मैगलगंज (खीरी)। स्थानीय संत निरंकारी सत्संग स्थल (मैगलगंज ब्रांच) में 'मुक्ति पर्व' समागम का आयोजन बेहद श्रद्धा, उल्लास और गरिमामयी वातावरण में किया गया। इस विशेष सत्संग में मितौली से पधारे विचारक महात्मा राम औतार सिंह तोमर जी ने संगत को निहाल किया और मिशन के गौरवशाली इतिहास तथा इसके महान संतों के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।अपने प्रवचनों में महात्मा राम औतार सिंह जी ने बताया कि जगतमाता बुद्धवंती जी का त्याग और समर्पण अतुलनीय है, जो अपने पुत्र को सत्संग की राह पर लेकर आईं और मिशन को एक नई वैचारिक दिशा दी। मुक्ति पर्व के इतिहास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 से 1965 तक इसे 'प्रेरणा दिवस' के रूप में मनाया जाता था। इसके बाद वर्ष 1965 से 1979 तक जगतमाता बुद्धवंती जी की पावन स्मृति में इसे 'प्रेरणा दिवस' के रूप में ही मनाया गया। वर्ष 1980 से इस पावन दिन को औपचारिक रूप से 'मुक्ति पर्व' का नाम दिया गया। वर्तमान में पूरा अगस्त का महीना निरंकारी जगत में उन महान परोपकारी संतों की याद में मुक्ति पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।समागम में मिशन के ऐतिहासिक स्तंभ महात्मा सज्जन सिंह जी के अमूल्य योगदान को भी याद किया गया, जिन्होंने निरंकारी मिशन को 'पांच प्रण' (पांच सिद्धांतों) की अनमोल दात दी, जो आज भी हर श्रद्धालु के जीवन का मुख्य आधार हैं। इससे पूर्व, मैगलगंज ब्रांच में विचारक महात्मा जी के आगमन पर सेवादल के भाई-बहनों और स्थानीय साध-संगत द्वारा पूरे आदर-सत्कार के साथ उनका भावभीना स्वागत किया गया। सत्संग की समाप्ति पर सामूहिक लंगर का भी आयोजन हुआ !
श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया संत निरंकारी मिशन का 'मुक्ति पर्व'
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