रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा बनी सरोजनीनगर श्रद्धालुओं की जीवंत आस्था यात्रा
जनआस्था का 54वां रामरथ मंगलवार को ग्राम शिवरी से अयोध्या धाम के लिए रवाना
सेवा, श्रद्धा और संस्कार का संगम — तीन वर्षों में 8,100 से अधिक श्रद्धालुओं को मिला श्रीराम धाम दर्शन
लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर जनआस्था के केंद्र के रूप में स्थापित हुआ, जब विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में 54वीं निःशुल्क ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ ग्राम शिवरी से श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने समग्र विकास के साथ-साथ जन-जन की आस्था के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सेवा और श्रद्धा की इस परंपरा को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया है।
तारा शक्ति केंद्र संचालिका श्रीमती कुसुमा के अनुरोध पर आयोजित इस यात्रा में ग्राम शिवरी से 100 से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन हेतु रवाना किया गया। श्रद्धालुओं को श्रीराम लला के भव्य मंदिर, श्री हनुमानगढ़ी एवं अन्य प्रमुख मंदिरों के सुगम और व्यवस्थित दर्शन कराए गए।
यात्रा के शुभारंभ अवसर पर टीम राजेश्वर द्वारा सभी श्रद्धालुओं को शाल एवं पटका पहनाकर सम्मानपूर्वक बसों में बैठाया गया। संपूर्ण यात्रा के दौरान भोजन, जलपान, स्वास्थ्य सेवाएं एवं विश्राम की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। कार्यकर्ताओं ने सेवा को ही श्रद्धा का पर्याय मानते हुए पूरी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभूति में परिवर्तित कर दिया। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रसाद, श्रीरामचरितमानस एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
तीन वर्षों से सतत जारी श्रद्धा-सेवा की परंपरा
माननीय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा अपनी पूज्य माताश्री तारा सिंह की प्रेरणा से सितंबर 2022 से प्रारंभ की गई यह ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ आज जनआस्था, विश्वास और निःस्वार्थ सेवा की सशक्त पहचान बन चुकी है। तीन वर्षों से अधिक समय में 54 निःशुल्क यात्राओं के माध्यम से लगभग 8,100 ग्रामीण अंचलों के बुजुर्गों एवं मातृशक्ति को अयोध्या धाम के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
डॉ. राजेश्वर सिंह का स्पष्ट मानना है कि यह पहल उन लोगों तक प्रभु श्रीराम की आस्था पहुँचाने का प्रयास है, जिनके लिए अयोध्या दर्शन अब तक केवल एक सपना था। ‘रामरथ श्रवण यात्रा’ वरिष्ठ नागरिकों और मातृशक्ति के सम्मान का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।
यह पहल सिद्ध करती है कि राजनीति केवल शासन का माध्यम नहीं, बल्कि जनकल्याण और सेवा-साधना का पावन संकल्प भी हो सकती है।


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