लखनऊ : 09 फरवरी, 2026 :ः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज जनपद सीतापुर स्थित तपोधाम में सतगुरु श्री गिरधारी नाथ जी महाराज के मूर्ति स्थापना दिवस एवं भव्य भण्डारा समारोह में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि योगी तेजनाथ जी महाराज बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने अपनी गुरु परम्परा का स्मरण करते हुए अपने दादा गुरु द्वारा स्थापित आश्रम के पुनरुद्धार तथा आजादी के समय पाकिस्तान छोड़कर देश में अपनी साधना को पुख्ता करने के लिए सीतापुर जनपद आने वाले योगीराज गिरधारी नाथ जी महाराज की साधना गुफा को भव्य रूप दिया। आज इसके लोकार्पण कार्यक्रम के साथ जुड़ने का उन्होंने अवसर प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि योगीराज गिरधारी जी महाराज पाकिस्तान में स्थित हिंगलाज देवी के पावनधाम से कुरुक्षेत्र होते हुए सीतापुर जनपद आए। यहीं उन्होंने अपनी साधना के लिए गुफा बनायी थी। उन्होंने वर्षां तक यहाँ साधना की, इसके उपरान्त उनके शिष्य और योगी तेजनाथ जी महाराज के गुरु योगीराज चरणनाथ जी महाराज ने इस आश्रम को आगे बढ़ाया। स्वतंत्र भारत में गुरु शिष्य की परम्परा अपनी विरासत को अच्छुण्ण बनाये रखने में लगी हुई है, जो एक अभिनन्दनीय प्रयास है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हिंगलाज देवी और गोरखधूना हमारे वृहत्तर भारत के पश्चिमी हिस्से का प्रमुख शक्तिपीठ था। जिस प्रकार पूर्वी भारत में असम की कामाख्या शक्ति पीठ का महत्व है, उसी प्रकार पश्चिमी भारत में हिंगलाज देवी के धाम का महत्व था। आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां जाते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से वह स्थान पाकिस्तान में चले जाने के कारण शेष भारत के भक्तजनों को वहां जाने का सौभाग्य नहीं मिल पाता है। यहां से बहुत कम संख्या में लोग जा पाते हैं। हिंगलाज शक्ति पीठ सहित सभी शक्ति पीठों के प्रतिष्ठापक नाथ सम्प्रदाय के परमाचार्य महायोगी गुरु गोरखनाथ जी महाराज थे। हिंगलाज पीठ में उनका धूना भी स्थित है। योगीराज गिरधारीनाथ जी महाराज व योगीराज चरणनाथ जी महाराज उसी परम्परा से जुड़े थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि योगीनाथ गिरधारीनाथ जी महाराज की साधना स्थली सीतापुर सनातन धर्म का एक पौराणिक स्थल है। यह भारत के वैदिक ज्ञान को संग्रहीत करने, उसे एक स्वरूप देते हुए लिपिबद्ध करने वाला स्थल है। सरकार ने उसी स्मृति को बनाए रखने के लिए भारत के पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य को पुनर्स्थापित करने के कार्य को आगे बढ़ाया है। नैमिषारण्य में आज से 3,500 वर्ष पूर्व 88,000 ऋषियों ने 03 वर्ष से अधिक समय तक अनवरत एक जगह एकत्र होकर भारत के सभी पुराणों को लिपिबद्ध करने का कार्य किया था। इससे पूर्व, श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना हो चुकी थी। उसके उपरान्त अन्य पुराणों की रचना की पवित्र स्थली नैमिषारण्य है, जहाँ आज भी श्रद्धालुजन बड़ी श्रद्धा के साथ जाते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि योगीराज चरणनाथ जी महाराज अपने गुरु के आदेश से जनपद सीतापुर आए। उन्हें एक ऐसा स्थान चाहिए था, जो निर्जन हो तथा कोई उन्हें पहचानता न हो। ईश्वर की कृपा तथा गुरु प्रेरणा से भटकते-भटकते उन्हें सीतापुर में यह स्थान मिला। उन्होंने यहीं पर गुफा बनाकर अपनी साधना को आगे बढ़ाया। दुनिया के अन्दर तमाम सभ्यताएँ एवं संस्कृतियाँ समय के साथ बनीं और समाप्त हो गईं, लेकिन दुनिया के अन्दर तमाम झंझावातों का सामना करते हुए सनातन सभ्यता एवं संस्कृति गरिमा और गौरव के साथ आज भी खड़ी है और दुनिया को मैत्री, करुणा के साथ-साथ वसुधैव कुटुम्बकम् का सन्देश दे रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सनातन संस्कृति को तोड़ने के अनेक प्रयास हुए। इसने दुनिया के तमाम जाति, मजहब व पंथ को उनकी विपत्ति के समय शरण देकर पुष्पित और पल्लवित होने का अवसर दिया। बदले में शक, हूण, कुषाण, मुगल और अंग्रेज जैसे विदेशी आक्रान्ताओं ने यहाँ आकर धर्म एवं संस्कृति को नष्ट करने के साथ ही, देश को लूटने का कार्य किया। यहाँ उन्होंने शरण लेकर शरणार्थी धर्म का पालन नहीं किया। उन लोगों ने हाथ ही उंगली पकड़कर बाद में गला दबाने का कार्य किया। इन लोगों ने देश को लूटने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सनातन धर्मावलम्बियों ने कभी भी बल, बुद्धि तथा वैभव का दुरुपयोग नहीं किया। उन्होंने इसका उपयोग मानवता के कल्याण के लिए किया। सनातन धर्मावलम्बी ही घोषणा करता है कि ‘ अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात यह तेरा है, यह मेरा है की बात केवल संकुचित बुद्धि वाले करते हैं, उदार चरित्र वाले लोगों के लिए पूरी दुनिया एक परिवार या कुटुम्ब है। वसुधैव कुटुम्बकम् का यह भाव सनातन धर्मावलम्बी का संकल्प ही नहीं, बल्कि उनके जीवन का व्रत है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सनातन धर्मावलम्बियों ने मनुष्य ही नहीं, बल्कि चराचर जगत के कल्याण की बात की है। हमारे यहाँ माना जाता है कि पहला ग्रास गोमाता का तथा अन्तिम ग्रास कुत्ते का होता है। गाय और कुत्ते को हमने अपना हिस्सा दिया है। सनातन की इसी समदृष्टि को भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है ‘ समत्वं योग उच्यते’। चींटी को भी आटा व चीनी डालकर लोग संतुष्ट करते हैं। कितना भी जहरीला साँप हो, लोग नागपंचमी को उसे भी दूध और बताशा चढ़ाते हैं। यह भारत देश में ही सम्भव है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि चन्द्रगुप्त मौर्य और चाणक्य का शासन देश का स्वर्ण युग कहा जाता था। जिस देश में चाणक्य जैसा सलाहकार हो, वह देश कभी विफल नहीं हो सकता। उनकी सूझबूझ और अर्थतंत्र के प्रति प्रत्येक भारतीय को कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए। चाणक्य जैसा गुरु, जो देश को सन्मार्ग पर लेकर जाए और समाज को एक नयी दृष्टि प्रदान करे, तो देश आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि की ऊँचाइयों को प्राप्त करता है। कहते हैं कि उस समय दुनिया के अर्थतंत्र में भारत के पास 45 से 46 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब हमले और टूट-फूट शुरू हुई तथा हम आपस में मत, मजहब, सम्प्रदाय, जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर बँट गए, तो हमले और लूटपाट बढ़ती गई। यह सिलसिला लगातार चलता रहा। आज से 400 वर्ष पूर्व तक भारत की दुनिया की अर्थव्यवस्था में पहले स्थान तथा चीन दूसरे स्थान पर था। चीन तेजी के साथ आगे बढ़ रहा था। उस समय भारत को ऐसा नेतृत्व नहीं मिल पाया, जो इसकी समृद्धि को और अधिक तीव्र कर सके। जो देश अपने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से विरत हो जाता है तथा अपने महापुरुषों पर गौरव की अनुभूति नहीं करता, उसका वर्तमान भी सुरक्षित नहीं होता। यही सबकुछ हमारे साथ भी घटित हुआ है। भारत को आगे बढ़ाने की दिशा में जो प्रयास होने चाहिए थे, वह नहीं हुए। परिणामस्वरूप भारत धीरे-धीरे कमजोर होता गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत को मुगलों ने पहले ही लूटा था, इसके बाद अंग्रेजों ने भारत की आश्रम पद्धति पर प्रहार किया। उन्होंने यहाँ के उत्पादक किसानों को कर्जदार बना दिया। यहाँ का हस्तशिल्पी व कारीगर बेरोजगार हो गया। देश दिग्भ्रम की स्थिति में आ गया। देश ऐसे चौराहे पर खड़ा था, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति किंकर्तव्यविमूढ़ स्थिति में था। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 1947 में देश के आजाद होने के समय दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी मात्र 2 प्रतिशत रह गई। तेजी से घटते-घटते भारत की हिस्सेदारी 2000 वर्षों में 2 फीसदी पर आ गई।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विगत 11 वर्षों में भारत को विकास की ऊँचाइयों पर पहुँचाने का कार्य हुआ है। देश की सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ-साथ आर्थिक विकास के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। विगत 11 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सभी ने बदलते हुए भारत को देखा है। भारत फिर से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रही है। इसके उपरान्त केवल अमेरिका व चीन ही आगे रह जाएंगे। बाकी सभी देश अर्थव्यवस्था में भारत से पीछे होंगे। भारत ने अपने मूल्यों और आदर्शों को पहचाना है, जिसके कारण यह तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। भारत ने अपनी विरासत को पुनर्स्थापित करने के अभियान को अपने कन्धों पर लिया है। स्वतंत्र भारत में पहली बार विरासत से जुड़े स्थलों को सम्मान प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि योगीराज गिरधारीनाथ जी महाराज की बिना कुछ खाये-पीये महीनों लम्बी साधना एक प्रकार का योग था। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी। भारत में कुम्भ की परम्परा हजारों वर्ष पुरानी है। इसी प्रकार नैमिषारण्य की परम्परा भी है। कुछ वर्षों के अन्तराल पर ऋषि-मुनि उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम में ज्ञान में क्षेत्र में होने वाले नवाचारों, शोध एवं मूल्यों पर चर्चा करने के लिए यहाँ एकत्रित होते थे। कुम्भ की हजारों वर्ष पुरानी परम्परा को वैश्विक मान्यता मिली, जब प्रधानमंत्री जी ने यूनेस्को के माध्यम से कुम्भ को ‘विश्व की अमूर्त धरोहर’ के रूप में मान्यता दिलायी। यह अपनी विरासत के प्रति गौरव की अनुभूति करने वाले क्षण हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोई व्यक्ति देश और दुनिया के किसी भी कोने में रहता हो तथा जिसके पूर्वज भारत से सम्बन्ध रखते हों, वह भले ही अयोध्या या भारत न आ सका हो, लेकिन 22 जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री जी द्वारा अयोध्या में भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के समय प्रत्येक भारतीय की आँखें श्रद्धा एवं गौरव के अश्रुओं से नम हो गई थीं। सभी अन्तःकरण से प्रफुल्लित थे। प्रत्येक घर में दीप जल रहे थे। इसका आनन्द प्रत्येक भारतवासी मना रहा था, क्योंकि उसने भगवान श्रीराम को 500 वर्षों के बाद आराध्य के रूप में पाया था। प्रत्येक भारतीय ने प्रभु श्रीराम के साथ आत्मीयता का रिश्ता जोड़ा है। यह राजनीति की दीवारों से हटकर, मत एवं सम्प्रदाय की दीवारों को फांदकर, उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक भारत को जोड़ने वाली अवतारी पुरुषों की आत्मगाथा को जोड़ने वाला क्षण था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रत्येक भारतीय सोते-जागते, उठते-बैठते, सुख एवं दुःख में भगवान श्रीराम का नाम लेता है। किसी भी पंथ, मत या सम्प्रदाय के व्यक्ति में मन में कोई दुविधा नहीं होती, क्योंकि जो भारत के गौरव का क्षण होगा, वह हर पंथ एवं सम्प्रदाय के गौरव का भी क्षण होगा। उसने अपने आपको इससे अलग नहीं किया है, क्योंकि प्रत्येक देशवासी मानता है कि हमारी उपासना पद्धति या दर्शन अलग हो सकते हैं, लेकिन वह सनातन धर्मावलम्बी है तथा उसके लिए राष्ट्र प्रथम है। अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा इसी गौरव की पुनर्स्थापना का क्षण है। यही कार्य काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम के रूप में हुआ। पहले श्री काशी विश्वनाथ धाम में 10 श्रद्धालु एक साथ दर्शन नहीं कर पाते थे, आज वहाँ हजारों श्रद्धालु जाकर दर्शन कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि माँ विन्ध्यवासिनी धाम को भव्य रूप दिया जा चुका है। मथुरा एवं नैमिषारण्य में कार्य चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन कमजोर होगा, तो देश कमजोर होगा। अगर देश कमजोर होगा, तो सनातन के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा होगा। जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बाँटने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। सभी बांग्लादेश के मुद्दे पर मौन हैं। बांग्लादेश में हिन्दुओं के मारे जाने के समाचार लगातार आ रहे हैं। मरने वाले दलित हिन्दू हैं। कुछ हिन्दू संगठनों और धर्माचार्यों को छोड़कर सभी का मुँह बन्द हो गया है, क्योंकि मरने वाला हिन्दू है। किसी के बहकावे में आकर बँटने की आवश्यकता नहीं है। देश का दुश्मन आँखें गड़ाए बैठा है। इसलिए अगर बँट गए, तो कटने के भी रास्ते खुल जाएंगे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने एक लम्बी यात्रा तय कर ली है। आगे की लम्बी यात्रा के लिए देश स्वयं को तैयार कर रहा है। दुनिया की कोई भी ताकत भारत को एक बड़ी ताकत बनने से रोक नहीं सकती। हम भारतीयों का भी दायित्व बनता है कि हम भी इस यात्रा में सहभागी बनें तथा मिलकर कार्य करें। यदि हम ऐसा कर पाएंगे, तो यह वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ी के लिए भी बेहतर होगा। भविष्य उसी का होता है, जो वर्तमान में सजग रहता है। जिसने भूतकाल की गलतियों का परिमार्जन किया है, उसी का भविष्य उज्ज्वल होता है। भूतकाल में हम बंटे थे, इसलिए गुलाम व अपमानित हुए थे। अब हमें बंटना नहीं है, बल्कि एकजुट होकर भारत को परम वैभव की ओर ले जाने वाले प्रवर्तमान अभियान का हिस्सा बनना है। योगीराज गिरधारीनाथ जी महाराज की गाथा योग साधना के साथ-साथ उनकी व्यक्तिगत त्रासदी की भी गाथा है। उन्हें अपने गुरु स्थान को छोड़कर आना पड़ा। आज सीतापुर जनपद विकास की बुलन्दियों को छू रहा है। विरासत और विकास की इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
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