ग्रामीण पर्यटन और होम-स्टे के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
लखनऊ- 27 जून, 2026
उत्तर प्रदेश सरकार पर्यटन सेक्टर में असीमित संभावनाओं को देखते हुए नये-नये क्षेत्रों पर फोकस कर रही है। बदली परिस्थितियों में पर्यटन के क्षेत्र में मौजूद अवसरों का अधिकतम उपयोग करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कमर कस ली है। पर्यटन को एक कमाऊ एवं रोजगार देने के साथ ही निवेश आकर्षित करने वाला सेक्टर बनाने के लिए नयी पर्यटन नीति- 2022 जारी की गई है। इसमें सेवा क्षेत्र के साथ पर्यटन से जुड़े सेक्टरों को तमाम सहूलियतें प्रदान की गई हैं।
उत्तर प्रदेश में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के कई प्रमुख पर्यटन स्थल विद्यमान है। अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, नैमिषारण्य, विन्ध्यांचल, चित्रकूट, मथुरा-वृंदावन, श्रावस्ती, कुशीनगर, सारनाथ और संकिसा आदि विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं। प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद सुदृढ़ कानून व्यवस्था, बेहतर कनेक्टिविटी एवं विश्व स्तरीय अवस्थापना सुविधाओं के चलते पर्यटकों के आगमन में कई गुना बढ़ोत्तरी हुई है। अकेले काशी और अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा निवेश में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही सेवा सेक्टर की आमदनी भी बढ़ रही है। प्रदेश में वर्ष 2025 में जनवरी से सितम्बर, 2025 तक उ0प्र0 में कुल 1377075696 पर्यटक आए जिसमें 1373414030 भारतीय पर्यटक और 3661666 विदेशी पर्यटक शामिल थे। इस आंकड़े में प्रयागराज महाकुंभ-2025 में आए कुल 66.30 करोड़ पर्यटकों की संख्या भी शामिल है, जिसमें भारतीय पर्यटकों की संख्या 660952000 एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या 2048000 है।
उत्तर प्रदेश विभिन्न धार्मिक, ऐतिहासिक, पौराणिक गन्तव्य स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां ताजमहल, फतेहपुर सीकरी तथा लालकिला जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के साथ ही काशी, मथुरा, अयोध्या, कुशीनगर जैसे पर्यटन सर्किट मौजूद हैं। केन्द्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं पर्यटन संबंधी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटी हुई हैं। राज्य सरकार पर्यटन को उद्योग के रूप में संचालित करने के लिए पर्यटन नीति के तहत होटल एवं प्राचीन किलों को सजाने-संवारने का कार्य शुरू किया है। इसके अलावा ग्रामीण पर्यटन एवं होम स्टे को बढ़ावा दिए जाने की रणनीति बनाई गई है। शहरी जीवन से ऊबे लोग शांति एवं एकान्त की तलाश में आने वाले शैलानियों के लिए होम स्टे काफी पसन्द किया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर प्राप्त होगा। पर्यटक गांव की सड़क से लेकर ग्रामीण जीवन के रहन-सहन, खानपान को करीब से जान सकेंगे।
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गांवों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत सड़क, पानी, बिजली, इण्टरनेट जैसी सुविधाएं देने पर विशेष बल दिया जा रहा है। मौजूदा सरकार तेज रफ्तार वाली सड़कें बनाने के साथ ही निर्वाध विद्युत आपूर्ति कर रही है। ग्रामीण पर्यटन के तहत फिलहाल 18 गांवों का चयन किया गया है। लगभग 100 गांवों को इस योजना में चयन करने की तैयारी है। गांवों में बड़े मकानों को लाज के रूप में बदलवाने का प्रयास किया जायेगा। इसके माध्यम से मकान मालिकों को भी आमदनी का जरिया प्राप्त होगा।
उत्तर प्रदेश में होम-स्टे पर भी राज्य सरकार फोकस कर रही है। पर्यटन को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए सरकार ने होम स्टे मॉडल को तेजी से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पर्यटन विभाग ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में होम स्टे पंजीकरण और संचालन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए निर्देश दिए है जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ सके। इस योजना को पायलट आधार पर आगे पहुंचाया जा रहा है। यहां पुराने मोहल्लो और हेरिटेज क्षेत्रों खासतौर से चौक और आस-पास के क्षेत्रों में पारंपरिक घरों को होम-स्टे के रूप में विकसित करने की तैयारी की है। इससे पर्यटकों को नवाबी संस्कृति का वास्तविक अनुभव मिल सकेगा। पर्यटकों के लिए यह पहल सिर्फ ठेहरने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि स्थानीय खान-पान, कला और संस्कृति को भी शामिल किया गया है।
इस पहल से पर्यटक सीधे स्थानीय जीवनशैली से जुड़ सकेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। होम-स्टे योजना का उद्देश्य पर्यटन को बड़े होटलों से निकाल कर आम लोगों के घर तक पहुंचाना है। इस योजना के क्रियान्वयन से अवसर बढे़गे और प्रदेश की वास्तविक सांस्कृतिक विरासत पर्यटकों तक पहुचंेगी। इस नीति के तहत राज्य के धार्मिक और पर्यटक स्थलों जैसे-अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज के आस-पास बड़े पैमाने पर होम-स्टे विकसित किए जाने की योजना है। होम-स्टे के तहत स्थानीय युवाओं और परिवारों को सीधे फायदा पहुचेगा। लखनऊ जैसे शहरों में यह मॉडल सांस्कृतिक पर्यटन को नया आयाम दे सकता है। होम-स्टे की सफलता से यह संकेत मिल रहा है कि उ0प्र0 में पर्यटन अब बड़े प्रोजेक्टस के साथ-साथ छोटे स्तर पर भी विस्तार पा रहा है, जिससे आम नागरिक भी विकास का हिस्सा बन रहे है।
प्रदेश में बढ़ रही पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बेड एण्ड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) व होम-स्टे नीति-2025 में संशोधन किया है। इसके तहत होम-स्टे और बीएंडबी इकाई अब आठ कमरे तक का पंजीकरण करा सकेंगी। वहीं, पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्व नवीनीकरण ऑटो रिन्यूअल की सुविधा भी दी गई है। अब शहरी क्षेत्रों में चल रही होम स्टे इकाइयों में न्यूनतम एक और अधिकतम आठ कमरें (16 बेड) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। यह भी अनिवार्य किया गया है कि होम स्टे इकाई स्वामित्व अथवा विकास प्राधिकरण से लीज पर मिली भूमि पर बने आवासीय भवन में चलेगी। उसमें मालिक या उसका परिवार भौमिक रूप से निवास करेगा। यह व्यवस्था प्रदेश में पर्यटन व उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में सहयोगी होगी।
पर्यटन के नये क्षेत्रों के अंतर्गत प्राकृतिक खेती की भी बड़ी भूमिका है। राज्य सरकार मोटे अनाज की खेती करने पर जोर दे रही है। इसके तहत किसानों को बीज के अलावा अन्य सुविधाएं मुहैया करायी जा रही है। इण्टरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स-2023 के तहत मोटे आनाजों जैसे-ज्वार, बाजरा, कोदो, काकुन, रागी, जौ, एवं चना आदि की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। मोटे अनाज विभिन्न पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के साथ ही औषधीय गुण से सम्पन्न होते हैं। इनके सेवन से शरीर को कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्राप्त हो जाती है। ग्रामीण पर्यटन से शैलानी इन मोटे अनाजों की खेती एवं उत्पाद को करीब से देख सकेंगे और अपने स्टे के समय खाने का हिस्सा बना सकते है।
प्रदेश में ईको-पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने की भी रणनीति बनायी गई है। ईको-पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ईको- पर्यटन बोर्ड का गठन करते हुए लगभग दो दर्जन से अधिक विभागों को इससे जोड़ा गया है। उत्तर प्रदेश में ईको पर्यटन के लिए परिस्थितियां मौजूद हैं। यहां पर कतरनियां घाट के अलावा वाइल्ड लाइफ सेन्चुरी, फारेस्ट रिजर्व, अभ्यारण्य, पक्षी-विहार तथा वेटलैण्ड भी मौजूद है। वाइल्ड लाइफ से जुड़े क्षेत्रों को पर्यटन के लिहाज से विकसित करते हुए पर्यटकों की पसन्द के हिसाब से सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ईको-टूरिज्म के माध्यम से देशी एवं विदेशी शैलानियों को उत्तर प्रदेश को एक पसन्दीदा गन्तव्य स्थल बनाने की ठोस रणनीति बनायी गई है।
केवल (से0नि0 सूचना अधिकारी)

एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts, please let me know