न्याय के लिये मुख्यमंत्री आवास पर दस्तक दे सकती है अखण्ड आर्यावर्त महासभा
लव-लैण्ड जिहाद मामले को पारिवारिक विवाद के ट्रैक
पर लाने की कोशिश सफल नहीं होने देंगे-ऋषि त्रिवेदी
लखनऊ। अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभा ने आज यहां आगामी चार अगस्त को विधवा महिलाओं को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग को लेकर होने जा रहे विरोध प्रदर्शन की तैयारी की समीक्षा करते हुये कहा कि लव एण्ड लैण्ड जिहाद मामले को पारिवारिक सम्पत्ति विवाद व कानूनी दांव-पेंच में उलझाने के कुत्सित प्रयासों को सफल नहीं होने दिया जायेगा। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिन्दू परिवार की महिलाओं को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग को लेकर यदि जरूरत पड़ी तो संगठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पीड़िताओं की आवाज पहंुचाने के लिये उनके आवास की चैखट पर दस्तक देने के लिये भी पूरी तरह तैयार है।
श्री त्रिवेदी ने पीड़ित महिलाओं की शिकायत के बावजूद पुलिस प्रशासन पर आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही न करने का आरोप लगाते हुये कहा कि पुलिस प्रशासन पीड़ित महिलाओं के साथ न्याय न कर आरोपियों को न सिर्फ बचा रही है बल्कि लव एण्ड लैण्ड जिहाद मामले को पारिवारिक सम्पत्ति विवाद और कानूनी दांव-पंेच के आवरणों से ढकने का प्रयास कर रही है। श्री त्रिवेदी ने साफ कहा कि मोनिश हसन ने कुचक्र रचकर जिस तरह प्रतिष्ठित कारोबारी हिन्दू पारिवार के दिवंगत मुखिया चन्द्र भूषण त्रिपाठी की बेटी को प्रेमजाल में फंसाकर उससे चोरीछिपे निकाह करने और कुछ ही वर्ष में चन्द्रभूषण त्रिपाठी और उनके दोनों पुत्रों विशाल और मनीष की मौत के बाद चन्द्रभूषण त्रिपाठी की पत्नी और पुत्रों की बहुओं के बीच पारिवारिक सम्पत्ति विवाद को जन्म देकर उनकी सम्पत्ति और कारोबार पर कब्जा जमा लिया।
श्री त्रिवेदी ने कहा कि इस हिन्दू परिवार के सभी पुरूषों की मौत के बाद चन्द्रभूषण त्रिपाठी और बेटे मनीष त्रिपाठी की सम्पत्तियों पर कब्जा जमाने की नीयत से सम्पत्तियों की लिखा-पढ़ी की बारीकी से जांच होने से सारी सच्चाई सामने आ जायेगी। सबसे आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि परिवार में सबसे छोटे पुत्री मनीष की मौत के मात्र 14वें दिन ही उनकी पत्नी निहारिका से सास गीता त्रिपाठी के पक्ष में गिफ्ट डीड लिखवाई गयी, और उसके बाद गीता त्रिपाठी से अपनी पत्नी शिल्पी त्रिपाठी उर्फ अरशी हसन के नाम गिफ्ट करवायी गयी, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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