रायबरेली, 2 जून 2026
जनपद रायबरेली में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में गंभीर एवं मध्यम एनीमिया के प्रभावी उपचार हेतु फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) थेरेपी का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इस नवाचारात्मक पहल का पायलट कार्यान्वयन सर्वप्रथम जनपद रायबरेली से प्रारंभ किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि प्रभावी क्रियान्वयन, सहायक पर्यवेक्षण एवं सुदृढ़ फॉलो-अप व्यवस्था के परिणामस्वरूप अब तक जनपद में लगभग 180 गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) थेरेपी प्रदान की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि एफसीएम थेरेपी के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। एक माह के फॉलो-अप के दौरान 26 लाभार्थियों के हीमोग्लोबिन स्तर का आकलन किया गया, जिसमें औसतन 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति डेसीलीटर की वृद्धि दर्ज की गई। कई लाभार्थियों में हीमोग्लोबिन स्तर गंभीर एनीमिया की श्रेणी से बढ़कर मध्यम अथवा सामान्य स्तर तक पहुंच गया। फॉलो-अप के दौरान लाभार्थियों के हीमोग्लोबिन स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया तथा अनेक महिलाएं गंभीर एनीमिया की श्रेणी से बाहर आ गईं। यह परिणाम फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) थेरेपी की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं और मातृ स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।
डॉ. चंद्रा ने कहा कि यह पहल एनीमिया मुक्त उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की प्राप्ति तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।
कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि एफसीएम थेरेपी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनपद के सभी एफआरयू (FRU) पर कार्यरत स्टाफ नर्सों एवं चिकित्सा अधिकारियों का प्रशिक्षण 23 फरवरी 2026 से प्रारंभ किया गया था, जिसे डीजी ट्रेनर्स के सहयोग से 16 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया।
इस पहल को सफल बनाने में नोडल अधिकारी आरसीएच डॉ. शरद कुशवाहा, यूपीटीएसयू से डॉ. शिवांगी शुक्ला एवं डॉ. साक्षी वर्मा तथा मैटरनल हेल्थ कंसल्टेंट यासीन अहमद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इनके समन्वय, तकनीकी सहयोग और निरंतर अनुश्रवण से एफसीएम थेरेपी का संचालन सुचारु रूप से हो सका तथा उपचार प्राप्त करने वाली महिलाओं का फॉलो-अप भी प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया गया।
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस. अस्थाना ने कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि एफसीएम थेरेपी को जनपद के सभी एफआरयू (FRU) तक पहुंचाने के लिए वहां कार्यरत स्टाफ नर्सों एवं चिकित्सा अधिकारियों का प्रशिक्षण 23 फरवरी 2026 से प्रारंभ किया गया था, जिसे डीजी ट्रेनर्स के सहयोग से 16 अप्रैल 2026 को पूरा किया गया। इसके बाद 21 मार्च 2026 को एनीमिया दिवस के अवसर पर एफआरयू बछरावां, लालगंज, ऊंचाहार, सलोन, डलमऊ तथा जिला महिला चिकित्सालय में इस सेवा का शुभारंभ किया गया। तब से इन केंद्रों पर नियमित रूप से लाभार्थियों को एफसीएम थेरेपी उपलब्ध कराई जा रही है।
लाभार्थियों की पहचान, परामर्श, उपचार तथा उपचार के बाद निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आशा एवं एएनएम को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। एनीमिया प्रबंधन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एफसीएम थेरेपी के साथ आईवी आयरन सुक्रोज, आयरन-फोलिक एसिड (IFA) अनुपूरण तथा कैल्शियम टैबलेट का वितरण भी किया जा रहा है। नियमित मॉनिटरिंग और फील्ड स्तर पर निगरानी के माध्यम से मातृ एनीमिया प्रबंधन को नई गति मिली है।
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