मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय
लखनऊ : 15 सितम्बर, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-
पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों का ड्यूटी भत्ता 500 रु0 प्रतिदिन से बढ़ाकर 600 रु0 प्रतिदिन किए जाने का प्रस्ताव अनुमोदित
ज्ञातव्य है कि प्रश्नगत प्रस्ताव के क्रियान्वयन के पश्चात पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों की 30 दिन की उपस्थिति के आधार पर ड्यूटी भत्ते में 3,000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी हो जाएगी।
पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों का ड्यूटी भत्ता 08 मार्च 2019 को 250 रुपये से बढ़ाकर 375 रुपये, 06 जनवरी 2022 को 375 रुपये से बढ़ाकर 395 रुपये तथा 16 अप्रैल 2025 को 395 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन किया गया था।
पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों द्वारा थानों, पुलिस लाइन्स, यातायात संचालन, उत्तर प्रदेश सचिवालय, न्यायालयों, जिलाधिकारी कार्यालयों सहित महत्वपूर्ण शासकीय भवनों की सुरक्षा, निर्वाचन ड्यूटी, धार्मिक स्थलों, प्रमुख मेलों, महाकुम्भ जैसे वृहद आयोजनों एवं त्योहारों में शान्ति-व्यवस्था तथा बाढ़ राहत व अग्निशमन जैसी आपदा ड्यूटी में यथावश्यकता पुलिस के साथ सक्रिय भागीदारी करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में प्रान्तीय रक्षक दल की स्थापना एक स्वयंसेवी सुरक्षा बल के रूप में ‘द यूनाइटेड प्रोविन्सेस रक्षक दल एक्ट-1948’ के माध्यम से शान्ति सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने के उद्देश्य से 11 दिसम्बर, 1948 को की गई।
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‘मुख्यमंत्री पी0आर0डी0 कैशलेस चिकित्सा योजना’ के अन्तर्गत उ0प्र0 प्रान्तीय रक्षक दल के स्वयंसेवकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश प्रान्तीय रक्षक दल के स्वयंसेवकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को ‘मुख्यमंत्री पी0आर0डी0 कैशलेस चिकित्सा योजना’ के माध्यम से कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। भविष्य में योजना में किसी भी परिवर्तन/संशोधन हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
योजना के तहत पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव इण्टीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से प्रति परिवार प्रतिवर्ष 05 लाख रुपये की सीमा तक तथा राजकीय चिकित्सालयों एवं साचीज से सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों में आयुष्मान आई0पी0डी0 (अन्तर्रोगी विभाग) में उपचार हेतु कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। सेवा समाप्ति के उपरान्त पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ अनुमन्य नहीं होगा।
ज्ञातव्य है कि पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों द्वारा उन्हें तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिए जाने की माँग समय-समय पर की जाती रही। 18 अगस्त, 2026 को जनपद गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी द्वारा प्रान्तीय रक्षक दल के स्वयंसेवकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिए जाने की घोषणा की गई।
युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल विभाग के अन्तर्गत कार्यरत नियतन 87,255 पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों के सापेक्ष वर्तमान में पंजीकृत 31,130 पी0आर0डी0 स्वयंसेवकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिए जाने पर, प्रति पी0आर0डी0 स्वयंसेवक 3,000 रुपये प्रीमियम की दर से, प्रतिवर्ष 9.34 करोड़ रुपये का वित्तीय व्यय भार अनुमानित है।
योजना के क्रियान्वयन हेतु युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनुपूरक अनुदान के माध्यम से नयी माँग के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष के शेष महीनों के लिए 05 करोड़ रुपये की व्यवस्था करा दी गई है।
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चित्रकूट लिंक एक्सप्रेस-वे को विकसित किए जाने हेतु संशोधित प्रायोजना प्रस्ताव के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने प्रवेश नियंत्रित ग्रीनफील्ड 6-लेन चित्रकूट लिंक एक्सप्रेस-वे का 15.172 कि0मी0 लम्बाई में ई0पी0सी0 मोड पर विकास किए जाने हेतु व्यय-वित्त समिति द्वारा पूँजीगत मदों हेतु संशोधित प्रायोजना प्रस्ताव के लिए 1008.67 करोड़ रुपये की मूल्यांकित लागत को अनुमोदित किया है।
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेस-वे (बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के चैनेज 0$000 निकट ग्राम गोण्डा) का निर्माण वाराणसी-बांदा मार्ग (राष्ट्रीय मार्ग संख्या-35/76) के कि0मी0 267 पर जनपद चित्रकूट में भरतकूप के निकट से प्रारम्भ होकर राष्ट्रीय मार्ग-135 बी0जी0 पर जनपद चित्रकूट में ग्राम अहमदगंज तक किया जाना प्रस्तावित है।
परियोजना के निर्माण हेतु राज्य सरकार का सम्भावित व्यय-भार 1008.67 करोड़ रुपये है। इसमें केन्द्र सरकार द्वारा किसी प्रकार की भागीदारी अपेक्षित/प्रस्तावित नहीं है। निर्णयोपरान्त निर्माणकर्ता के चयन हेतु ग्लोबल बिड आमंत्रित करने की कार्यवाही की जाएगी।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे पर सुचारु रूप से यातायात गतिमान है। बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के प्रारम्भिक बिन्दु से चित्रकूट धाम तक लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण हो जाने से पर्यटन क्षेत्र का तेजी से विकास होगा। सुदूर क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को सुगम एवं तीव्र यातायात की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
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उ0प्र0 खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 के प्रख्यापन का प्रस्ताव अनुमोदित
उत्तर प्रदेश विशेष रूप से खिलौना विनिर्माण का एक प्रमुख केन्द्र बनकर उभरा है, जो भारत के त्योहारों से सम्बन्धित वस्तुओं (एच0एस0 9505) के निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत का योगदान करता है। वाराणसी, झाँसी एवं चित्रकूट जैसे जनपद जी0आई0 टैग प्राप्त लैकवेयर तथा हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों हेतु प्रसिद्ध हैं, जो कारीगरों, महिलाओं एवं ग्रामीण समुदायों हेतु महत्वपूर्ण रोजगार सृजित करते हैं।
वर्तमान में यह उद्योग असंगठित रूप से संचालित हैं। इस नीति का लक्ष्य क्लस्टरों के विकास को समर्थन करने के लिए है, जिससे खिलौना विनिर्माण उद्योग की व्यवस्थित प्रगति सुनिश्चित हो सके।
नीति के विजन के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश के विकास हेतु खिलौना विनिर्माण एवं विपणन को एक प्रमुख विकास चालक के रूप में प्रोत्साहित करते हुए कुशल, अर्द्धकुशल एवं अकुशल मानव संसाधन का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना सम्मिलित है। राज्य के खिलौना क्लस्टरों में अतिरिक्त रोजगार के अवसरों का सृजन तथा कौशल विकास सुनिश्चित करना इस नीति का मिशन है। उत्तर प्रदेश को खिलौना विनिर्माण केन्द्र के रूप में विकसित करने हेतु प्रोत्साहन आधारित रूपरेखा के माध्यम से खिलौना विनिर्माण इकाइयों को बढ़ावा देना खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति का लक्ष्य है।
नीति की क्रियान्वयन रणनीति में विद्यमान उद्योगों के विस्तार एवं प्रौद्योगिकी उन्नति हेतु भूमि एवं अवस्थापना उपलब्ध कराना, पूर्वांचल, बुन्देलखण्ड एवं मध्यांचल क्षेत्रों में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहित करने हेतु विशेष प्रोत्साहन प्रदान करना, नए उद्यमों की स्थापना में सहायता करना एवं एम0एस0एम0ई0 तथा वृहद उद्योगों के साथ विद्यमान इकाइयों को समर्थन प्रदान करना सम्मिलित है।
इस नीति के क्रियान्वयन का प्रबन्धन उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा किया जाएगा। यह प्रोत्साहन सूक्ष्म, लघु, मध्यम (एम0एस0एम0ई0 वर्गीकरण के अनुसार) एवं वृहद तथा उससे उच्च के श्रेणी में वर्गीकृत खिलौना विनिर्माण इकाइयों अथवा खिलौना क्लस्टर उद्यमों को प्रदान किया जाएगा।
ऐसी खिलौना विनिर्माण इकाई जो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम श्रेणी के (एम0एस0एम0ई0) अन्तर्गत पात्र होगी, उसे ’उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति-2022 तथा उक्त नीति के निष्प्रभावी होने की स्थिति में उसकी उत्तरवर्ती नीति के अंतर्गत निर्धारित प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे।
लार्ज एवं उससे उच्च श्रेणी के अन्तर्गत स्थापित नवीन इकाइयाँ तथा विस्तार विविधीकरण करने वाली इस नीति के प्रस्तर-8.1, 8.2 एवं 8.3 के अनुसार प्रोत्साहनों हेतु पात्र होगी, जिसका क्रियान्वयन इन्वेस्ट यू0पी0 द्वारा किए जाएगा।
पात्र खिलौना विनिर्माण इकाइयों को प्रस्तर-8.1.2, 8.1.5 एवं 8.2 के अन्तर्गत फ्रण्ट-एण्ड सब्सिडी प्रोत्साहन के आरम्भ होने पर प्रदान की जाएगी। प्रस्तावित नीति के अन्तर्गत देय प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ होने के उपरान्त प्रदान किए जाएंगे।
इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली परियोजनाएँ राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहनों की पात्र नहीं होंगी। यद्यपि, इस नीति में निर्दिष्ट समस्त प्रोत्साहन भारत सरकार की किसी योजना/नीति के अन्तर्गत उपलब्ध प्रोत्साहनों के अतिरिक्त रूप में प्राप्त किए जाएंगे। यह नीति प्रख्यापन की तिथि से आगामी 05 वर्षों की अवधि तक अथवा सरकार द्वारा नवीन नीति के प्रख्यापन तक प्रभावी रहेगी।
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प्रदेश के अभियंत्रण विभागों में कार्यां के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन हेतु अभियन्ताओं को प्रदत्त वित्तीय अधिकारों की सीमा में वृद्धि का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के अभियंत्रण विभागों में कार्यां के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन हेतु अभियन्ताओं को प्रदत्त वित्तीय अधिकारों की सीमा में वृद्धि किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-1 में अभियंत्रण विभाग यथा-लोक निर्माण, सिंचाई, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग आदि के अभियन्ताओं को प्रदत्त वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन में समय-समय पर शासनदेशों के माध्यम से संशोधन/वृद्धि की जाती रही है। वर्तमान में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के शासनादेश संख्या-ए-2-1602/दस-95-24(14)-
निर्माण सामग्री, श्रम एवं सेवाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण कार्यों में अत्यन्त कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से अनुमोदन लिए जाने के कारण कार्यों के सम्पादन में विलम्ब का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारों के विकेन्द्रीकरण के फलस्वरूप आधारभूत संरचना, अनुरक्षण तथा निर्माण कार्यों का निष्पादन तीव्र गति एवं सुगमता से सम्पादित होगा।
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जनपद सिद्धार्थनगर के विधान सभा क्षेत्र शोहरतगढ़ के कस्बा शोहरतगढ़ तथा बढ़नी एवं जनपद हरदोई की तहसील सवायजपुर में बस स्टेशन के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की चिन्हित भूमि परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित एवं नामान्तरित करने का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने जनपद सिद्धार्थनगर के विधान सभा क्षेत्र शोहरतगढ़ के कस्बा शोहरतगढ़ तथा बढ़नी एवं जनपद हरदोई की तहसील सवायजपुर में बस स्टेशन के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की चिन्हित भूमि उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम के उपयोगार्थ/निवर्तन हेतु परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित एवं नामान्तरित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
बस स्टेशन का निर्माण होने से शहर के आस-पास जनसामान्य को रोजगार व बस स्टेशन परिसर में यात्रियों को सुविधाओं के साथ-साथ सुगम परिवहन सेवा प्राप्त होगी। इस परियोजना से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार एवं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी।
बेहतर परिवहन सुविधा से सामाजिक विकास, जीवन स्तर में सुधार एवं पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। अवसंरचना विकास के तहत सड़क नेटवर्क बेहतर होगा और यातायात समस्याओं में कमी आएगी। बस स्टेशन के निर्माण से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ेगा तथा व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी।
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प्रदेश में वाहनों की तकनीकी स्वस्थता सुनिश्चित किए जाने के प्रयोजनार्थ निजी क्षेत्र में स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ए0टी0एस0) की मान्यता, विनियमन व नियंत्रण के सम्बन्ध में ‘नवीन राज्य नीति, 2026’ निर्गत किए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में वाहनों की तकनीकी स्वस्थता सुनिश्चित किए जाने के प्रयोजनार्थ निजी क्षेत्र में स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ए0टी0एस0) की मान्यता, विनियमन व नियंत्रण के सम्बन्ध में ‘नवीन राज्य नीति, 2026’ निर्गत किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। प्रस्तावित व्यवस्था में किसी परिवर्तन हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचनाओं (23 सितम्बर 2021, 31 अक्टूबर 2022, 14 मार्च 2024 एवं 08 मई 2024) द्वारा केन्द्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 में अध्याय-11 स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ए0टी0एस0) का विनियमन एवं नियंत्रण जोड़ा गया है।
पूर्व में जारी राज्य नीति दिनांक 02-08-2023 में केन्द्र सरकार के नवीनतम दिशा-निर्देशों एवं परिपत्रों को समेकित करते हुए नई संशोधित राज्य नीति का आलेख प्रस्तावित किया गया है। इस प्रस्ताव से उत्तर प्रदेश सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार नहीं पड़ेगा।
प्रस्तावित राज्य नीति अधिसूचित होने की तिथि से ही तत्काल प्रभावी हो जाएगी। नीति के क्रियान्वयन से प्रदेश के प्रत्येक जनपद में स्वचालित परीक्षण स्टेशनों (ए0टी0एस0) की शीघ्र स्थापना सम्भव होगी, जिससे राज्य में निजी निवेश बढ़ेगा। केन्द्रीय मोटरयान नियमावली, 1989 के अध्याय-11 के नियम-179 (जनशक्ति अपेक्षा) के अनुसार ए0टी0एस0 संचालन हेतु तकनीकी व गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वाहनों का फिटनेस परीक्षण बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित मशीनों के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी ढंग से होगा। सड़कों पर केवल पूर्णतः फिट वाहनों का संचालन सुनिश्चित होने से सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी आएगी। भारत सरकार द्वारा ए0टी0एस0 की स्थापना एवं नियंत्रण हेतु बनाए गए उद्देश्यों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित होगा।
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परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को ‘स्मार्ट स्कूल’ के रूप में विकसित किए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को ‘स्मार्ट स्कूल’ के रूप में विकसित किए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस व्यवस्था में भविष्य में किसी भी संशोधन के लिए मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि भारत सरकार की समग्र शिक्षा योजना के अन्तर्गत परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 06-08) में डिजिटल इनीशिएटिव प्रोग्राम के अन्तर्गत विद्यालयों में उच्च नामांकन के आधार पर चरणबद्ध रूप से स्मार्ट क्लास एवं आई0सी0टी0 लैब स्थापित की जानी हैं। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को ‘स्मार्ट स्कूल’ के रूप में विकसित किए जाने हेतु श्रीट्रान इण्डिया लि0 को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है।
परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की परियोजना के क्रियान्वयन हेतु स्वीकृत 300 करोड़ रुपये के सापेक्ष लगभग 14,429 प्राथमिक विद्यालयों (प्रति विद्यालय दर 2,07,910 रुपये सेण्टेज चार्जेज एवं जी0एस0टी0 सहित) को ‘स्मार्ट स्कूल’ के रूप में विकसित किया जाएगा। स्मार्ट क्लास की स्थापना का यह कार्य नियमानुसार प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से किया जाएगा। प्रस्तावित प्रति विद्यालय दर कम प्राप्त होने की स्थिति में, 300 करोड़ रुपये की कुल स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष, संतृप्त किए जाने वाले प्राथमिक विद्यालयों की संख्या में वृद्धि की जाएगी।
बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में परम्परागत शिक्षण व्यवस्था के साथ स्मार्ट क्लास एवं आई0सी0टी0 लैब की स्थापना से विद्यार्थियों को अद्यतन तकनीकी शिक्षा का लाभ प्राप्त होगा।
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उ0प्र0 राज्य चीनी निगम की छाता शुगर कम्पनी लि0, जनपद मथुरा की लगभग 20 एकड़ भूमि पर ‘कन्सेशन-कम-लीज’ व्यवस्था पर ग्रेन/शीरा (डुअल मोड) आधारित न्यूनतम 120 के0एल0पी0डी0 एथेनॉल उत्पादन संयंत्र की स्थापना के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के अधीन छाता शुगर कम्पनी लि0, जनपद मथुरा की लगभग 20 एकड़ भूमि पर निजी निवेशकर्ता के माध्यम से ‘कन्सेशन-कम-लीज’ व्यवस्था पर ग्रेन/शीरा (डुअल मोड) पर आधारित न्यूनतम 120 के0एल0पी0डी0 एथेनॉल उत्पादन संयंत्र की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
परियोजना के संचालन में किसी भी प्रकार से चीनी निगम का अथवा राजकीय निवेश प्रस्तावित नहीं है। परियोजना की स्थापना/निर्माण/परिवहन आदि में स्थानीय रोजगार का सृजन होगा। एथेनॉल उत्पादन संयंत्र की स्थापना होने पर चीनी निगम को नियमित राजस्व की प्राप्ति होगी, जिससे निगम की वित्तीय स्थिति में सुधार आएगा।
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पूर्वांचल क्षेत्र में ‘वर्ल्डफिश उ0प्र0 फिशरीज प्रोजेक्ट सेण्टर योजना’ के संचालन हेतु एम0ओ0यू0 किए जाने का प्रस्ताव अनुमोदित
ज्ञातव्य है कि प्रदेश के गोरखपुर जनपद में प्रस्तावित वर्ल्डफिश उत्तर प्रदेश मत्स्य परियोजना केन्द्र स्थापित करने का उद्देश्य मछली और बीज उत्पादन को बढ़ाना, क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, मछली पालकों की आजीविका में सुधार करना और अनुसंधान, प्रशिक्षण और बाजार सम्बन्धों के माध्यम से टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियों का समर्थन करना है। वर्ल्डफिश परियोजना केन्द्र की स्थापना के माध्यम से मत्स्य उत्पादकता, स्थिरता, आय और खाद्य सुरक्षा, प्रशिक्षण और विस्तार सेवाओं के माध्यम से किसानों, विस्तार कार्यकर्ताओं, संस्थानों और मत्स्यपालन मूल्य श्रृंखला के हितधारकों की क्षमता को मजबूत किये जाने हेतु एक नवीन राज्य योजना प्रस्तावित है।
उत्तर प्रदेश मत्स्य पालन के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में विकसित हुआ है। इस परियोजना की भूमिका मत्स्य पालन उत्पादन को गति देने के लिए गुणवत्तापूर्ण मछली बीज के उत्पादन में आत्मनिर्भरता है। इससे उत्तर प्रदेश से देश के अन्य राज्यों में जलीय कृषि, व्यापार और मछलियों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना के कार्यान्वयन से क्षेत्र में व्यापार और सामान्य उपभोग के लिए मछलियों की उपलब्धता में वृद्धि होगी। बहु-प्रजाति अन्तर्देशीय मीठे पानी की मछलियों के गुणवत्तायुक्त बीजों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता वर्तमान समय में जलकृषि के विकास के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
प्रदेश के मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के लिए उच्च उपज वाली जेनेटिकली इम्प्रूव्ड मत्स्य प्रजातियों के बीज उत्पादन एवं मत्स्य पालन से सम्बन्धित तकनीक से दक्ष होने में मत्स्य विभाग को सहयोग प्राप्त होगा। इस हेतु फिश जेनेटिक अनुसंधान में विशेषज्ञता रखने वाली संस्था वर्ल्ड फिश के माध्यम से संचालित वर्ल्ड फिश उत्तर प्रदेश योजना भविष्य के लिए एक दीर्घकालिक निवेश साबित होगी। इसके अतिरिक्त प्रदेश की वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था तथा विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के प्रस्तावित लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
वर्ल्डफिश उत्तर प्रदेश मत्स्य योजना शत-प्रतिशत राज्य पोषित परियोजना है। यह योजना प्रारम्भिक रूप से सर्वप्रथम 03 वर्षों हेतु संचालित की जाएगी, जिसमें वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु कुल 600 लाख रुपये का बजट प्राविधानित है।
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उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक द्वारा ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ के अन्तर्गत प्रदेश के लघु व सीमान्त कृषकों को रियायती ब्याज दर पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लि0 को वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक प्रदेश के लघु व सीमान्त कृषकों को दिए जाने वाले दीर्घकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान एवं बैंक की शाखाओं के आधुनिकीकरण एवं ब्राण्डिंग हेतु राज्य सरकार से कुल 384 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
भारत सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य ‘विकसित भारत/2047’ के क्रम में प्रदेश सरकार द्वारा ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ के निर्धारित लक्ष्य के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को त्वरित गति प्रदान करने हेतु सरकार द्वारा विविध योजनाएँ/कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री जी द्वारा 21 दिसम्बर, 2025 को सहकारिता विभाग के ’युवा सहकार सम्मेलन एवं यू0पी0 कोऑपरेटिव एक्सपो-2025’ में ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ की घोषणा की गयी।
‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लि0 को प्रदेश के लघु व सीमान्त कृषकों के लिए (जो प्रदेश के कृषक परिवारों का 92 प्रतिशत हैं), दीर्घकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान हेतु 05 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक) हेतु ब्याज अनुदान एवं शाखाओं के आधुनिकीकरण व ब्राण्डिंग के लिए 02 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2027-28 तक) में कुल 384 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान किया जाना है। इस योजना में वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक में 38 करोड़ रुपये की बजट की व्यवस्था की गयी है।
उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लि0 (पूर्व नाम भूमि विकास बैंक), नाबार्ड द्वारा उच्च ब्याज दर पर दिये गये पुनर्वित्त/ऋण पर मुख्यतः निर्भर रहने के कारण कृषक सदस्यों को निरन्तर पर्याप्त रूप से कृषि निवेश ऋण उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। बैंक को पुनर्वित्त उच्च ब्याज दर पर प्राप्त होने के कारण कृषकों को उच्च ब्याज दर (11.00 से 11.50 प्रतिशत) पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश के लघु एवं सीमान्त कृषकों की भुगतान क्षमता सीमित होने के कारण इस ऋण की अदायगी में भी विभिन्न प्रकार की समस्यायें उत्पन्न होती हैं, जिसका सीधा प्रभाव बैंक के वित्तीय स्वास्थ्य पर पड़ता है।
प्रस्तावित योजना के अन्तर्गत प्रदेश के लघु व सीमान्त कृषकों को 06 लाख रुपये तक का ऋण 6 प्रतिशत रियायती वार्षिक ब्याज दर पर दिया जाना है। इस हेतु राज्य सरकार द्वारा कृषकों को वितरित ऋणों पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान किया जाना अपेक्षित है। प्रस्तावित योजना में देय 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान उन्हीं ऋणी कृषकों को अनुमन्य होगा, जो नियत देय किस्तों का भुगतान नियत देय तिथि तक करेंगे।
प्रदेश के लघु एवं सीमान्त कृषक रियायती ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर कृषि व कृषि आधारित अन्य कार्यों हेतु दीर्घकालीन परिसम्पत्तियों का सृजन कर सकेंगे। इससे दीर्घकालीन उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ कृषकों की आय में भी वृद्धि होगी। लघु एवं सीमान्त कृषकों को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर दीर्घकालीन ऋण प्राप्त होने से बैंक का ग्राहक आधार नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।
‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ के अन्तर्गत रियायती ब्याज दर पर ऋण प्राप्त होने से लघु एवं सीमान्त कृषक ऋण माफी की मानसिकता/प्रवृत्ति से बाहर आकर ग्रामीण क्षेत्र में दीर्घकालीन पूँजी निवेश कर स्वयं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने हेतु प्रेरित होंगे तथा प्रदेश में कृषि आधारित छोटे उद्योगों/व्यावसायिक कार्य-कलापों से स्थानीय रोजगार सृजन होंगे। यह योजना प्रदेश में स्वरोजगार/रोजगार के सृजन सहित विकसित उत्तर प्रदेश@2047 के विजन को साकार करने में सहायक होगी।
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उचित दर विक्रेताओं को 25 रु0 प्रति कुन्तल की दर से अतिरिक्त मार्जिन (लाभांश) राज्य सरकार द्वारा अनुमन्य किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के उचित दर विक्रेताओं को वितरित खाद्यान्न की मात्रा के सापेक्ष 25 रुपये प्रति कुन्तल की दर से अतिरिक्त मार्जिन (लाभांश) राज्य सरकार द्वारा अनुमन्य किए जाने के प्रस्ताव को कतिपय शर्तों/प्रतिबन्धों के अधीन स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के सफल संचालन हेतु यथावश्यक कोई संशोधन / परिवर्धन / परिवर्तन / शिथिलीकरण किए जाने हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 तथा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अन्तर्गत वितरित खाद्यान्न की मात्रा के सापेक्ष अधिसूचना दिनांक 01-07-2026 के क्रम में उ0प्र0 सरकार द्वारा आदेश दिनांक 01-09-2026 द्वारा उचित दर दुकान डीलरों का मार्जिन खाद्यान्न के आधारीय (बेसिक) वितरण हेतु 90 रुपये प्रति कुन्तल से बढ़ाकर मात्र 100 रुपये प्रति कुन्तल किया गया है।
वर्तमान में प्रदेश में उचित दर विक्रेता को खाद्यान्न के वितरणोपरान्त 12,000 रुपये मासिक आय होती है। प्रदेश में सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी द्वारा खाद्यान्न उनकी उचित दर दुकानों तक पहुँचाया जा रहा है। तत्क्रम में विक्रेताओं द्वारा खाद्यान्न के वितरण में प्रति माह 8,100 रुपये व्यय कर दिया जाता है। इस प्रकार विक्रेता को माह में मात्र 3,900 रुपये की बचत होती है, जोकि जीवकोपार्जन के लिए अत्यन्त न्यून है। अतिरिक्त लाभांश स्वीकृत किये जाने से उचित दर विक्रेता अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकेगा। इससे उचित दर विक्रेता आधार प्रमाणीकरण से खाद्यान्न वितरित किये जाने हेतु प्रोत्साहित होगे तथा वास्तविक उपभोक्ता को पारदर्शी तरीके से लाभ प्राप्त होगा।
उचित दर विक्रेताओं के जीवकोपार्जन में आ रही समस्याओं को सहज किये जाने के दृष्टिगत राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि प्रदेश सरकार द्वारा अनुशंसित वृद्धि के राज्यांश (25 रुपये प्रति कुन्तल, अर्थात भारत सरकार द्वारा स्वीकृत 100 रुपये एवं राज्य द्वारा प्रस्तावित 150 रुपये के मध्य के अन्तर का 50 प्रतिशत राज्यांश) का भुगतान तात्कालिक रूप से राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाए।
प्रदेश में खाद्यान्न का वार्षिक औसत वितरण लगभग 90.00 लाख मी0 टन (900 लाख कुन्तल) है। एक वित्तीय वर्ष में योजना के क्रियान्वयन हेतु कुल व्यय भार 225 करोड़ रुपये आगणित है। वर्तमान में अतिरिक्त स्टेट मार्जिन (लाभांश) का भुगतान माह जुलाई, 2026 से किया जाना प्रस्तावित है। इसके सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रभावी अवधि (जुलाई, 2026 से मार्च, 2027 तक, कुल 09 माह) हेतु व्यय भार 168.75 करोड़ रुपये आगणित है।
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अयोध्या में ‘एन0एस0जी0 रीजनल हब’ की स्थापना हेतु 26 हेक्टेयर (लगभग 65 एकड़) बंजर भूमि गृह मंत्रालय, भारत सरकार के पक्ष में निःशुल्क आवंटित/हस्तान्तरित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में जनपद अयोध्या की अति-संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने तथा मिनिमम रिस्पॉन्स टाइम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अत्यन्त महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
मंत्रिपरिषद ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड’ (एन0एस0जी0) के उपयोगार्थ ‘एन0एस0जी0 रीजनल हब’ (क्षेत्रीय केन्द्र) की स्थापना हेतु गृह मंत्रालय, भारत सरकार के पक्ष में जनपद अयोध्या की तहसील मिल्कीपुर स्थित ग्राम पूरे लालखां की 26.000 हेक्टेयर (लगभग 65 एकड़) बंजर भूमि को निःशुल्क आवंटिक/हस्तान्तरित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। भूमि का बाजार मूल्य 16.90 करोड़ रुपये है।
श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर एवं प्राण प्रतिष्ठा के उपरान्त अयोध्या धाम राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ है। यहाँ देश-विदेश से निरन्तर श्रद्धालुओं, उच्च विशिष्ट महानुभावों (वी0वी0आई0पी0) तथा अन्तरराष्ट्रीय पर्यटकों के भारी आवागमन के दृष्टिगत क्षेत्र की सुरक्षा, संवेदनशीलता अत्यधिक बढ़ गई है। किसी भी सम्भाव्य सुरक्षा जोखिम का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने हेतु अयोध्या में एन0एस0जी0 कार्मिकों की स्थायी तैनाती अपरिहार्य है।
हस्तान्तरित भूमि का उपयोग ‘एन0एस0जी0 रीजनल हब’ की स्थापना हेतु ही किया जाएगा। किसी अन्य प्रयोजन हेतु इसका प्रयोग पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगा। आवंटित भूमि का प्रयोग आगामी 03 वर्षों की अवधि के भीतर प्रस्तावित प्रयोजन हेतु न किए जाने या भविष्य में आवश्यकता न रहने पर भूमि स्वतः उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग के निवर्तन पर वापस आ जाएगी। यह हस्तान्तरण एक विशेष एवं अपरिहार्य प्रकरण के रूप में किया गया है तथा इसे भावी प्रकरणों में दृष्टान्त (प्रिसिडेण्ट) के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अयोध्या धाम में स्थापित होने वाला ‘एन0एस0जी0 रीजनल हब’ न केवल श्रीराम मन्दिर परिसर एवं अयोध्या क्षेत्र, बल्कि सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश तथा आसपास के अति-संवेदनशील एवं सामरिक प्रतिष्ठानों की आन्तरिक सुरक्षा व्यवस्था को एक सशक्त कवच प्रदान करेगा।
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10 वर्ष तक की अवधि के किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क एवं रजिस्ट्रीकरण फीस में छूट दिए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-17 व 18 के प्राविधानों के अधीन एक वर्ष की अवधि की अचल सम्पत्ति की किरायेदारी सम्बन्धी विलेख का रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य नहीं, बल्कि ऐच्छिक है। एक वर्ष से अधिक की अवधि की अचल सम्पत्ति की किरायेदारी सम्बन्धी विलेख का रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य है। सामान्य अनुभव के अनुसार जनसामान्य द्वारा अधिकांश लीज विलेख मौखिक होते हैं अथवा यदि लिखित निष्पादित भी होते हैं, तो उनकी रजिस्ट्री नहीं करायी जाती है।
ऐसे विलेखों के उदाहरण विभागीय अधिकारियों को बहुधा जी0एस0टी0 विभाग या विद्युत विभाग आदि की पत्रावलियों के किए जाने वाले परीक्षण में प्राप्त होते हैं और इन पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के प्राविधानों के अधीन स्टाम्प वाद दर्ज कर कमी स्टाम्प शुल्क की वसूली करायी जाती है। यह भी उल्लेखनीय है कि लीज विलेख की रजिस्ट्री कराई जाए या नहीं, इन पर समुचित स्टाम्प शुल्क की अदायगी प्रत्येक दशा में अनिवार्य है। समुचित स्टाम्प शुल्क अदा न होने की दशा में इन विलेखों पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अधीन कार्यवाही की जा सकती है।
उपरोक्त परिस्थिति में उ0प्र0 नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के सफल क्रियान्वयन एवं आम जनता को राहत प्रदान करने के लिए भवन स्वामी एवं किरायेदारों को किरायानामा विलेख लिखत निष्पादित करने व रजिस्ट्री कराने को प्रोत्साहित करने हेतु शासनादेश संख्या-18 / 2025 / 1429 / 94-2-2025-700(62) / 2023 दिनांक 19.11.2025 एवं संख्या-19 / 2025 / 1430 / 94-2-2025-700(62) /2023 दिनांक 19.11.2025 द्वारा 06 माह की अवधि के लिए 10 वर्ष तक की अवधि के 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ख के अनुच्छेद-35 के अधीन प्रभार्य स्टाम्प शुल्क तथा रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के अन्तर्गत प्रभार्य रजिस्ट्रीकरण फीस में छूट प्रदान की गयी थी।
पूर्व में दी गयी छूट में 10 वर्ष तक के ऐसे विलेख जो 10 लाख रुपये औसत वार्षिक किराये से अधिक धनराशि के थे, उन्हें इस छूट का कोई लाभ नहीं था। अतः इस छूट को और तार्किक बनाए जाने के दृष्टिकोण से छूट को विस्तृत करते हुए 10 लाख रुपये के औसत वार्षिक किराये से अधिक के पंजीकृत विलेखों पर 10 लाख रुपये औसत वार्षिक किराये तक दी गयी छूट के अनुसार स्टाम्प एवं निबन्धन शुल्क लिया जाएगा तथा शेष धनराशि पर सम्बन्धित अनुच्छेद-35 के सम्बन्धित उप-खण्ड में दी गयी दर के अनुसार स्टाम्प शुल्क व सामान्य रजिस्ट्रीकरण फीस आगणित की जायेगी।
10 वर्ष तक की अवधि के विलेखों पर दी गयी छूट को विस्तृत करते हुए, 10 लाख रुपये के औसत वार्षिक किराये से अधिक के विलेखों पर भी 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये की सीमा तक छूट अनुमन्य किए जाने पर दिनांक 19 नवम्बर, 2025 से दिनांक 19 मई, 2026 तक के पंजीकृत विलेखों के आँकड़ों के अनुसार 8.31 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राजस्व हानि होगी। इस क्षति को नियंत्रित रखने के लिए पूर्व में दी गयी छूट को कुछ कम करते हुए नवीन संशोधित दरों पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क एवं प्रभार्य निबन्धन शुल्क प्रस्तावित किया जा रहा है। साथ ही, छूट से टोल सम्बन्धी पट्टे एवं खनन के पट्टे को मुक्त रखा गया है।
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भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अन्तर्गत पॉलीक्लीनिक के निर्माण हेतु स्थानीय सैन्य प्राधिकरण, भारत सरकार को निःशुल्क भूमि हस्तान्तरित किए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन हेतु प्रदेश में यथावश्यकता जिलाधिकारियों द्वारा विभिन्न जनपदों में चिन्हित भूमि को, राजस्व विभाग द्वारा निर्गत शासनादेश संख्या-32/744/एक-1-2016-20(5)/
ज्ञातव्य है कि भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ई0सी0एच0एस0) रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग की एक प्रमुख योजना है, जिसे 01 अप्रैल, 2003 को शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य देश में ई0सी0एच0एस0 पॉलीक्लीनिक्स तथा सशस्त्र सेना चिकित्सा सुविधाओं, सरकारी/निजी अस्पतालों (पैनलबद्ध) के नेटवर्क के माध्यम से भूतपूर्व सैनिक पेंशन भोगियों और उनके आश्रितों को निःशुल्क बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करना है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 18 लाख भूतपूर्व सैनिक हैं, जिन्हें इन पॉलीक्लीनिक्स के माध्यम से बेहतर चिकित्सीय लाभ शीघ्र प्राप्त होने की सुविधा में वृद्धि होगी। इस योजना में लाभार्थियों को कैशलेस उपचार प्रदान करने का प्रयास किया जाता है। इस योजना को भारत सरकार रक्षा सेवा राजस्व के माध्यम से वित्तपोषित करती है।
प्रदेश के जनपद इटावा, जालौन, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, बाँदा, गाजीपुर, मिर्जापुर, देवरिया, सुल्तानपुर, आजमगढ़ एवं जनपद गोण्डा में पॉलीक्लीनिक्स की स्थापना/निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता बतायी गयी है।
इसके दृष्टिगत भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अन्तर्गत पॉलीक्लीनिक के निर्माण हेतु ग्राम पंचायत/स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एल0एम0ए0) सेण्ट्रल कमाण्ड, भारत सरकार को निःशुल्क हस्तान्तरण किया जाना प्रस्तावित है।
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उ0प्र0 जेल वॉर्डर की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश जेल वॉर्डर की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को (04 साल की सेवा के पश्चात) भूतपूर्व सैनिकों की भांति, अग्निवीर के रूप में की गई सेवा अवधि को घटाते हुए, अधिकतम आयु सीमा में 03 वर्ष की छूट प्रदान करते हुए 20 प्रतिशत पदों को क्षैतिज प्रकृति का आरक्षण (अर्थात अग्निवीर जिस श्रेणी का होगा, उसे उसी श्रेणी के प्रति समायोजित किया जाए) प्रदान किए जाने एवं तद्नुसार कार्यकारी आदेश/शासनादेश निर्गत किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। प्रकरण में अन्य किसी परिवर्तन, परिवर्धन अथवा संशोधन किए जाने हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
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पूर्व अग्निवीरों को समायोजित करने के लिए प्रवर्तन सिपाही (परिवहन) की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत पदों पर क्षैतिज आरक्षण एवं आयु सीमा में छूट के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने वर्ष 2026 और बाद के वर्षों में सेवा से बाहर आने वाले पूर्व-अग्निवीरों को (04 साल की सेवा के पश्चात) प्रवर्तन सिपाही (परिवहन) की सीधी भर्ती में, भूतपूर्व सैनिक की तरह अग्निवीर के रूप में की गई सेवा अवधि को घटाते हुए, अधिकतम आयु सीमा में 03 वर्ष की छूट प्रदान करते हुए 20 प्रतिशत पदों पर क्षैतिज (हॉरिजोण्टल) प्रकृति का आरक्षण (अर्थात अग्निवीर जिस श्रेणी का होगा, उसे उसी श्रेणी के प्रति समायोजित किया जाए) प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इसका विशेष ध्यान रखा जाए कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से आगे न बढ़े। प्रकरण में किसी भी प्रकार का परिवर्तन, परिवर्धन अथवा संशोधन किए जाने हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
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लखनऊ स्थित मे0 ए0पी0आई0एल0 को हाईटेक टाउनशिप नीति के अन्तर्गत दिए गए लाइसेंस के तहत स्वीकृत परियोजना को पूर्ण किए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने मेसर्स अंसल प्रॉपर्टीज एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर लि0 (ए0पी0आई0एल0) द्वारा जनपद लखनऊ में विकसित की जा रही हाईटेक टाउनशिप परियोजना को पूर्ण किए जाने के सम्बन्ध में एन0सी0एल0टी0 के समक्ष लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा अपना पक्ष योजित करते हुए अनुषांगिक कार्यवाही हेतु अधिकृत किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
मेसर्स ए0पी0आई0एल0 को हाईटेक टाउनशिप नीति के अन्तर्गत दिए गए लाइसेंस के तहत स्वीकृत परियोजना को पूर्ण किए जाने में उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों के निराकरण, संशोधन, संवर्धन आदि के सम्बन्ध में निर्णय लिए जाने/मार्गदर्शन प्रदान किए जाने हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा विभागीय मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि लखनऊ स्थित मेसर्स ए0पी0आई0एल0 को हाईटेक टाउनशिप नीति के अन्तर्गत दिये गये लाइसेंस के अन्तर्गत स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा टेकओवर करते हुए परियोजना को पूर्ण करने का प्रस्ताव एन0सी0एल0टी0 के समक्ष प्रस्तुत करना प्रस्तावित है।
इससे लगभग 5,000 होमबायर्स की समस्या का समाधान सम्भव हो सकेगा। हाईटेक टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं तथा उपयोगिताओं का विकास सम्भव होगा। बन्धक भूमि तथा ग्राम समाज की भूमि किसी तृतीय पक्ष को विनियमित किए जाने के स्थान पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के पक्ष में विनियमित की जाएगी। इससे शासकीय भूमि की रक्षा होगी तथा भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियों की प्राप्ति की भी सम्भावना बेहतर होगी। परियोजना पूर्ण होने से सुनियोजित विकास होगा।
परियोजना में पुनः विकास कार्य प्रारम्भ कराए जा सकेंगे। किसी शासकीय अभिकरण के माध्यम से परियोजना को विकसित किए जाने से होमबायर्स के मध्य विश्वास पैदा होगा। रियल एस्टेट क्षेत्र व निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी।
प्रारम्भिक अनुमान के अनुसार सम्भावित अधिकतम लाइबेल्टी लगभग 2,912 करोड़ रुपये है, परन्तु वास्तविक देयता आई0आर0पी0 प्रक्रिया से ही निर्धारित होगी। अंतिमीकृत देनदारियों के भुगतान हेतु आवश्यक धनराशि प्राधिकरण को सीड कैपिटल के रूप में दी जानी है।
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मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत नये शहरों के समग्र एवं समुचित विकास हेतु लखनऊ, उन्नाव तथा रायबरेली विकास प्राधिकरणों को धनराशि स्वीकृति एवं व्यय प्रस्ताव के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत नये शहरों का समग्र एवं समुचित विकास किए जाने हेतु लखनऊ, उन्नाव-शुक्लागंज तथा रायबरेली विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं हेतु सीड कैपिटल के रूप में 655.76 करोड़ रुपये की अधिकतम धनराशि अनुमन्य करते हुए प्रथम किस्त के रूप में कुल 380 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति एवं धनराशि अवमुक्त करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया है।
ज्ञातव्य है कि नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित व सुव्यवस्थित विकास के साथ-साथ नगरीय जनसंख्या को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराये जाने हेतु शासनादेश दिनांक 06 अप्रैल, 2023 द्वारा मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना लागू है। योजना के अन्तर्गत भूमि अर्जन में आने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दिए जाने का प्राविधान है। नये शहरों का समग्र एवं समुचित विकास मद में वित्तीय वर्ष 2026-27 में धनराशि 3500 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है।
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