उतरौला, बलरामपुर - निजी हॉस्पिटलों में मरीजों का शोषण एक स्तर पर नहीं होता है, बल्कि अनेक तरह की जांच, दवाइ यों के नाम पर भी उनको बुरी तरह से लूटा जाता है। लगभग सभी निजी हॉस्पिटलों  में ब्लड जांच की सुवि धा देने के नाम पर भारी भरकम फीस वसूली जाती है। दवाइयों के नाम पर साठ प्रतिशत तक की कमीशन वाली दवाइयां प्रिन्ट रेट पर मरीजों को दी जा रही है। कभी-कभी तो मरीजों की पैथोलॉजी रिपोर्ट भी डाक्टरों की मर्जी पर तैयार कर दी जाती है ताकि मरीजों से इलाज के नाम पर पर्याप्त वसूली की जा सके। हर निजी हॉस्पिटलों में बड़े-बड़े नामचीन चिकित्सकों की उपलब्धता के दावे किए जा रहे हैं लेकिन भौतिक रूप से सत्यापन के दौरान इनकी मौजूदगी प्रायः शून्य ही मिलती है। नगर के फातिमा हास्पिटल में पिछले दिनों एक बच्चे को गम्भीर अवस्था में निकाले जाने की खबर वायरल होने के बाद जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अधीक्षक डाक्टर सी पी सिंह प्रकाश ने शुक्रवार को जांच की तो कथित बाल रोग चिकित्सक अलावा अन्य कोई चिकित्सक वहां मौजूद नहीं मिला चार अप्रशिक्षित स्थानीय लड़के ही हास्पिटल संचालित करते हुए मिले थे। बीमार बच्चे से सम्बन्धित कोई रिकार्ड मांगे जाने पर भी उन्हे उपलब्ध नहीं कराया गया। एक लाइसेंस पर दो नर्सिंग होम का संचालन कैसे हो रहा है, इस पर भी अधिकारी ने जांच करना मुनासिब नहीं समझा। नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इस गोरखधंधे पर उच्च स्तर पर लगाम लगाने की जरूरत है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अधीक्षक डाक्टर सी पी सिंह का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर महिला चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा, डेंटल हाइजिनिक, नेत्र सहायक व अन्य चिकित्सक उपलब्ध हैं। डिजिटल एक्सरे, ब्लड जांच की सुविधा के साथ प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र पर बाजार मूल्य से काफी सस्ती दवाएं भी उप लब्ध हैं। प्री डिलिवरी से लेकर पोस्ट डिली वरी तक की सुविधा भी यहां उपलब्ध है। मरीजों को ऐसे निजी अस्पतालों पर धन व समय बरबाद करने से बचना चाहिए, क्योंकि निजी अस्पतालों की शिकायतें लगातार वायरल हो रहीं हैं।

               हिन्दी संवाद न्यूज से
              असगर अली की खबर
                उतरौला बलरामपुर। 

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