जौनपुर। मनरेगा योजना में लाखों का घोटाला नई नवेली दुल्हनो का भी जाबकार्ड                   

डीएम ने मनरेगा डीसी को सौंपा जांच पड़ताल            

जौनपुर। शाहगंज विकासखंड के मेहरावां गांव में मनरेगा योजना में लाखों का फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच पड़ताल डीसी मनरेगा भूपेंद्र सिंह को दिया है। लेकिन डीसी मनरेगा ने जिलाधिकारी के निर्देश के बाद पत्रावली पर कुंडली मारे बैठे हैं। ज्ञातव्य है कि मेहरावां गांव में मनरेगा योजना में सात लाख से अधिक खर्च किए गए हैं और जमीन पर कोई कार्य नहीं किया गया है। इसका भंडाफोड़ तब हुआ जब ग्रामपंचायत के सदस्य महेन्द्र कुमार विन्द और सुरेन्द्र सिंह ने आरटीआई एक्ट के तहत मनरेगा योजना में शामिल मजदूरों का जाबकार्ड और खर्च किए गये धनराशि का हिसाब मांगा तो सच सामने आ गया। दी गई सूचना में सात लाख रुपए मजदूरों के नाम निकाल गया है। प्रधान रानी सिंह एवं उनके पति पर लगाए गए आरोप में कहा गया है कि गावं के मानिन्द ठाकुर परिवार की घूंघट वाली दुल्हनों का भी नाम शामिल है यही नहीं उनको काम दिखा कर बैंक से हजारों रुपए की निकासी भी हुई है। सबसे ज्यादा मजेदार बात यह है कि जो दिल्ली या मुंबई बाहर है उनके नाम भी जाबकार्ड है और बैंक से हजारों रुपए निकाल कर धनराशि का बंन्दरबांट किया गया है। यहां तक कि 75 या 80 साल के बुजुर्ग महिला पुरुष को भी मनरेगा योजना के काम मे दिखाकर पैसा निकाला गया है।जो बुजुर्ग महिला पुरुष ठीक से चल फिर नहीं सकते हैं उन्हें भी मनरेगा का मजदूर बनाकर धनराशि डिसवर्स किया गया है। दोनों लोगों ने स्कूलों के कायाकल्प एवं खेल के मैदान के नाम पर भी आधा-अधूरा काम दिखाकर पैसे खाते से निकाले गए हैं। जबकि स्कूल बरसात में टपक रहा है और खेल का मैदान तों केवल कागज पर हैं। जिलाधिकारी को सौपे गये ज्ञापन मे प्रधान पति पर संस्कारी धन के दुरपयोग का आरोप लगाया गया है। इसकी शिकायत शासन से लेकर जिला प्रशासन तक किया गया है। डीएम ने मनरेगा डीसी को 13 जुलाई को जांच सौंपी है लेकिन अभी तक जांच आगे नही बढ़ पाई है। ग्रामीणों ने मामले की जांच पड़ताल नहीं होने पर धरने की चेतावनी दी है।

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