उतरौला(बलरामपुर)
ग्रामीण बैंक के दैनिक वेतन भोगी, अंशकालिक कर्मचारियों के साथ हो रहे घोर उपेक्षा, अन्याय व सौतेला व्यवहार के खिलाफ अरेबिया के जिला मंत्री अभिषेक राही,सचिव निराला, संगठन सचिव अमित कुमार विश्वकर्मा ने भारत सरकार और नाबार्ड को पत्र लिखकर बड़ी चिंता जाहिर करते हुए इनके सुरक्षा व राष्ट्रीय कृत बैंक कर्मियों की तरह बेहतर व्यवस्था की मांग करी है। 
पत्र में लिखा है कि कोरोनावायरस, ब्लैक फंगस महामारी के चलते देश के अधिकतर राज्यों में लॉकडाउन लगा है। लॉकडाउन के चलते कारोबार, व्यापार,अस्त व्यस्त है। लोगों को आर्थिक परेशानियों से गुजारना पड़ रहा है। कोरोना की पहली लहर हो या अब चल रही दूसरी लहर। जहां एक तरफ सरकार लोगों को घरों में रहने का निर्देश दे रही है। तो वहीं इस महामारी में नागरिकों को राहत देने के लिए देश की राष्ट्रीयकृत बैंक और उनके कर्मचारी निरंतर कार्य में डटे हुए हैं। इन्हीं की तरह ग्रामीण बैंकों के लाखों दैनिक एवं अंशकालिक कर्मचारी भी कोरोना योद्धा के रूप में अपनी सेवाएं देकर अपना फर्ज निभा रहे हैं। लेकिन इन्हें राष्ट्रीय कृत बैंकों के कर्मचारियों की तरह लाभ ना मिल पाना इनके साथ सौतेला व्यवहार करने जैसा है। इन कर्मीयों का कहीं भी जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। जबकि अंशकालिक एवं दैनिक वेतन कर्मचारी ग्राहकों के सामने द्वारपाल की तरह सबसे पहले पेश होकर बैंकों में आने वाले ग्राहकों के समस्याओं से अवगत होकर संबंधित काउंटर तक पहुंचाते हैं। लेकिन इनकी सुरक्षा का कोई प्रबंध तक नहीं है। ऐसे में यह कहने में कोई हर्ज नहीं होगा कि कोरोनावायरस की चपेट में आने या इसका शिकार होने की स्थिति में इन कर्मचारियों से बैंक द्वारा पल्ला झाड़ लिया जाएगा।
देश की मौजूदा 40 ग्रामीण बैंकों में लगभग चालीस हजार की संख्या में ऐसे दिहाड़ी वर्कर्स कार्यरत हैं। साफ सफाई व मैसेंजर की खाली सीट पर बदली कर्मचारी के रूप में पिछले कई वर्षों से काम कर रहे हैं। बिना नागा किए रोजाना कार्यालय आकर काम करने वाले इन कर्मचारियों का कोई भी रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं है। इनका मानदेय भी शाखा प्रबंधक निकालता है। और अपनी इच्छा अनुसार इनको मानदेय दे देता है। 
ग्रामीण बैंक में दैनिक वेतन या ठेके पर तथा अंशकालिक कर्मचारी के रूप में काम करने वाले कर्मचारी की मजदूरी निर्धारित करने वाला नाबार्ड भी कोरोना जैसी महामारी के दौर में इन्हें भूल बैठा है। नाबार्ड द्वारा जारी आदेश में भी इन कर्मियों का कोई जिक्र ना होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रामीण बैंकों को छोड़कर अन्य राष्ट्रीय कृत बैंकों के अंशकालिक व दैनिक कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन लाभ देने तथा कोरोना के कारण बीमा आदि का लाभ दिए जाने की व्यवस्था की गई है लेकिन ग्रामीण बैंक के दैनिक अथवा अंशकालिक कर्मचारियों को इसके लाभ की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
महामारी के इस दौर में सरकार और बैंक दोनों ही इन्हें भूल गए हैं कर्मचारियों के लिए आने वाले तमाम लाभो को पाने वाले कर्मचारियों की सूची में इनका नाम खोजने से भी नहीं मिलता बड़ी ही मासी इनके चेहरे पर उस वक्त देखी जा सकती है
 जब सफाई कर्मचारियों के लिए कोई पैकेज आता है और इन्हीं के सामने इनके साथ काम करने वाले अन्य कर्मचारियों का उठाते हैं। लेकिन इस अन्याय के खिलाफ भी कोई आवाज नहीं उठा रहा है।
असगर अली
उतरौला

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