औरैया // कस्बा कुदरकोट के मठिन मोहल्ला स्थित पशु अस्पताल करीब 2 वर्ष से बंद पड़ा है इससे क्षेत्र के करीब 60 गांवों के पशुपालक किसानों को पशुओं के इलाज के लिए प्राइवेट डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है पशु पालक किसानों ने बताया कि करीब 2 वर्ष पूर्व यहां तैनात पशु डॉ. नीलेश का स्थानांतरण एरवाकटरा पशु अस्पताल में हो गया था उनके तबादले के बाद से अब तक यहां किसी नए डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है इससे यह अस्पताल बंद पड़ा है ग्रामीण किसानों ने बताया कि इस अस्पताल में करीब 60 गांव संबद्ध हैं इनमें कुदरकोट, बीबीपुर, नगला राजा, रामपुर खास, नूराबाद खास, मानीकोठी, नगला चंदन, गपकापुर, गोपियापुर, राजपुर, नगला जादो, नगला लालजू, सारी व शीश ग्राम सहित कई और गांव शामिल हैंं इन गांवों में हजारों पशु अक्सर हर साल बीमार होते हैं मुंहपका, खुरपका, बुखार और अन्य बीमारियों से ग्रसित पशुओं के इलाज के लिए लोगों को क्षेत्र के झोलाछाप व प्राइवेट पशु डॉक्टरों को बुलाना पड़ता है इससे वह इलाज के अलावा आने जाने की मनमानी फीस की वसूली करते हैं।

परिसर में गांव वाले जमाए कब्जा डेढ़ साल से बंद पशु अस्पताल के चालू न होने से सिरफिरे ग्रामीणों ने इसके परिसर का उपयोग अपने निजी कार्यों के लिए करना शुरू कर दिया है कुछ ग्रामीण यहां अपने पशु बांध रहे हैं और गृहस्थी का सामान भी रखे हुए हैं ग्रामीण किसानों का कहना है कि कोई देखरेख न होने से परिसर भी बदहाल होता जा रहा है सरकारी पशु अस्पताल बंद होने से प्राइवेट डॉक्टर से पशुओं का इलाज कराना पड़ता है इसके अलावा प्राइवेट डॉक्टर के आने का काफी देर तक इंतजार भी करना पड़ता है और चार्ज भी ज्यादा लेते हैं कुदरकोट के किसानों का कहना है कि अगर पशु अस्पताल नियमित रूप से चालू हो जाए तो समस्याएं कम हो जाएंगी पशु पालकों को अस्पताल बंद रहने से पशुओं को इलाज के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ता है वहीं इस मामले में पशु चिकित्साधिकारी एरवा कटरा डॉ. दिलीप कुमार का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण कुदरकोट पशु अस्पताल में डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो सकी है इस समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है क्षेत्र में किसी पशु को चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता हो तो पशुपालक 1962 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं पशु पालक किसानों में दीनानाथ, सुमेर सिंह, रज्जनलाल, रामवीर, सुरेंदर, रामपाल और रामसनेही ने बताया कि ज्यादा गंभीर पशु अक्सर डॉक्टर के देरी से आने पर दम भी तोड़ देते हैं पशु पालक किसानों ने जिलाधिकारी से जल्द पशु डॉक्टर की तैनाती कर अस्पताल चालू कराने की मांग की है।

रिपोर्ट :- जितेन्द्र कुमार हिन्दी संवाद न्यूज उत्तर प्रदेश

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