औरैया // कृषि विज्ञान केन्द्र परवाहा के सहयोग से ग्राम गड़े का पुरवा में मक्के की फसल में कीट नियंत्रण हेतु फेरोमोन ट्रैप (गंध पाश यंत्र) का किया गया वितरण इस वितरण योजना में चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य जनपद में जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ साथ जैविक तरीके से फसलों पर लगने वाले कीटों पर नियंत्रण पाना क्यों कि मक्के की खेती के लिए तना छेदक कीट एवं काले रंग की सूंडी का प्रकोप हानि कारक होता है यह हानिकारक कीट कभी कभी मक्के की सम्पूर्ण फसल को पूरी तरह चट कर समाप्त कर देती है जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है सुंडियों का आकार 20 से 25 मिमी लम्बी और स्लेटी सफेद रंग की होती है जिसका सिर काला होता है और चार लम्बी भूरे रंग की लाइन होती है इस कीट की सुंडियाँ तनों में छेद करके अन्दर ही अन्दर खाती रहती हैं जिससे फसल के प्रारम्भिक अवस्था में प्रकोप के फलस्वरूप मृत गोभ बनता है, परन्तु बाद की अवस्था में प्रकोप होने पर पौधे कमजोर हो जाते हैं और भुट्टे छोटे आते हैं एवं हवा चलने पर पौधा बीच से टूट जाता है जिससे पौधा पूरी तरह नष्ट हो जाता है अधिक जानकारी हेतु किसान भाई जिला कृषि विज्ञान केन्द्र,परवाहा में उपस्थित कृषि संरक्षण विशेषज्ञ अंकुर झा से सम्पर्क करें। 

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