उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में ‘उत्तर प्रदेश बीज नीति-2026’ के सम्बन्ध में विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कृषि उत्पादन की वास्तविक शक्ति उच्च गुणवत्तायुक्त, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में निहित है। प्रदेश के लिए नई और आधुनिक ’बीज नीति’ समय की मांग है। भूमि जोत लगातार घट रही है, ऐसे में ध्यान केवल रकबे पर नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि उच्च उपज, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु किस्मों के विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसी बीज नीति तैयार की जाए, जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे।
मुख्यमंत्री जी ने आगामी 05 वर्षों के लिए प्रदेश की बीज उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्धता को नए स्तर तक ले जाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भण्डारण की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग आवश्यक है, ताकि प्रमाणित बीज की कमी न हो और किसान सशक्त बन सकें।
मुख्यमंत्री जी ने भरोसेमंद बीज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बीज की एण्ड-टू-एण्ड ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी या अमानक बीजों के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। किसानों तक पहुँचने वाला बीज पैकेट प्रमाणित, परीक्षणित और पूरी तरह से मानकयुक्त होना चाहिए। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, आई0सी0ए0आर0 संस्थानों, उपकार तथा निजी बीज उद्योग को एक साझा मंच पर लाकर बीज अनुसन्धान, नवाचार और किस्म-रिलीज प्रक्रिया को तेज़ करने की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि फसल विविधीकरण को गति देने के लिए दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता हेतु विशेष रणनीति तैयार की जाए। उन्होंने प्रदेश में आगामी 05 वर्षां में कम से कम 05 ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए। ये सीड पार्क उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भण्डारण की सभी सुविधाओं से सुसज्जित एकीकृत परिसर होंगे।
मुख्यमंत्री जी कहा कि प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों को बीज विकास र्कायक्रम से सीधे जोड़ा जाए, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेत-स्तर पर तकनीक के प्रसार के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित हो सके। प्रदेश के 09 क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप एक-एक कृषि विज्ञान केन्द्र को सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए, जिससे क्षेत्र-विशेष की फसलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकें। मुख्यमंत्री जी ने प्रगतिशील किसानों को भी बीज विकास र्कायक्रमों से जोड़ने पर बल दिया, ताकि स्थानीय अनुभव और आधुनिक तकनीक का प्रभावी समन्वय बन सके।
मुख्यमंत्री जी ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि अधिकाधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जीकरण से जोड़ा जाए, जिससे किसानों का सिंचाई खर्च कम हो और कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े। उन्होंने प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल इकाइयों को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिलने से रोजगार, निवेश और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।
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