जलालपुर | अंबेडकर नगर
जनपद अंबेडकर नगर के जलालपुर तहसील अंतर्गत ग्राम करौंदी से विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर, चौंकाने और प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित गुलाम नबी का आरोप है कि उनका विद्युत कनेक्शन संख्या 761630979011 का समस्त वैध भुगतान पूर्व में किया जा चुका है तथा नियमानुसार कनेक्शन स्थायी रूप से बंद (पी.डी.) भी कराया जा चुका है, इसके बावजूद विद्युत विभाग से जुड़े कुछ कथित कर्मचारी ₹1,26,000 का फर्जी बकाया बताकर जबरन वसूली का दबाव बना रहे हैं।
❗ बिना बिल, बिना नोटिस—सीधे धमकी और डराने का खेल
पीड़ित के अनुसार, आज तक न तो कोई लिखित बिल, न ही कोई वैधानिक नोटिस प्रस्तुत किया गया है। केवल मौखिक रूप से कहा जा रहा है—
“₹1.26 लाख का बिल आया है, पैसा जमा करो, नहीं तो अंजाम भुगतो।”
विरोध करने पर नए वैध कनेक्शन को काटने, झूठे मुकदमे में फँसाने, और “दूसरा भारी-भरकम बिल भेज देने” जैसी खुली धमकियाँ दी जा रही हैं, जो न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि सीधे-सीधे आपराधिक श्रेणी में आता है।
👥 नामजद आरोप, परिवार पर मानसिक हमला
इस पूरे प्रकरण में मनीराम वर्मा को मुख्य मास्टरमाइंड बताते हुए आरोप लगाया गया है कि वह अपने साथ अनुज कुमार और धर्मेंद्र यादव को लेकर बार-बार पीड़ित के घर पहुँचता है। गाली-गलौज, अभद्र भाषा, धमकी और मानसिक उत्पीड़न से पीड़ित का पूरा परिवार भय और तनाव में जी रहा है।
सूत्रों की मानें तो मनीराम वर्मा पूरे क्षेत्र में इसी प्रकार की कथित अवैध वसूली के लिए पहले से ही चर्चित रहा है, जिससे जनता का भरोसा विद्युत विभाग से पूरी तरह टूट चुका है।
❤️ हार्ट पेशेंट दंपति, सदमे में परिवार
स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि पीड़ित गुलाम नबी और उनकी पत्नी दोनों हार्ट पेशेंट हैं, बीपी की नियमित दवाएँ चल रही हैं। विभागीय धमकियों के बाद से दोनों गहरे सदमे में हैं, स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। इसके बावजूद न तो विद्युत विभाग और न ही प्रशासन की ओर से अब तक परिवार से कोई संपर्क किया गया है।
📄 प्रशासन को सौंपा गया प्रार्थना पत्र, फिर भी सन्नाटा
पीड़ित द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में—
- निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जाँच
- फर्जी बकाया/बिल तत्काल निरस्त
- दोषियों पर कठोर वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई
- परिवार को सुरक्षा
जैसी स्पष्ट माँगें की गई हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी नामित व्यक्तियों की होगी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक कोई जाँच, कोई नोटिस, कोई कार्यवाही नहीं हुई।
⚠️ जाँच के नाम पर लीपा-पोती?
सूत्रों का दावा है कि विभाग निष्पक्ष जाँच के बजाय भ्रष्टाचारियों को बचाने और लीपा-पोती में जुटा है। कथित तौर पर आरोपी खुलेआम कहते फिर रहे हैं—
“ज़्यादा बोलोगे तो दूसरा बिल बनाकर भेज देंगे, जितना करना है कर लो, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा, जाँच तो हमारा ही विभाग करेगा।”
❓ बड़े और गंभीर सवाल
- पी.डी. कनेक्शन होने के बाद वसूली किसके इशारे पर?
- बिना बिल और नोटिस धमकी देना किस नियम के तहत?
- क्या यह केवल फील्ड-लेवल गुंडागर्दी है या विभागीय मिलीभगत?
- क्या प्रशासन जानबूझकर आँख मूँदे बैठा है?
🔍 जनहित का मामला, प्रशासन की साख दांव पर
यह मामला अब केवल एक उपभोक्ता का नहीं रहा, बल्कि विद्युत उपभोक्ताओं के अधिकार, प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून के राज की कसौटी बन चुका है। यदि समय रहते निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रकरण अवैध वसूली की प्रवृत्ति को और बढ़ावा देगा।
अब पूरे जिले की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या भ्रष्टाचार एक बार फिर सिस्टम की छाया में दबा दिया जाएगा?
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