रिपोर्ट शोभित अवस्थी
मुजाहिदपुर में चल रहे विराट संत सम्मेलन एवं श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस में कथा व्यास अविचल महराज ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।नैमिषारण्य धाम से पधारे प्रख्यात सन्त स्वामी सुरेशानंद पूरी महराज ने अपने प्रवचनों से धर्म की अलख जगाई। श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास अविचल महराज ने कहा कि जब पिता शांतनु ने भीष्म (देवव्रत) की भीषण प्रतिज्ञा और पितृभक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान दिया था।महाभारत के युद्ध में अर्जुन के बाणों से आहत होकर भीष्म पितामह पृथ्वी पर गिरे और लेटे रहे।उन्होंने तुरंत प्राण नहीं त्यागे, क्योंकि वे [सूर्य के उत्तरायण]होने की प्रतीक्षा कर रहे थे और सूर्य उत्तरायण होते ही प्राण त्यागे।कथा व्यास ने परीक्षित जन्म,कृष्ण द्वारिका प्रस्थान के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।सन्त सम्मेलन में नैमिषारण्य धाम से पधारे श्री श्री 1008 स्वामी सुरेशानंद पूरी महराज ने अपने सम्बोधन में कहा की धर्माचरण करने से ही मनुष्य को सद्गति मिल सकती है।मनुष्य का जन्म मोक्ष प्राप्ति का साधन है।धार्मिक आयोजन में मुख्य अतिथि पूर्व राज्यसभा सांसद डॉक्टर अशोक बाजपेयी ने भी विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम के बाद पूर्व राज्यसभा सांसद/कैबिनेट मंत्री डॉ अशोक बाजपेयी बावन कस्बे में विधायक प्रतिनिधि धर्मेश मिश्रा के आवास पर पहुंचे और समर्थकों के साथ विभिन्न राजनीतिक विषयों पर चाय के साथ चर्चा की।
कार्यक्रम में कथा यजमान सपत्नीक सुनील सिंह,दंडी स्वामी राजेश्वरानंद महराज,बाबा निर्भय गिरी महराज,धर्मेश मिश्रा,निजी सचिव अनुज मिश्रा, पंकज शुक्ला,कैलाश दीक्षित, शक्ति मिश्रा,हर्ष वर्धन सिंह,सुजीत सिंह,आदि लोग मौजूद रहे।
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