सफलता की कहानी
अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग

मुरादाबाद में सौर ऊर्जा से संवर रहा जरूरतमंद बच्चों का भविष्य

दिनांक: 25 सितम्बर, 2026

‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ देश और प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना आम नागरिकों के घरेलू बजट को संतुलित करने के साथ उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार ला रही है। उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद की निवासी एवं स्थानीय निजी विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सरिता रानी इस योजना की एक विशिष्ट और प्रेरक लाभार्थी के रूप में सामने आई हैं। उन्होंने सौर ऊर्जा को न केवल अपनी आर्थिक बचत का आधार बनाया, बल्कि उस बचत से समाज के वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा को संबल प्रदान कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
श्रीमती सरिता रानी ने उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के तकनीकी मार्गदर्शन और जिला प्रशासन के सहयोग से अपने आवास की छत पर 03 किलोवाट क्षमता का ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया। इस संयंत्र की स्थापना पर उन्हें केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रावधानों के तहत कुल 1,08,000 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इसमें केंद्र सरकार द्वारा अनुमन्य 78,000 रुपये की वित्तीय सहायता तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली 30,000 रुपये की अतिरिक्त राज्य टॉप-अप सब्सिडी शामिल है। यह संपूर्ण अनुदान राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में अंतरित की गई, जिससे संयंत्र स्थापना का वित्तीय भार न्यूनतम हो गया। रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना और नेट-मीटरिंग प्रणाली के संचालन के उपरांत उनके परिवार को विद्युत बिलों के भारी आर्थिक बोझ से स्थायी राहत मिली है। संयंत्र से होने वाले सतत उत्पादन के चलते उन्हें प्रतिमाह लगभग 4,000 से 4,500 रुपये तक की नियमित बचत हो रही है। पूर्व में घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक विद्युत आपूर्ति के मासिक भुगतान में व्यय होता था, किंतु अब आवासीय ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति स्वतः उत्पादित स्वच्छ सौर ऊर्जा से हो रही है।
शिक्षा क्षेत्र से निरंतर जुड़े रहने के कारण श्रीमती सरिता रानी ने अपने कार्यक्षेत्र में अनुभव किया कि आर्थिक रूप से विपन्न परिवारों के कई बच्चे बुनियादी संसाधनों के अभाव में नियमित अध्ययन जारी रखने में कठिनाई महसूस करते हैं। पाठ्य-पुस्तकों, स्कूल यूनिफॉर्म और सामान्य मासिक शुल्क का प्रबंध न हो पाना उनकी शिक्षा में प्रमुख रुकावट बनता था। इस सामाजिक आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने सौर संयंत्र से होने वाली मासिक आर्थिक बचत को व्यक्तिगत उपभोग तक सीमित न रखकर गरीब एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा पर व्यय करने का संकल्प लिया। बिजली के बिल में होने वाली इस नियमित बचत से वे निरंतर निर्धन छात्रों को पाठ्य-पुस्तकें, नोटबुक, विद्यालयी गणवेश और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। इसके साथ ही अत्यंत असहाय बच्चों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति भी इसी राशि से की जा रही है। इस संवेदनशील पहल के माध्यम से सौर ऊर्जा से प्राप्त आर्थिक लाभ का विस्तार व्यक्तिगत गृहस्थी से आगे बढ़कर सीधे समाज और भावी पीढ़ी के सशक्तीकरण तक पहुंच रहा है।
श्रीमती सरिता रानी अपने व्यक्तिगत अनुभव को प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करते हुए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता का प्रसार भी कर रही हैं। वे आमजन को प्रेरित करते हुए स्पष्ट संदेश देती हैं कि सूर्य को अपने परिवार का एक उत्पादक सदस्य बनाया जाए और उससे प्राप्त होने वाले आर्थिक लाभ का उपयोग संतानों की उच्च शिक्षा तथा सुरक्षित भविष्य निर्माण में किया जाए। उनका यह व्यवहारिक दृष्टिकोण स्थानीय स्तर पर आम नागरिकों के मध्य पर्यावरण-संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक नई सोच विकसित कर रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरे प्रदेश में मिशन मोड के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के अधिक से अधिक आवासीय भवनों की छतों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। यूपीनेडा को इस व्यापक अभियान की राज्य स्तरीय नोडल संस्था का दायित्व सौंपा गया है, जो जिला प्रशासन और क्षेत्रीय तंत्र के समन्वय से समस्त तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति दे रही है। घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा प्रणाली अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार केंद्रीय सहायता के अतिरिक्त अपनी ओर से विशेष राज्य स्तरीय टॉप-अप अनुदान दे रही है। नीतिगत व्यवस्था के अनुसार 1 किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर राज्य सरकार द्वारा 15,000 रुपये तथा 02 किलोवाट अथवा उससे अधिक क्षमता पर 30,000 रुपये का अतिरिक्त अनुदान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जा रहा है। इस प्रकार केंद्र और राज्य के संयुक्त अनुदान से 03 किलोवाट तक के संयंत्रों पर उपभोक्ताओं को एक लाख रुपये से अधिक की सीधी वित्तीय राहत प्राप्त हो रही है।
योजना की क्रियान्वयन प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय पोर्टल की व्यवस्था लागू की गई है। इस सिंगल विंडो डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से वेंडर का चयन, तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट (टीएफआर) का अनुमोदन और बैंकों के माध्यम से रियायती ब्याज दरों पर संपार्श्विक-मुक्त ऋण की सुविधा पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध है। प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को प्राप्त आवेदनों के समयबद्ध निस्तारण, लोड स्वीकृति और त्वरित गति से स्मार्ट नेट-मीटरिंग स्थापित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा जनपद अयोध्या को प्रदेश की पहली मॉडल सोलर सिटी के रूप में सफलतापूर्वक विकसित किए जाने के उपरांत, अब इसी क्लस्टर मॉडल को मुरादाबाद सहित अन्य सभी नगर निगमों और प्रमुख जनपदों में सुनियोजित रूप से लागू किया जा रहा है। आवासीय बस्तियों और कॉलोनियों को क्लस्टर स्तर पर चिन्हित कर वहां व्यापक स्तर पर रूफटॉप सोलर लगाने का कार्य प्राथमिकता पर जारी है। ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के इस सुनियोजित विस्तार से प्रदेश के पात्र उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 300 यूनिट तक निःशुल्क सौर बिजली का वास्तविक लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे जहां एक ओर परिवारों का घरेलू बिजली बिल शून्य हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक थर्मल पावर ग्रिड पर निर्भरता और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ रही है। मुरादाबाद की श्रीमती सरिता रानी जैसी जागरूक लाभार्थियों के माध्यम से यह योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सामाजिक कल्याण का एक प्रभावी आधार बन चुकी है।

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