जनता से दूरी बनाकर और मोदी के नाम पर जीत का सपना संजोना भाजपा के अधिकतर सांसदों के हार का कारण बन गया, पिछले पांच वर्षों में जनता के बीच में रहने की बजाय सांसदों ने उनसे दूरी बनाए रखी। इसके चलते छब्बीस सांसदों को हार का स्वाद चखना पड़ा।
भाजपा के हारने वाले प्रमुख सांसदों में 
अयोध्या से लल्लू सिंह, अमेठी से स्मृति ईरानी, चंदौली महेंद्र नाथ पांडेय,सुल्तानपुर से मेनका गाँधी,आजमगढ़ से दिनेश लाल निरहुआ, बस्ती से हरीश द्विवेदी, फतेहपुर से निरंजन ज्योति, आवला से धर्मेंद्र कश्यप, बाँदा आर के सिंह पटेल, धरौहरा से रेखा वर्मा, मोहनलालगंज से कौशल किशोर, मुज्जफरनगर से संजीव बालियान, एटा से राजवीर सिंह, 
 इटावा से रामशंकर कठेरिया, , जालौन से भानु प्रताप सिंह वर्मा, कैराना से प्रदीप कुमार, कन्नौज से सुब्रत पाठक, कौशांबी से विनोद सोनकर, मछलीशहर से बीपी सरोज, प्रतापगढ़ से संगम लाल गुप्ता, रामपुर से धनश्याम लोधी, सलेमपुर से रवींद्र कुशवाहा, संत कबीर नगर से प्रवीण कुमार निषाद, सीतापुर से राजेश वर्मा  तथा हमीरपुर से पुष्पेंद्र सिंह शामिल हैंl


          हिन्दी संवाद न्यूज़ से
                 वी. संघर्ष

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