उतरौला बलरामपुर-नगर में निजी वाहनों के द्वारा बिना परमिट के ही सवारियां ढोने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। चौक- चौराहों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर निजी कारों को खुलेआम टैक्सी की तरह चलते देखा जा रहा है। मनमाने तरीके से किराया वसूलने वाले ये वाहन यात्रियों से अधिक पैसे वसूल रहे हैं और परिवहन विभाग को भी भारी राजस्व का नुकसान पहुँचा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनु सार, कई निजी वाहन चालक रोजाना सुबह से शाम तक नगर के विभि न्न स्थानों जैसे धुसवां स्टैण्ड, बस स्टैण्ड, पुरानी बाज़ार, मोहल्ला रफी नगर के श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहे व भीमराव अम्बेडकर चौराहा व अन्य चौराहों से सवारियां उठाकर आस पास के गांवों एवं कस्बों तक ले जाते हैं। ये वाहन न तो टैक्सी परमिट लेते हैं और न ही कमर्शियल टैक्स जमा करते हैं। परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार व्यावसायिक वाहनों से हर तीन माह में टैक्स लिया जाता है। निजी वाहनों पर कोई टैक्स नहीं लगता है, क्योंकि वे व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं होते,फिर भी कई वाहन चालक बिना पंजीकरण बदले, बिना परमिट, बिना टैक्स चुकाए खुलेआम टैक्सी सेवा दे रहे हैं।
इस अवैध संचालन के चलते न सिर्फ सरकारी राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि वैध परमिट धारक टैक्सी व टेम्पो चालक भी आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।नियमों को ताक पर रखकर निजी वाहनों में सवारियां बैठाना यात्रि यों के लिए भी जान जोखिमपूर्ण है।इन वाहनों में न फिटनेस टेस्ट होता है, और न ही बीमा सामान्यत: व्यावसायिक दुर्घटनाओं को कवर करता है, और न ही इनसे सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है।
कई बार भीड़ भाड़ वाले इलाकों में इन वाहनों की तेज रफ्तार से दुर्घट ना को न्योता देती है।
परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक बिना परमिट निजी वाहन को व्यावसायिक रूप से चलाने पर 29, 000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है। इसके बावजूद भी उतरौला में लगभग आधा दर्जन से अधिक निजी वाहन लगातार टैक्सी की तरह दौड़ रहे हैं, और इन पर कार्यवाही का अभाव साफ दिखाई देता है।
स्थानीय परिवहन कर्मियों की लापरवाही को लेकर नागरिकों और वैध वाहन संचालकों में गहरा रोष व्याप्त है।
कई लोगों का कहना है कि नियम तो कड़े हैं, लेकिन पालन ढीला है।
जबकि मुख्य सड़क से लेकर ग्रामीण मार्गों तक ‘अनधिकृत टैक्सी संचा लन’ आम दृश्य बन चुका है, पर कार्यवाही सिर्फ कागज पर ही दिखती है।उतरौला में निजी वाहनों का टैक्सी रूप में संचालन प्रशासन की लापरवाही, परिवहन विभाग की कमजोर निगरानी और वाहन चालकों की मनमानी का परिणाम है। यदि विभाग सख्ती दिखाए तो राजस्व क्यों नहीं बढ़ेगा, और दुर्घटनाओं में कमी आएगी, वैध टैक्सी संचालकों के हित सुरक्षित रहेंगे।फिलहाल नागरिकों को बेहतर व्यवस्था और परिवहन विभाग से प्रभावी कार्य वाही की उम्मीद है।
*वर्जन — एआर टी ओ बलरामपुर।* निजी वाहनों का टैक्सी के रूप में संचालन नहीं होने दिया जा रहा है। हर माह चेकिंग अभि यान चलाया जाता है। जल्द ही फिर से विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों को बन्द कराया जाएगा।

              हिन्दी संवाद न्यूज से
             असगर अली की खबर
               उतरौला बलरामपुर। y

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