उतरौला बलरामपुर-नगर सहित आस पास के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों अवैध रूप से संचालित भार वाहन यानी की (लोडिंग गाड़ियां) लोगों की परेशानियों का सबब बना हुआ हैं। खास बात यह है कि ये वाहन किसी अधिकृत कम्पनी के द्वारा निर्मित नहीं होते, बल्कि कंडम हो चुकी मोटर साइकिलों को काट-छांटकर और उनमें लोडिंग की बॉडी फिट कर बनवाए जाते हैं। इन वाहनों को न तो परिवहन विभाग की मान्यता प्राप्त है,और न ही इनका पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) भी कहीं दर्ज नहीं होता है।शहर की गलियों और बाजारों में धड़ल्ले से दौड़ रहे इन भार वाहनों पर न तो किसी प्रकार का नम्बर प्लेट अंकित है और न ही ड्राइविंग लाइसेंस कीअनिवार्यता का पालन होता है। ऐसे में यदि इन वाहनों से कोई बड़ा हादसा होता है, तो पीड़ित को न्याय दिलाना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि वाहन मालिक,चालक और वाहन की पहचान कर पाना ही चुनौती का सबब बन जाता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन वाहनों पर किसी भी प्रकार का बीमा भी उपलब्ध नहीं होता है। यही कारण है कि किसी दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितपरिवार को मुआवजा मिलने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।
समाज सेवियों और व्यापारियों का कहना है कि नगर और ग्रामीण अंचलों में इन वाहनों का बे धड़क संचालन यह साबित करता है, कि प्रशासन की ओर से इस पर कोई ठोस कार्य वाही नहीं हो रही। इस पर लोग सवाल उठा रहे हैं, कि आखिर इन वाह नों के खिलाफ पुलिस और परिवहन विभाग कब कदम उठाएगा।
नगर के व्यस्त बाजार क्षेत्रों में यह भार वाहन अक्सर जाम की स्थिति भी पैदा कर देते हैं। पैद ल चलने वाले राहगीरों और स्कूली बच्चों को इनके कारण रोज़ाना जोखिम उठाना पड़ता है। समाज सेवी सद्दाम हुसैन खान का कहना हैं, कि इन गाड़ियों की वजह से गलियों में हर समय खतरा ही खतरा बना रहता है। कई बार बच्चे और बुजुर्ग बाल- बाल बच चुके हैं। प्रशा सन को तुरन्त इस कार्य वाही करनी चाहिए। पूर्व प्रधान छब्बू शाह का कहना है,कि अगर ये गाड़ियां एक्सीडेंट करती हैं तो पीड़ित को न तो इंसाफ मिलेगा, और न ही मुआवजा। ये खुले आम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।” असलम अली बता ते हैं“हम रोज देखते हैं कि बिना नम्बर और बिना पंजीकरण के ही ये गाड़ियां यहां दौड़ती हुई नजर आ रही हैं। महिलाएं और बच्चे इन से सबसे ज्यादा असुर क्षित हैं। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि बेरोज गारी और कमाई की मजबूरी ने लोगों को ऐसे वाहनों को चलाने पर मजबूर किया है। क्योंकि ये वाहन कम लागत में तैयार हो जाते हैं, और आसानी से बाजार में लोडिंग के काम में भी आते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या रोज़गार का यह साधन लोगों की जान से खेलने की कीमत पर ही जारी रहना चाहिए।परिवहन नियमों के अनुसार कोई भी वाहन बिना पंजी करण और बीमा केसार्व जनिक सड़कों पर नहीं चल सकता। लेकिन नगर क्षेत्र में इन वाहनों का धड़ल्ले से चलना साफ दर्शाता है, कि या तो नियमों की अनदेखी हो रही है, या फिर कार्य वाही केवल कागजों पर सीमित है। लोगों का कहना यह भी है कि अगर ऐसे वाहन किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बनते हैं, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा वाहन मालिक, चालक, या फिर प्रशासन,जिसने इन पर आंखें मूंद रखी हैं। यही आज का सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है। कुल मिलाकर नगर और ग्रामीण अंचलों में भी इन अवैध भार वाहनों के कारण से हर दिन जोखिम बना हुआ हैं। लोगों की सुरक्षा सुनि श्चित करने और सड़क पर अनुशासन कायम रखने के लिए प्रशासन और परिवहन विभाग को सख्त कदम उठाने होंगे। अन्यथा किसी बड़े हादसे की जिम्मे दारी से वे खुद को नहीं बचा पाएंगे।
हिन्दी संवाद न्यूज से
असगर अली की खबर
उतरौला बलरामपुर।
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