अंबेडकरनगर: जिले के तीन व्यस्ततम बाजार क्षेत्रों – जहांगीरगंज, जलालपुर और रामनगर – से यातायात की दशकों पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है। लोक निर्माण विभाग ने इन तीनों स्थानों पर बाईपास निर्माण की कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिस पर कुल 181 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय होने का अनुमान है।
यह पहल एमएलसी डॉ. हरिओम पांडेय के प्रस्ताव पर आगे बढ़ी है, जिसका मुख्य उद्देश्य इन बाजारों में वाहनों के लगातार बढ़ते दबाव और जाम की भीषण समस्या का स्थायी समाधान ढूंढना है। मौजूदा दो-लेन सड़कें इस दबाव को झेलने में असमर्थ हो चुकी हैं और बाजार के अंदर सड़क चौड़ीकरण अव्यावहारिक है।

तीनों बाईपास परियोजनाओं की खास बातें:

1. जहांगीरगंज (नगर पंचायत):
   · लंबाई: 6 किलोमीटर (दो-लेन)
   · अनुमानित लागत: 48 करोड़ रुपये
   · स्थिति: प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति हेतु प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
   · महत्व: यह मार्ग वाराणसी-बस्ती-लुंबिनी हाईवे को संतकबीरनगर से जोड़ता है तथा जिला मुख्यालय जाने वाले ग्रामीणों के लिए एकमात्र रास्ता है। बाईपास बनने से यातायात प्रवाह सुगम होगा।
2. जलालपुर (नगरपालिका):
   · लंबाई: 8.400 किलोमीटर (प्रस्तावित दो-लेन, चार-लेन में परिवर्तन की योजना)
   · वर्तमान अनुमानित लागत: 68.19 करोड़ रुपये (दो-लेन के लिए)
   · संभावित परिवर्तन: वाहनों के अत्यधिक दबाव को देखते हुए विभाग इसे चार-लेन बाईपास में अपग्रेड करने पर विचार कर रहा है। इससे लागत बढ़कर लगभग 150 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
   · महत्व: जलालपुर से दो प्रमुख जिला मार्ग निकलते हैं, जिन पर यातायात अवरोध आम बात है। बाईपास से मालीपुर-रामगढ़ और दोस्तपुर-न्योरी मार्गों पर यातायात तेज व सुरक्षित होगा।
3. रामनगर (नगरपालिका):
   · लंबाई: 8 किलोमीटर (दो-लेन)
   · अनुमानित लागत: 64.12 करोड़ रुपये
   · स्थिति: कार्य योजना तैयार, शीघ्र ही स्वीकृति हेतु भेजी जाएगी।
   · महत्व: रामनगर बाजार वह महत्वपूर्ण कड़ी है जहां मेहदावल-धनघटा मार्ग और रामनगर-न्योरी-बसखारी-जहांगीरगंज मार्ग आपस में मिलते हैं, जिस कारण यहां अक्सर जाम लगा रहता है।

लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता अश्विनी पांडेय के अनुसार, जहांगीरगंज बाईपास की स्वीकृति की उम्मीद है, जबकि अन्य दोनों परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इन बाईपासों के निर्माण से न केवल स्थानीय बाजारों में भीड़ और दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की आवागमन दक्षता में भी ऐतिहासिक सुधार होगा, जो आर्थिक गतिविधियों को गति देगा।

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