जलालपुर, अंबेडकरनगर। दसवीं मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा) पर जलालपुर क्षेत्र में अकीदत और गम का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में ताजिए और अलम हाय-हुसैन की गमगीन सदाओं के बीच चिलवनिया स्थित कदीमी बड़ी दरगाह कर्बला में सुपुर्द-ए-लहद किए गए। इस दौरान हजारों अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
नगर के जाफराबाद स्थित बड़े इमामबाड़े से मौलाना असगर एजाज कायमी के खिताब के बाद महिलाओं, पुरुषों और बच्चों का नंगे पांव मातमी जुलूस निकला। जुलूस जाफराबाद, उस्मानपुर होते हुए करीब तीन किलोमीटर दूर चिलवनिया स्थित बड़ी दरगाह कर्बला पहुंचा। अलम, ताजियों और दुलदुल के साथ निकले जुलूस में "या हुसैन" की सदाएं गूंजती रहीं। कई अजादारों ने परंपरानुसार छुरी और कमा से मातम कर कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद किया। घायल हुए अजादारों के उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगपुर की चिकित्सा टीम मौके पर तैनात रही।
नगपुर, आसीपुर, उस्मानपुर, मुस्तफाबाद, जाफराबाद, काजीपुरा, करीमपुर समेत आसपास के गांवों से सैकड़ों ताजिए बड़ी दरगाह पहुंचे। शिया समुदाय के लोगों ने दिनभर रोज़ा (फाका) रखा और शाम को सात प्रकार के भुने दानों तथा सबील से फाका खोला।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। बड़ी दरगाह परिसर में जिलाधिकारी ईशा प्रिया, पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक तेजवीर सिंह, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रंजीत, उपजिलाधिकारी राहुल गुप्ता, तहसीलदार निखिलेश कुमार, क्षेत्राधिकारी अनूप कुमार सिंह तथा कोतवाल अजय प्रताप सिंह यादव पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। पूर्व पालिकाध्यक्ष हाजी कमर हयात अंसारी, पूर्व पालिकाध्यक्ष अबुल बशर अंसारी और आलोक यादव सहित अनेक गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन को सफल बनाने में इब्ने अली जाफरी, मोहम्मद अब्बास, राजा अब्दुल्ला, इनाम जाफरी, जुल्फिकार अली, अली हैदर, शाहिद अली, कर्रार मेहदी, मोहम्मद शारिब और नन्हे प्रधान समेत अन्य लोगों ने सहयोग किया।
जुलूस संपन्न होने के बाद बड़े इमामबाड़े में देर रात तक शाम-ए-गरीबां की मजलिसें आयोजित हुईं। मौलाना हैदर मेहंदी ने अपने बयान में कर्बला के बाद यजीदी सेना द्वारा हुसैनी खेमों में आग लगाए जाने और अहलेबैत पर हुए अत्याचारों का मार्मिक वर्णन करते हुए लोगों की आंखें नम कर दीं।
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