बलरामपुर- नगर में इन दिनों जनहित के दावों के विपरीत सीवर और पेयजल पाइपलाइन बिछाने का काम आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समय-सीमा की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ठेकेदार की मनमानी और संबंधित अधिकारियों की घोर उदासीनता के कारण शहर की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हालत यह है कि समाधान के नाम पर शुरू की गई इस योजना ने पूरे नगर को समस्याओं के दलदल में धकेल दिया है।
*लापरवाही की हद: नाली के भीतर ही छोड़ दिए सीवर पाइप*
ग्राउंड जीरो पर देखने को मिल रहा है कि कार्य करा रही निर्माण एजेंसी ने तकनीकी मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया है। कई वार्डों और मोहल्लों में सीवर के कनेक्शन इस कदर लापरवाही से किए गए हैं कि निकासी की नालियां पूरी तरह चोक (बंद) हो चुकी हैं। हद तो तब हो गई जब कई जगहों पर सीवर के मुख्य पाइपों को नाली के बीच में ही खुला छोड़ दिया गया है। इससे नालियों का गंदा पानी सड़कों और लोगों के घरों के सामने जमा हो रहा है।
*गुणवत्ता और समय-बद्धता का अकाल*
नियमों के मुताबिक किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य को एक निश्चित समयावधि (Time-limit) के भीतर और तय मानकों (Quality standards) के साथ पूरा करना होता है। लेकिन यहाँ स्थिति इसके ठीक उलट है:
 *घटिया सामग्री का प्रयोग* स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पाइपलाइन डालने और सड़कों की मरम्मत में बेहद घटिया स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है,जिससे आने वाले समय में सड़कों के धंसने का खतरा बढ़ गया है।
*महीनों से अधूरे पड़े काम* सड़कों को खोदकर महीनों तक खुला छोड़ दिया जाता है,जिससे आए दिन राहगीर और वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
*आम जनजीवन अस्त-व्यस्त, बीमारियों का बढ़ा खतरा*
इस बदइंतजामी के कारण स्थानीय नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बंद पड़ी नालियों के कारण पूरे इलाके में बदबू फैली हुई है। मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है,जिससे मलेरिया,डेंगू और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय दुकानदारों का व्यापार भी इस बेतरतीब खुदाई और गंदगी के कारण ठप होने की कगार पर है।
*क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?*
*"सीवर लाइन डालने के नाम पर हमारी गली की अच्छी-भली नाली को तोड़कर उसमें पाइप फंसा दिया गया है। अब गंदा पानी आगे नहीं जा पा रहा है। अधिकारियों से शिकायत करो तो वे ठेकेदार पर बात टाल देते हैं और ठेकेदार सुनता नहीं है।"*
*देवेन्द्र प्रताप सिंह, स्थानीय निवासी*
*अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल*
जनता का सबसे बड़ा आक्रोश इस बात को लेकर है कि सब कुछ आँखों के सामने होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग के आला अधिकारी मौन साधे हुए हैं। निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग (जांच) के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचता, जिससे ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं।
*जनहित में त्वरित कार्रवाई की मांग*
नगर वासियों ने जिला प्रशासन और संबंधित उच्चाधिकारियों से मांग की है कि:
 1. इस पूरे कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
 2. नाली के भीतर छोड़े गए पाइपों को तुरंत हटाकर ड्रेनेज सिस्टम को बहाल किया जाए।
 3. लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार के खिलाफ जुर्माना और ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाए।
यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया,तो स्थानीय संगठनों और नागरिकों ने उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने की चेतावनी दी। 
               हिन्दी संवाद न्यूज से
                 रिपोर्टर वी. संघर्ष
                    बलरामपुर। 

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