटी को अपनी गरिमा छुपाने के लिए शाम का इंतजार नहीं करना पड़ता, क्योंकि उनके घर में शौचालय बन गया है। उनके पेयजल की समस्या का भी समाधान हुआ है। आज प्रदेश के 75 जनपदों में समान रूप से बिजली उलपब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2017 से पूर्व पीक आवर कुल 15 से 16 हजार मेगावॉट में विद्युत खपत होती थी। लेकिन आज 35 हजार मेगावॉट विद्युत खपत होती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर का मॉडल विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर नीतिगत सुधार किए गए। विभिन्न क्षेत्रों के लिए 34 से अधिक सेक्टोरल नीतियां तैयार की गईं। प्रारम्भिक चरण में निवेशकों का विश्वास पुनर्स्थापित करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि पहले यह धारणा थी कि उत्तर प्रदेश में निवेश का अनुकूल वातावरण नहीं है।
सरकार ने विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर नीतियाँ तैयार कीं तथा निवेश के लिए पारदर्शी और अनुकूल वातावरण विकसित किया। परिणामस्वरूप प्रदेश को लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये की ग्राउण्ड ब्रेकिंग हो चुकी है। इन निवेशों के माध्यम से 65 लाख युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है। 7.5 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव तैयार हैं। शीघ्र ही कोई तिथि तय करते हुए उनकी ग्राउण्ड ब्रेकिंग कराने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पहले प्रदेश के सड़कों की स्थिति अच्छी नहीं थी। ऐसी मान्यता थी कि उत्तर प्रदेश की सीमा वहां से शुरू होती है, जहां से गड्ढा युक्त सड़कें तथा सांयकाल होते ही अंधेरा प्रारम्भ हो जाए। आज सड़कों का सबसे अच्छा नेटवर्क उत्तर प्रदेश में है। देश के एक्सप्रेस-वे का 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश के पास है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा एयर कनेक्टिविटी से जड़े एयरपोर्ट है। पहले प्रदेश में केवल 02 एयरपोर्ट संचालित थे। आज प्रदेश में 17 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें 05 अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भी है। हाल ही में नोएडा अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री जी के कर कमलों से हुआ है। इस एयरपोर्ट के पास लगभग 14 हजार एकड़ लैण्ड है। अयोध्या, कुशीनगर, लखनऊ तथा वाराणसी में अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। नए एयरक्राफ्ट आने के पश्चात यहां से बेहतरीन सुविधा प्राप्त होगी। 05 नये एयरपोर्ट पर काम किया जा रहा है। चित्रकूट, आजमगढ़, श्रावस्ती, अलीगढ़, मुरादाबाद तथा सोनभद्र सहित अन्य क्षेत्रों में कोई भी एयरपोर्ट की कल्पना नहीं करता था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल, 12-लेन एक्सप्रेस-वे तथा विभिन्न शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं के विस्तार से आवागमन बेहतर हुआ है। आज प्रदेश के 07 शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। यहां देश का पहला इन्लैण्ड वॉटर-वे वाराणसी से हल्दिया तक संचालित हो चुका है। यह नया उत्तर प्रदेश है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आजादी के बाद सबसे बड़ा लोकतांत्रिक आन्दोलन चलाने वाले श्रद्धेय जयप्रकाश नारायण जी के नाम पर जे0पी0एन0आई0सी0 सेन्टर समाजवादियों ने बनाने का प्रयास किया था। उसकी डी0पी0आर0 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन 864 करोड़ रुपये खर्च हो गए थे। फिर भी कार्य अधूरा रहा। इसके बगल में गंगा के रूप में मां गोमती नदी स्थित है। गोमती रिवर फ्रन्ट के नाम पर 167 करोड़ रुपये का डी0पी0आर0 बना था, लेकिन 1,400 करोड़ रुपये खर्च हो गए थे। फिर भी कार्य अधूरा रहा। एक तरफ गरीब भूख और बीमारी से मर रहा था। दूसरी तरफ खजाना लुटवाया जा रहा था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना का शिलान्यास दिसम्बर, 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। परियोजना की कुल लागत 15,200 करोड़ रुपये तथा चौड़ाई 110 मीटर एवं लम्बाई 340 किलोमीटर थी। वर्ष 2017 में जब सरकार बदली तो उन्होंने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना की समीक्षा के दौरान निविदा प्रक्रिया एवं भूमि उपलब्धता से जुड़े अनेक विषयों का परीक्षण किया। समीक्षा के दौरान परियोजना की प्रगति शून्य पायी गई, क्योंकि परियोजना के अन्तर्गत आवश्यक भूमि ही उपलब्ध नहीं थी। इसके उपरान्त परियोजना को आवश्यक प्रक्रियाओं के अनुरूप पुनर्गठित करते हुए समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ाया गया। अधिग्रहण की कार्यवाही में लगभग 02 वर्ष लगे। जब हमारे पास लगभग 90 प्रतिशत भूमि उपलब्ध हो गई, तो पुनः फाइनेंशियल एवं टेक्निकल बिड व टेण्डर कराया गया। 120 मीटर चौड़ा तथा 341 किलोमीटर लम्बा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे 11,800 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया। आज यह एक्सप्रेस-वे पूर्वी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आबकारी नीति में भी व्यापक सुधार किए गए हैं। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश को 12 हजार करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी प्राप्त होती थी। नई व्यवस्था के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। आज 63 हजार करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी प्राप्त हो रही है। इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि हुई, जिसका उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के परिणामस्वरूप सभी समुदायों के धार्मिक व सांस्कृतिक पर्व एवं त्योहार शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हो रहे हैं। सरकार की नीति प्रारम्भ से ही यह रही है कि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा, सम्मान तथा कानून के संरक्षण के साथ अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का अवसर प्राप्त हो। इसी कारण प्रदेश में नवरात्रि, रामवनमी, दुर्गा पूजा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, कांवड़ यात्रा आदि त्योहारों एवं धार्मिक आयोजनों का वातावरण पहले की तुलना में अधिक शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित हुआ है। पूर्व में जिन आयोजनों पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए जाते थे, आज वे सभी कानून-व्यवस्था के साथ सुचारु रूप से आयोजित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आज आस्था की बात करते हैं, जबकि पूर्व में उनके कार्यकाल के दौरान अनेक ऐसे निर्णय और घटनाएँ हुईं, जिनसे जनभावनाएँ आहत हुईं। उन लोगों ने पवित्र हनुमानढ़ी मन्दिर की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाकर वातावरण को विषाक्त करने का प्रयास किया था। यदि वह सेकुलर थे, तो किसी मस्जिद में हनुमान चालीसा का भी पाठ करा देते। आस्था की बात वह लोग कर रहे हैं, जिन्होंने श्रीराम और श्रीकृष्ण को नकारा था। उन्होंने प्रत्येक स्थिति में श्रीराम मन्दिर के निर्माण में बैरियर लगाने का प्रयास किया था। आज उन्हें अयोध्या मन्दिर चढ़ावे की चोरी महत्वपूर्ण लग गई हैं। वह अपनी डकैती तथा घोटाले की चर्चा नहीं करते हैं। उस समय केन्द्र में काँग्रेस तथा प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थीं। उन्होंने रामभक्तों की आस्था को आहत किया था।
ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एस0आई0टी0 का गठन किया है। वह एक स्वतंत्र ट्रस्ट है। सरकार का उस पर कोई हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। एस0आई0टी0 की रिपोर्ट आते ही ट्रस्ट ने कार्रवाई शुरू की। जो 06 लोग विजुअल में चोरी करते हुए पकड़े गए, उनकी गिरफ्तारी हुई तथा जो उनमें सहयोग कर रहे थे, उनकी भी गिरफ्तारी हुई। नैतिक आधार पर 02 इस्तीफे दिए गए। इसके नाम पर अयोध्या और श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम और हिन्दू आस्था पर प्रहार करना उचित नहीं है। जब यहीं लोग सत्ता में थे तो तब आस्था पर प्रहार करते थे और अराजकता फैलाते थे। जबकि आज सभी आस्था के केन्द्र देश के लिए मॉडल बन रहे हैं और उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ा रहे है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत के संरक्षण और सम्मान के साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी है। अयोध्या में आस्था को सम्मान मिला है। इससे अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। अयोध्या में लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन आकर दर्शन करते हैं और अपनी आस्था का सम्मान पाते हैं। साथ ही, वहाँ पर्यटन, व्यापार, होटल, परिवहन, स्थानीय रोजगार तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिली है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से स्थानीय अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ प्राप्त हो रहा है तथा विभिन्न वर्गों के लोगों की आय में वृद्धि हुई है। इससे वहां के फूल विक्रेता, रिक्शा चालक, टैक्सी चालक, नाविक, चाय बेचने वाला, होटल एवं रेस्तरां संचालक, छोटे व्यापारी तथा सेवा क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है। धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रयागराज में भव्य एवं दिव्य महाकुम्भ का आयोजन हुआ 45 दिन के इस आयोजन में एक नाविक परिवार ने 30 करोड़ रुपये की इनकम अर्जित की, जो उस समय मीडिया की सुर्खियों का हिस्सा बना। महाकम्ुभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल तथा विभिन्न वर्गों के लोगों को रोजगार एवं आय के नए अवसर प्राप्त हुए।

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