मुख्यमंत्री ने प्रदेश में मौसम की स्थिति, मानसून की प्रगति,
पेयजल आपूर्ति तथा भूजल संरक्षण सम्बन्धी कार्यों की समीक्षा की
मौसम की अनिश्चितता और मानसून की सम्भावित अनियमितता को देखते हुए प्रत्येक प्रदेशवासी को जल संचयन एवं जल संरक्षण के प्रयासों से जुड़ना होगा : मुख्यमंत्री
पानी की एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जानी चाहिए,
वर्षा जल संचयन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा जाए
प्रधानमंत्री जी के अभियान ‘कैच द रेन’ को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाए
प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न
नहीं होनी चाहिए, कम वर्षा की सम्भावित परिस्थितियों को देखते
हुए सभी विभाग अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित करें
जल संरक्षण के प्रयास केवल विभागीय कार्यक्रमों
तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें जनसहभागिता से जोड़ा जाए
अमृत सरोवरों के संरक्षण, स्वच्छता तथा नियमित रख-रखाव पर विशेष बल
दिया जाए, सरकारी भवनों को जल संरक्षण का आदर्श मॉडल बनाएं
आगामी वर्षों की कार्ययोजना में जल संरक्षण,
हरित ऊर्जा तथा आधुनिक सिंचाई तकनीकों को जोड़ा जाए
लखनऊ : 21 जून, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश में मौसम की स्थिति, मानसून की प्रगति, पेयजल आपूर्ति तथा भूजल संरक्षण सम्बन्धी कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री जी ने जल संरक्षण को जनआन्दोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा है कि मौसम की अनिश्चितता और मानसून की सम्भावित अनियमितता को देखते हुए प्रत्येक प्रदेशवासी को जल संचयन एवं जल संरक्षण के प्रयासों से जुड़ना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पानी की एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर संचालित ‘कैच द रेन’ अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाए। वर्षा जल संचयन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि जलापूर्ति व्यवस्था निर्बाध एवं सुचारु बनी रहे। नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। कम वर्षा की सम्भावित परिस्थितियों को देखते हुए सभी विभाग अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्यमंत्री जी को मौसम विशेषज्ञों ने अवगत कराया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग के दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। पूर्वी एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माह जून से सितम्बर तक सामान्य से कम वर्षा होने के संकेत हैं। माह जून में भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा तथा अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान, सामान्य से अधिक रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने सिंचाई, पंचायतीराज, भूगर्भ जल, नमामि गंगे, राजस्व तथा कृषि विभाग को एक समेकित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास केवल विभागीय कार्यक्रमों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें जनसहभागिता से जोड़ा जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि तालाबों और पोखरों में गांव का गन्दा पानी न जाने पाए। उन्होंने पंचायतीराज विभाग को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे पानी की एक भी बूंद व्यर्थ न जाए। अमृत सरोवरों के संरक्षण, स्वच्छता तथा नियमित रख-रखाव पर विशेष बल दिया जाए। मुख्यमंत्री जी ने वर्षा जल संचयन को मिशन मोड में आगे बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि सरकारी भवनों को जल संरक्षण का आदर्श मॉडल बनाया जाए।
अपर मुख्य सचिव, भूगर्भ जल ने अवगत कराया कि भूजल पुनर्भरण के प्रयासों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वर्ष 2013 में प्रदेश में अतिदोहित विकासखण्डों की संख्या 113 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 44 रह गई है। वर्ष 2017 में अन्य स्रोतों से लगभग 30.59 लाख करोड़ लीटर भूजल पुनर्भरण होता था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 35.79 लाख करोड़ लीटर हो गया है। इसी अवधि में प्रदेश का कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 69.91 लाख करोड़ लीटर से बढ़कर 73.39 लाख करोड़ लीटर तक पहुंच गया है।
यह भी अवगत कराया गया कि सतत विकास लक्ष्य-6 के अन्तर्गत भूजल दोहन की दर को 70 प्रतिशत के स्तर पर लाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश ने प्राप्त कर लिया है। वर्ष 2022 में यह दर 70.66 प्रतिशत, वर्ष 2023 में 70.76 प्रतिशत, वर्ष 2024 में 70.45 प्रतिशत तथा वर्ष 2025 में 70 प्रतिशत रही। पिछले दस वर्षों के दौरान प्रदेश के 361 विकासखण्डों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच 29 जनपदों में औसत भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार परिलक्षित हुआ है। 172 विकासखण्डों में प्रतिवर्ष 10 सेन्टीमीटर से अधिक तथा 69 विकासखण्डों में दस वर्षों के दौरान 20 सेन्टीमीटर से अधिक सुधार दर्ज किया गया है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गयी कि भूगर्भ जल विभाग द्वारा संचालित उत्तर प्रदेश अटल भूजल योजना, इण्डो-इज़राइल बुन्देलखण्ड जल परियोजना, वर्षा जल संचयन थीम पार्क, भूजल सप्ताह, रूफटॉप वर्षाजल संचयन कार्यक्रम तथा भूजल निगरानी नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन ने मुख्यमंत्री जी को नदियों की सिल्ट सफाई कार्यों की प्रगति से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि आगामी वर्षों की कार्ययोजना में जल संरक्षण, हरित ऊर्जा तथा आधुनिक सिंचाई तकनीकों को जोड़ा जाए। उन्होंने मौसम विभाग से मानसून की साप्ताहिक रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराने की अपेक्षा की।
बैठक में कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, नगर विकास मंत्री श्री ए0के0 शर्मा तथा पंचायतीराज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर उपस्थित थे। मंत्रिगणों ने विभागीय प्रयासों एवं प्रगति से मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया।
---------
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts, please let me know