मुख्यमंत्री ‘पुलिस स्मृति दिवस-2026’ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए

मुख्यमंत्री ने पुलिस शहीद स्मारक स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर विनम्र
श्रद्धांजलि दी, शहीद पुलिस कर्मियों के स्वजनों से भेंट कर उन्हें सम्मानित किया

राष्ट्र की सुरक्षा, समाज की शान्ति और नागरिकों के
जीवन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने
वाले पुलिसकर्मियों के प्रति पूरा देश सदैव कृतज्ञ रहेगा : मुख्यमंत्री

फील्ड ड्यूटी में तैनात उपनिरीक्षक और निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मियों के मोटरसाइकिल भत्ते को 700 रु0 से बढ़ाकर 1,000 रु0 प्रतिमाह, पी0पी0एस0 अधिकारियों के यूनिफॉर्म भत्ते को 6,400 रु0 से बढ़ाकर 15,000 रु0 किया गया

 ड्यूटी पर तैनात आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों
के सिम भत्ते को 2,000 रु0 से बढ़ाकर 2,500 रु0 करने की घोषणा

शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को 425 करोड़ रु0
से अधिक की सहायता प्रदान की गई

विजयादशमी के ठीक अगले दिन पुलिस स्मृति दिवस का
आयोजन बुराई पर अच्छाई की विजय के संदेश को और गहरा करता
 
21 अक्टूबर हमें स्वतंत्रता, राष्ट्रभक्ति, साहस और
सर्वोच्च बलिदान की गौरवशाली परम्परा का स्मरण कराता

प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया

प्रदेश में अपराध और माफिया के विरुद्ध चलाए गए अभियान के
परिणामस्वरूप 15,000 करोड़ रु0 से अधिक की अवैध सम्पत्तियाँ जब्त की गई

माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि पर लखनऊ में अत्याधुनिक
यू0पी0 स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज की स्थापना की गई

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 02 लाख 26 हजार से अधिक
पुलिसकर्मियों की भर्ती सम्पन्न, 35,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया अन्तिम चरण में

उ0प्र0 पुलिस में महिला कर्मियों की संख्या लगभग 10,000 से बढ़कर 45,000 हो गई

देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए
पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक
लखनऊ : 21 अक्टूबर, 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा, समाज की शान्ति और नागरिकों के जीवन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों के प्रति पूरा देश सदैव कृतज्ञ रहेगा। शहीदों का बलिदान केवल स्मारकों पर अंकित नामों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राष्ट्र की नैतिक चेतना में सदैव जीवित रहता है। उनका साहस, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। उत्तर प्रदेश सरकार पुलिस बल के सम्मान, कल्याण, आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण और कार्यक्षमता में वृद्धि के साथ-साथ प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री जी आज यहाँ रिजर्व पुलिस लाइन्स में ‘पुलिस स्मृति दिवस-2026’ के अवसर पर आयोजित ’स्मृति परेड’ कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पुलिस शहीद स्मारक स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि दी तथा शहीद पुलिस कर्मियों के स्वजनों से भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। मुख्यमंत्री जी ने स्मृति परेड की सलामी ली तथा शोक पुस्तिका प्राप्त की।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार पुलिस बल के कल्याण और उनकी कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए लगातार कदम उठा रही है। फील्ड ड्यूटी में तैनात उपनिरीक्षक और निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मियों के मोटरसाइकिल भत्ते को 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह किया जा रहा है। पी0पी0एस0 अधिकारियों के यूनिफॉर्म भत्ते को 6,400 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया जा रहा है। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों के सिम भत्ते को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए लगातार फील्ड में रहना पड़ता है। कई बार उन्हें लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है और कठिन परिस्थितियों में भी तत्पर रहना पड़ता है। उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भत्तों में वृद्धि की जा रही है, ताकि वे बेहतर सुविधाओं के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
विगत 01 वर्ष में देशभर में 154 पुलिसकर्मियों ने प्राणों की आहुति देकर अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। इनमें उत्तर प्रदेश के 06 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। उन्होंने प्रदेश के वीर बलिदानियों-उपनिरीक्षक श्री सत्यभान सिंह, उपनिरीक्षक श्री मोहित कुमार यादव, आरक्षी श्री अशोक कुमार, आरक्षी श्री प्रदीप कुमार, फायर सर्विस चालक श्री तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित कुमार का स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
इन वीर पुलिसकर्मियों ने नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्र की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। उनका बलिदान पुलिस बल की गौरवशाली परम्परा का हिस्सा है। राष्ट्र उनकी सेवाओं को सदैव याद रखेगा और उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। पुलिस स्मृति दिवस का महत्व केवल श्रद्धांजलि अर्पित करने तक सीमित नहीं है। यह अवसर हमें उन परिवारों के त्याग को समझने का भी अवसर देता है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने प्रियजनों को खोया है। शहीदों के परिवारों का सम्मान और उनकी सहायता सुनिश्चित करना सरकार तथा समाज का साझा दायित्व है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद अपराध के विरुद्ध चलाए गए अभियानों में उत्तर प्रदेश पुलिस के 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए और 1,953 पुलिसकर्मी घायल हुए। शहीद निरीक्षक श्री सुनील कुमार को इस वर्ष मरणोपरान्त राष्ट्रपति जी द्वारा सम्मानित किया गया है। कर्तव्यपालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों का सम्मान पूरे पुलिस संगठन और राष्ट्र का सम्मान है। पुलिसकर्मियों की बहादुरी और त्याग का मूल्य किसी आँकड़े में सीमित नहीं किया जा सकता। प्रत्येक शहीद के पीछे एक परिवार, अनेक सपने और जीवनभर की स्मृतियाँ होती हैं। शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को पुलिस सहायता पैकेज के अन्तर्गत 425 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार उनके कल्याण, सम्मान और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। पुलिसकर्मियों का मनोबल मजबूत करना तथा शहीद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। शहीद परिवारों का त्याग राष्ट्र के प्रति समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता। पुलिस के अमर शहीदों की राष्ट्र सेवा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान और त्याग उत्तर प्रदेश पुलिस ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
पुलिसकर्मियों के साथ-साथ उनके परिवारों के कल्याण पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों के लिए 05 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने वाले स्वास्थ्य कार्ड बनाए गए हैं। इससे पुलिस परिवारों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जरूरतों के समय सहायता उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। पुलिसकर्मियों का मनोबल तभी मजबूत रहेगा, जब उन्हें यह विश्वास होगा कि सरकार उनके और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति संवेदनशील है। पुलिस बल के आधुनिकीकरण के साथ-साथ कर्मियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण और सेवा सम्बन्धी सुविधाओं पर ध्यान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कल सम्पूर्ण देश विजयादशमी के उत्सव में डूबा हुआ था। कहीं रावण के पुतलों का दहन हो रहा था, तो कहीं शोभायात्राएँ निकाली जा रही थीं। चारों ओर उल्लास और उमंग का वातावरण था। जब लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार की खुशियाँ साझा कर रहे थे, उस समय पुलिसकर्मी मुस्तैदी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे, ताकि प्रत्येक नागरिक निर्भय होकर उत्सव का आनन्द ले सके। पुलिसकर्मियों की यह सतत सेवा ही नागरिकों के जीवन में सुरक्षा और विश्वास का आधार है।
इस वर्ष विजयादशमी के ठीक अगले दिन पुलिस स्मृति दिवस का आयोजन बुराई पर अच्छाई की विजय के संदेश को और गहरा करता है। विजयादशमी हमें अन्याय, अधर्म और बुराई के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देती है। पुलिसकर्मी भी कानून और व्यवस्था की रक्षा करते हुए समाज में भयमुक्त वातावरण स्थापित करने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। कुछ ऋण ऐसे होते हैं, जिन्हें चुकाया नहीं जा सकता। राष्ट्र पर शहीदों का ऋण भी इसमें सम्मिलित है। उनके बलिदान को स्मरण करते हुए हमारा मन श्रद्धा और सम्मान से भर उठता है। उनके साहस से मस्तक गर्व से ऊँचा होता है और उनके प्रति कृतज्ञता हमें अपने दायित्वों का बोध कराती है।
किसी भी राष्ट्र की महानता इससे निर्धारित होती है कि वह अपने इतिहास, मूल्यों और उन लोगों के योगदान को कितना सम्मान देता है, जिनके त्याग से वर्तमान सुरक्षित और भविष्य सम्भव हुआ है। स्मृति हमें अपनी विरासत के साथ-साथ अपने दायित्वों का भी बोध कराती है। स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण हमें स्वाधीनता का मूल्य और उसके लिए चुकाई गई कीमत याद दिलाता है। संविधान निर्माताओं का स्मरण न्याय, समता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। इसी प्रकार पुलिस के अमर शहीदों को नमन करने से हमें यह समझने की प्रेरणा मिलती है कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक सतत दायित्व है। इसके निर्वहन के लिए किसी को अपना सुख, अपने सपने और कभी-कभी अपना पूरा जीवन तक समर्पित करना पड़ता है।
हमारा सामान्य जीवन जितना सहज दिखायी देता है, उसकी सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों को उतने ही असाधारण दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। किसी बच्चे का सुरक्षित विद्यालय पहुँचना, किसी बेटी का स्वतंत्र भाव से घर से बाहर निकलना, किसी व्यापारी का निर्भय होकर कारोबार चलाना तथा संकट के समय किसी नागरिक को सहायता प्राप्त होना सामान्य अनुभव प्रतीत होते हैं, लेकिन इनके पीछे पुलिस व्यवस्था का निरन्तर प्रयास, सतर्कता और समर्पण होता है। पुलिसकर्मी दिन-रात नागरिकों की सुरक्षा में लगे रहते हैं। उन्हें त्योहारों, सार्वजनिक आयोजनों, आपदाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। कई बार कर्तव्यपालन के दौरान उन्हें अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है और अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 21 अक्टूबर भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण तिथि है। इसी दिन वर्ष 1943 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द सरकार की स्थापना कर भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया था। इसी तारीख को वर्ष 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के 10 वीर जवानों ने चीनी सैनिकों के घात लगाकर किए गए हमले का वीरतापूर्वक सामना किया और मातृभूमि की आन, बान और शान की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। एक ही तारीख पर इतिहास के दो महत्वपूर्ण अध्याय हमारे सामने आते हैं। एक ओर देश की आजादी के लिए सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा है, तो दूसरी ओर स्वतंत्र राष्ट्र और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर करने का कर्तव्यबोध। इस प्रकार 21 अक्टूबर हमें स्वतंत्रता, राष्ट्रभक्ति, साहस और सर्वोच्च बलिदान की गौरवशाली परम्परा का स्मरण कराता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक राष्ट्र को समर्पित करते हुए पुलिस बल के गौरवशाली इतिहास, साहस और बलिदान की स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने पर विशेष बल दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक के निर्माण की पहल की थी। राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर अंकित प्रत्येक नाम एक कहानी समेटे हुए है। प्रत्येक जवान के अपने व्यक्तिगत सपने, आकांक्षाएँ और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ रही होंगी, लेकिन जब कर्तव्य और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच कठिन चुनाव की घड़ी आयी, तब उन्होंने कर्तव्य को प्राथमिकता दी। हम शहीदों के जीवन की सभी परिस्थितियों को भले ही न जानते हों, लेकिन उनके अंतिम निर्णय के महत्व को अवश्य समझ सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला प्रदेश है। यहाँ की सामाजिक विविधता, आर्थिक सम्भावनाएँ, सांस्कृतिक विरासत, कृषि शक्ति, औद्योगिक आकांक्षाएँ और युवा ऊर्जा प्रदेश को देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती हैं। इन सम्भावनाओं को वास्तविक उपलब्धियों में बदलने के लिए आवश्यक है कि प्रदेश में कानून का राज मजबूत हो, नागरिक अपने अधिकारों के प्रति आश्वस्त रहें और समाज में सुरक्षा एवं न्याय के प्रति विश्वास कायम हो। विकास के लिए सुरक्षित वातावरण अनिवार्य है। इसलिए कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना केवल पुलिस प्रशासन का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति, निवेश, रोजगार और सामाजिक स्थिरता का भी आधार है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के शासनकाल में पुलिसकर्मियों को अपने दायित्वों के निर्वहन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। थानों में सीलन भरी बैरकें थीं, छतों से पानी टपकता था और पुलिस बल की बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जाती थी। पी0ए0सी0 की कम्पनियों को बंद करने के प्रयासों से भी पुलिस बल की क्षमता प्रभावित हुई। पुलिसकर्मियों के हथियार जर्जर थे। ऐसी स्थिति में कानून का प्रभाव कमजोर होता है और आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है।
वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में 815 दंगे हुए। प्रत्येक दंगे का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गरीब की दुकान, मजदूर की रोजी-रोटी और बच्चे की पढ़ाई तक प्रभावित होती है। दंगों से समाज में भय और अविश्वास बढ़ता है तथा आर्थिक गतिविधियाँ बाधित होती हैं। मथुरा के जवाहर बाग प्रकरण में पुलिस अधीक्षक श्री मुकुल द्विवेदी और थाना प्रभारी श्री संतोष यादव को अपने प्राण गँवाने पड़े।
वर्ष 2017 में प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद पुलिस को निर्देश दिए गए कि वह गरीब, पीड़ित, व्यापारी और बहन-बेटियों के सम्मान तथा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। साथ ही, समाज में आतंक फैलाने वाले अपराधियों, माफिया और दंगाइयों के प्रति कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उत्तर प्रदेश में अपराध और माफिया के विरुद्ध चलाए गए अभियान के परिणामस्वरूप 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध सम्पत्तियाँ जब्त की गई हैं। माफिया के अवैध साम्राज्य पर प्रभावी कार्रवाई की गई है। अपराधियों के कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि का उपयोग गरीबों के हित में किया जा रहा है। हाल ही में प्रयागराज में माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि पर गरीब परिवारों के लिए 602 आवासीय फ्लैटों के निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया गया। यह इस बात का उदाहरण है कि अपराध से अर्जित सम्पत्ति और अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन का उपयोग जनहित में किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत होने से आम नागरिकों में विश्वास बढ़ा है। अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ-साथ अवैध सम्पत्ति को जब्त कर उसे जनकल्याण के लिए उपयोग में लाना शासन की जवाबदेही और कानून के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। पहले प्रदेश में दंगों और उपद्रव की घटनाएँ गम्भीर चुनौती थीं, जबकि अब सरकार का उद्देश्य शांति, सुरक्षा और विकास का वातावरण बनाए रखना है। मजबूत कानून-व्यवस्था के कारण प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार हुई हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के 07 बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की जा चुकी है। इस व्यवस्था के माध्यम से बड़े शहरी क्षेत्रों में पुलिस प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का त्वरित समाधान करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। शहरीकरण, बढ़ती जनसंख्या और अपराध की बदलती प्रकृति के अनुरूप पुलिस प्रशासन को सक्षम बनाना आवश्यक है। कमिश्नरेट व्यवस्था, आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता से पुलिस की कार्यक्षमता को मजबूत किया जा रहा है।
वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में एक साथ लगभग 6,000 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता थी। सरकार ने विगत 09 वर्षों में प्रशिक्षण व्यवस्था की क्षमता को बढ़ाकर लगभग 60,000 तक पहुँचाया है। इससे पुलिस बल की आवश्यकताओं के अनुरूप बड़ी संख्या में कर्मियों को प्रशिक्षित करने में सहायता मिली है। प्रदेश में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 02 लाख 26 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है। किसी भी भर्ती में भ्रष्टाचार के बिना योग्यता के आधार पर चयन सुनिश्चित किया गया है। 35,000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया अन्तिम चरण में है।
पुलिस बल की संख्या बढ़ाने के साथ प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और कर्मियों की कार्यक्षमता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध होने से कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध की रोकथाम और नागरिकों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। उत्तर प्रदेश पुलिस में महिला कर्मियों की संख्या लगभग 10,000 से बढ़कर 45,000 हो गई है। पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से महिला सुरक्षा, पीड़ित महिलाओं की शिकायतों के निस्तारण और पुलिस प्रशासन में उनकी भूमिका को विस्तार मिला है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सरकार की प्राथमिकता है।
कुशल खिलाड़ी योजना के अन्तर्गत लगभग 1,000 पदक विजेता खिलाड़ी उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी धारण कर रहे हैं। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुलिस सेवा में अवसर मिलने से उन्हें अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के साथ राष्ट्र और प्रदेश की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। जापान में आयोजित एशियन गेम्स में एथलेटिक्स में सुश्री पारुल चौधरी, कबड्डी में श्री अर्जुन देशवाल, क्रिकेट में श्री रिंकू सिंह और हॉकी में श्री राजकुमार पाल ने अपने प्रदर्शन से उत्तर प्रदेश पुलिस और देश का नाम रोशन किया है। खेल अनुशासन, परिश्रम, टीम भावना और संघर्ष की क्षमता विकसित करते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि पर लखनऊ में अत्याधुनिक यू0पी0 स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज की स्थापना की गई है। आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक अपराधों की वैज्ञानिक जाँच, साक्ष्यों के विश्लेषण और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्तमान समय में साइबर अपराधों की चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में प्रत्येक जनपद में साइबर थाना और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है। साइबर अपराध से पीड़ित नागरिकों को सहायता उपलब्ध कराने और डिजिटल माध्यमों से होने वाले अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा रहा है।
वर्तमान सरकार ने राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के प्रति कठोर रुख अपनाया है। ए0टी0एस0 ने देवबंद से लेकर सीमावर्ती जनपदों तक कमाण्ड सेण्टर स्थापित कर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और स्लीपर सेल के विरुद्ध कार्रवाई को मजबूत किया है। ऐसी गतिविधियों की पहचान करना, उनके नेटवर्क को तोड़ना और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है।
अन्तरराज्यीय स्तर पर सक्रिय पेपर लीक माफिया, जहरीली शराब के सौदागरों, एके-47 जैसे स्वचालित हथियारों का प्रदर्शन करने वाले कुख्यात अपराधियों, डकैतों और आतंकवाद से जुड़े तत्वों के विरुद्ध एस0टी0एफ0 ने प्रभावी कार्रवाई की है। इन कार्रवाइयों से स्पष्ट संदेश गया है कि प्रदेश में अपराध करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है। पेपर लीक जैसी घटनाएँ युवाओं के भविष्य, उनकी मेहनत और रोजगार की सम्भावनाओं को नुकसान पहुँचाती हैं। इसी प्रकार जहरीली शराब का अवैध कारोबार नागरिकों के जीवन के लिए गम्भीर खतरा पैदा करता है। ऐसे अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना सरकार की प्राथमिकता है। अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस को सक्रिय, जवाबदेह और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में पी0ए0सी0 की कम्पनियों को समाप्त करने के कारण पुलिस बल की क्षमता प्रभावित हुई थी। वर्तमान सरकार ने इन कम्पनियों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया है, जिससे पी0ए0सी0 की क्षमता और गौरव को पुनः स्थापित करने में सहायता मिली है। पी0ए0सी0 उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। कानून-व्यवस्था की विशेष परिस्थितियों, भीड़ नियंत्रण, संवेदनशील आयोजनों और आपात स्थितियों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
सरकार ने लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी, गोरखपुर में वीरांगना झलकारीबाई कोरी और बदायूँ में वीरांगना अवन्तीबाई लोधी के नाम पर 03 नई महिला पी0ए0सी0 बटालियनों का गठन किया है। उनके नाम पर महिला बटालियनों की स्थापना महिला शक्ति के सम्मान के साथ-साथ पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का भी प्रतीक है। इन बटालियनों के माध्यम से महिला पुलिसकर्मियों को नए अवसर उपलब्ध कराने और महिला सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने का कार्य किया जा रहा है। भारतीय इतिहास की वीरांगनाओं ने साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणादायी परम्परा स्थापित की है।
अंग्रेजों के शासनकाल में बनाए गए पुलिस और दण्ड सम्बन्धी कानूनों का उद्देश्य भारतीय नागरिकों को न्याय देना नहीं, बल्कि उन्हें गुलाम बनाए रखना और उन पर दमन करना था। स्वतंत्र भारत में न्याय व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को न्याय प्रदान करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करना होना चाहिए। भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 के माध्यम से दमनकारी औपनिवेशिक कानूनों से हटकर भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित न्याय व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। पुलिस व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को गुलाम बनाना या उन पर दमन करना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा करना, अपराधों की रोकथाम करना और कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित करने में सहयोग देना है।
कार्यक्रम को पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कृष्ण ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना श्री संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक पी0ए0सी0 श्री आलोक सिंह एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित थे।

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