₹39,571 करोड़ निवेश से यूपी डिफेंस कॉरिडोर बना रक्षा विनिर्माण का हब, 15,000 से अधिक रोजगार की संभावनाएं
₹13,486 करोड़ की परियोजनाएं धरातल पर, 9 विनिर्माण इकाइयां हुईं संचालित, 65 कंपनियों को भूमि आवंटन
कानपुर, झांसी और लखनऊ निवेश में अग्रणी, उत्तर प्रदेश बन रहा भारत का रक्षा विनिर्माण हब
लखनऊ: 30 जून, 2026
रक्षा विनिर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता और उत्तर प्रदेश के वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विज़न को नई उड़ान दे रहा है उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा विकसित डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी)। वर्ष 2018 में स्थापित यह कॉरिडोर आज देश का सबसे बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनकर उभरा है, जहां ₹39,571 करोड़ के निवेश प्रस्ताव भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
यूपीडा की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट सहित छह रणनीतिक नोड्स में विकसित हो रहे इस कॉरिडोर ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। परियोजना के लिए अधिग्रहित 2,095 हेक्टेयर भूमि में से 1,141.79 हेक्टेयर भूमि उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है।
यूपीडीआईसी के मुख्य महाप्रबंधक कर्नल संजय सिंह ने बताया कि अब तक 65 कंपनियों को रक्षा एवं संबद्ध विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है, जो उत्तर प्रदेश के निवेश-अनुकूल औद्योगिक वातावरण में उद्योगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लगभग ₹13,486 करोड़ की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं, जिनसे करीब 15,300 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे राज्य की रक्षा विनिर्माण क्षमता को भी नई मजबूती मिलेगी।
निवेश के मामले में कानपुर नोड सबसे आगे है, जहां सर्वाधिक ₹12,948 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसके बाद झांसी (₹12,190 करोड़), लखनऊ (₹4,850.67 करोड़), अलीगढ़ (₹4,581 करोड़), चित्रकूट (₹4,392 करोड़) और आगरा (₹607 करोड़) का स्थान है। औद्योगिक प्रगति की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि यह है कि वर्तमान में कानपुर, लखनऊ और अलीगढ़ में तीन-तीन फैक्ट्रियों सहित कुल नौ विनिर्माण इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है।
कॉरिडोर की प्रमुख उपलब्धियों में अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड द्वारा कानपुर में ₹1,500 करोड़ के निवेश से स्थापित देश के सबसे बड़े गोला-बारूद (अम्यूनिशन) निर्माण संयंत्र में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है। इसके अलावा, अलीगढ़ नोड में वेरीविन डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड ने ₹65 करोड़ के निवेश से छोटे हथियारों (स्मॉल आर्म्स) का उत्पादन शुरू किया है, जबकि नित्या क्रिएशन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने ₹12 करोड़ की लागत से प्रिसिजन आर्म्स कंपोनेंट्स और श्रीधा उद्योग ने ₹3.70 करोड़ के निवेश से प्रिसिजन कंपोनेंट्स का निर्माण प्रारंभ कर दिया है। वहीं, एमिटेक (।डप्ज्म्ब्भ्) ने भी ₹330 करोड़ के बड़े निवेश के साथ अपना स्पेस पोर्ट स्टेशन सफलतापूर्वक संचालित कर राज्य के डिफेंस इकोसिस्टम में एक नया अध्याय जोड़ा है।
जबकि लखनऊ उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी एवं एयरोस्पेस का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां एरोलॉय टेक्नोलॉजीज ने ₹320 करोड़ के निवेश से टाइटेनियम कास्टिंग का उत्पादन शुरू किया है। वहीं ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने ₹300 करोड़ की लागत से स्थापित अपनी इकाई में ब्रह्मोस एनजी मिसाइल प्रणाली के उत्पादन एवं असेंबली का कार्य प्रारंभ कर दिया है। संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस ने ₹14 करोड़ के निवेश से सुरक्षा उपकरण एवं विशेष वस्त्रों का निर्माण शुरू किया है।
कानपुर में ए.आर. पॉलिमर्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹48 करोड़ के निवेश से बैलिस्टिक सामग्री और सुरक्षा उपकरणों का उत्पादन शुरू किया है, जबकि अधुनिक मैटेरियल्स एंड साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड ने ₹38.58 करोड़ के निवेश से रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष टेक्सटाइल का निर्माण प्रारंभ किया है।
मजबूत निवेश, तीव्र गति से विकसित हो रहे औद्योगिक बुनियादी ढांचे तथा विभिन्न नोड्स पर उत्पादन शुरू होने के साथ उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर देश के सामरिक विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह कॉरिडोर रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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