राम मंदिर दान गबन विवाद में आरएसएस की एंट्री, संघ ने तलब की पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट, संदिग्ध कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज 
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उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद में स्थित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे में हुए कथित गबन और वित्तीय अनियमितता का मामला अब थमने के बजाय और अधिक तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर की साख, व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर अब राष्ट्रीय स्तर पर मंथन और बैठकों का दौर शुरू हो गया है। सूत्रों से मिली बेहद बड़ी जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में चल रही प्रशासनिक जांच के बीच अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी सीधे हस्तक्षेप करते हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है। माना जा रहा है कि संघ को सौंपी जाने वाली इस रिपोर्ट के आधार पर राम मंदिर प्रबंधन, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई संवेदनशील और विभिन्न पहलुओं की नए सिरे से व्यापक समीक्षा की जाएगी।

इस कथित घोटाले की आंच अब मंदिर परिसर में तैनात अमले पर भी पहुंचती दिख रही है। आंतरिक जांच के दायरे में आए कुछ संदेहास्पद कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने के बाद, ट्रस्ट उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने (सेवाएं समाप्त करने) अथवा उनके पास मौजूद महत्वपूर्ण व संवेदनशील जिम्मेदारियों को वापस लेने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है। इसके साथ ही, पूरे निगरानी तंत्र को और अधिक जवाबदेह तथा पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मंदिर परिसर में कार्यरत कई अन्य विभागों के कर्मचारियों के दायित्वों और कार्यक्षेत्र में भी बड़ा फेरबदल (तबादला) किया जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी पहले से ही इस मामले की एक गोपनीय आंतरिक जांच करा रहे हैं, जिसके तहत पिछले कई महीनों के सीसीटीवी फुटेज, मुख्य बैंक बही-खातों (लेखा अभिलेखों) और शक के दायरे में आए कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियों की बारिकी से पड़ताल की जा रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक और विधिक कार्रवाई की गाज गिरना तय माना जा रहा है।

इस महाविवाद के बीच, बुधवार को अयोध्या के गलियारों में एक और सनसनीखेज चर्चा जोरों पर रही कि गबन की गई कुल राशि में से करीब डेढ़ करोड़ (₹1.5 करोड़) की नगदी कथित तौर पर बरामद कर ली गई है। इसके साथ ही, पकड़े गए संदिग्धों से पुलिस व खुफिया एजेंसियों की पूछताछ और उनके व्यक्तिगत बैंक खातों की डिटेल्स खंगालने का काम भी तेजी से जारी है। हालांकि, इस गबन के मामले में जब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के स्थानीय शाखा प्रबंधक (मैनेजर) से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ इन्कार कर दिया। सूत्रों का कहना है कि दान पेटियों से निकले पैसों की गिनती और उन्हें सीधे बैंक चेस्ट में जमा करने के काम में लगे कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका की भी अंदरूनी जांच की जा रही है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम और डेढ़ करोड़ की बरामदगी की चर्चाओं पर राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारियों ने अभी तक पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।

दूसरी तरफ, दिल्ली से लेकर अयोध्या तक हलचल तेज है और राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का हालिया अयोध्या दौरा इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। आगामी 13 जून को अयोध्या में निर्माण समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण और पूर्व निर्धारित बैठक होने जा रही है, जिसमें शामिल होने के लिए नृपेंद्र मिश्र पुनः रामनगरी पहुंचेंगे। सूत्रों की मानें तो इस तकनीकी बैठक के एजेंडे में अब इस वित्तीय गबन के आरोपों को भी शामिल कर लिया गया है, जिस पर ट्रस्टियों के साथ गहन मंथन होगा। इसके अलावा, इसी जून महीने के अंत में हर तीसरे महीने होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की मुख्य त्रैमासिक बैठक भी संभावित है, जिसमें देश भर से सभी ट्रस्टियों के जुटने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस बड़ी बैठक में मंदिर की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कुछ बेहद कड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए जा सकते हैं।

इस पूरे वित्तीय विवाद की आग को भड़काने में राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी (पूर्व एकाउंट्स इनचार्ज) महिपाल सिंह के दावों ने घी का काम किया है। इन दिनों सोशल मीडिया पर उनके बयानों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने ट्रस्ट की नींद उड़ा दी है। महिपाल सिंह ने वीडियो में सनसनीखेज दावा किया है कि राम मंदिर की दान राशि और चढ़ावे में चोरी की यह घटना कोई नई नहीं है, बल्कि यह खेल बहुत लंबे समय से सुनियोजित तरीके से खेला जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि दान काउंटर पर आने वाले नोटों की गड्डियों में से चालाकी से नोट निकालकर हेराफेरी की जाती थी। उन्होंने व्यवस्था और ट्रस्ट से जुड़े कुछ बेहद रसूखदार व वरिष्ठ लोगों के नामों का भी खुलकर उल्लेख किया है और आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस चोरी के खिलाफ उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत की थी, तो सच दबाने के लिए उन्हें ही उनके पद से जबरन हटा दिया गया था।

राम लला के दरबार में हुई इस कथित वित्तीय धांधली को लेकर अब अयोध्या के स्थानीय संतों का आक्रोश भी फूट पड़ा है। सरयू तट पर स्थित प्रसिद्ध करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने मीडिया से मुखातिब होते हुए राम मंदिर में चढ़ावे की राशि के गबन से जुड़े पूरे मामले की एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग उठाई है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा, "राम मंदिर जैसे पावन स्थल में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और चोरी की खबरें आना पूरे संत समाज और देश के लिए बेहद निंदनीय और गहरी चिंता का विषय है। स्थानीय समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर जो वीडियो और साक्ष्य तैर रहे हैं, उनमें लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं, जिन्हें प्रशासन कतई नजरअंदाज नहीं कर सकता।" उन्होंने मांग की है कि सरकार को पूरे प्रकरण की दूध का दूध और पानी का पानी जैसी सच्चाई देश के सामने रखनी चाहिए। अगर ये आरोप झूठे या राजनीति से प्रेरित हैं, तो भी ट्रस्ट को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति पूरी तरह साफ करनी चाहिए, ताकि देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों और श्रद्धालुओं के मन में जो गहरा भ्रम व ठेस पहुंची है, उसे समय रहते दूर किया जा सके।


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