जलालपुर (अम्बेडकरनगर)। सावन माह की पावन संध्या पर शीतला धाम (श्री शीतला माता मठिया मंदिर) श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से पूर्णत: आप्लावित रहा। समग्र परिसर 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गुंजित हो उठा। भक्तों की अलौकिक आस्था ने मंदिर प्रांगण को स्वर्गीय अनुभूति से भर दिया।
नीरज जलालपुरी एवं उनकी भक्तमंडली ने संध्या आरती का भव्य आयोजन किया, जिसमें सभी उपासक भाव-विभोर होकर झूम उठे। दीपों की अलौकिक रोशनी, घंटों की झंकार एवं शंखनाद ने माहौल को दिव्यता प्रदान की। आरती की ज्वालाओं के साथ पूरा परिसर भक्ति-रस में सराबोर हो गया।
मंदिर में राधा-कृष्ण का अलौकिक शृंगार किया गया, जिसके दिव्य दर्शन ने हर श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान को रेशमी वस्त्र, मोर-मुकुट, वैजयंती माला एवं हीरे-जवाहरातों से सजाया गया। राधा का सोलह श्रृंगार एवं कृष्ण की मुरली ने सबको आकर्षित किया।
आरती के उपरांत महाप्रसाद के रूप में छप्पन भोग (56 व्यंजन) अर्पित किए गए। इसमें माखन-मिश्री, पंचामृत, क्षीर, दधि, घृत, शहद, शक्कर, फल, मेवे, लड्डू, पेढ़ा, बर्फी, हलवा, पूरी, सब्जियाँ, खीर, दही-चावल, पापड़, अचार, चटनी, मिठाइयाँ एवं विविध व्यंजन शामिल थे। सभी भोगों को विधि-विधान से अर्पित कर प्रसादीत किया गया, जिसे उपरांत समस्त भक्तों में वितरित किया गया।
आशीष जैन, दिशांत गुप्ता, शुभम गुप्ता, सोनू जायसवाल, अभिषेक सोनकर, सौरभ सैनी, ऋतिक अग्रवाल, राज विश्वकर्मा, सोनू सोनकर, गोविंद निषाद ने अपनी मधुर वाणी से मंत्रोच्चार एवं भजनों का सुमधुर गुंजन किया। उनके सुरों में ऐसी जादुई ताकत थी कि सैकड़ों उपासक झूमने लगे। 'राधे-राधे' के नारे से पूरा मंदिर गूँज उठा।
भजन-संध्या के पश्चात् राधा-कृष्ण को फूलों की होली खेलाई गई। गुलाब, गेंदा, चमेली एवं अबीर-गुलाल की वर्षा हुई। भक्तों ने एक-दूसरे पर पुष्प बरसाकर उल्लास व्यक्त किया। बच्चों ने कृष्ण-राधा का वेश धारण कर विशेष आकर्षण बढ़ा दिया।
डमरू की थाप, मृदंग की ताल, करताल की झनकार एवं भक्ति-संगीत की मधुर लहरों ने पूरे मंदिर परिसर में उल्लास का संचार कर दिया। महिलाओं ने सामूहिक कीर्तन में भाग लिया एवं भाव-विभोर होकर नृत्य किया। भक्ति गीतों की गूँज दूर-दूर तक सुनाई दी।
अंत में सभी भक्तों ने भोलेनाथ से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। माँ शीतला का चरण-स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती की ज्वालाएँ, डमरू की थाप, भजनों का अलाप और छप्पन भोग की महिमा सबको अविस्मरणीय अनुभव प्रदान कर गई। भक्त मन में अपार शांति लिए अपने-अपने निवास को प्रस्थान किए।
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