हिन्दीसंवाद के लिए असगर अली की रिपोर्ट
उतरौला (बलरामपुर)
जनपद बलरामपुर के उतरौला विधान सभा जिले की सबसे पुरानी तहसील हैं, उतरौला विधानसभा पहले बलरामपुर लोकसभा के अन्तर्गत थी, लेकिन जब अब यह गोंडा लोकसभा का हिस्सा है इस सीट पर पिछले कई दशक से सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक वर्चस्व की जंग चलती आयी है, यहां पर राप्ती नदी की बाढ़ के कारण हर वर्ष भारी तबाही मचती है, इस क्षेत्र में रेलवे से आवागमन की सुविधा उपलब्ध नहीं है,यहां पर तकनीकी शिक्षण संस्थानका आभाव है उतरौला नगर में प्राचीन शाहजानी शाह दरगाह और दुखहरण नाथ मंदिर है जो कि क्षेत्र के लोगों का आस्था का केंद्र भी है, यहां पर बजाज चीनी और उस मे स्थिति पावर प्लांट क्षेत्र को विशिष्ट बनाते हैं, उतरौला विधानसभा सीट 1952 में अस्तित्व में आई, यहां से कांग्रेस के तीन बार विधायक, जनसंघ के तीन बार विधायक जनता पार्टी के एक बार जनता दल के दो बार भारतीय जनता पार्टी के तीन बार और समाजवादी पार्टी को तीन बार जीत हासिल हुई है, वर्ष 1952 से पहले चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी शहीद फकीरी ने जीत हासिल की थी, 1957 में अली जावेद जाफरी, 1962 मे जनसंघ के सूरज लाल गुप्ता, 1967 में कांग्रेस के सफ़ी अहमद खान, 1969 में जनसंघ के सूरज लाल गुप्ता 1974 और 1977 में जनसंघ से राजेन्द्र प्रसाद चौधरी, 1980 के चुनाव में जनता पार्टी के मसरूर जाफरी, 1985 के चुनाव में जनता दल से फज़लूल बारी, 1989 तथा 1991 के चुनाव में निर्दलीय वा जनता दल से सामीउल्ला 1993 में भाजपा के विश्वनाथ गुप्ता, 1996 में सपा के उबैदुर्र रहमान, 2002 में सपा के अनवर महमूद खान 2007 में भाजपा के श्यामलाल वर्मा और 2012 में समाजवादी पार्टी से आरिफ अनवर हाशमी और 2017 के चुनाव में भाजपा के रामप्रताप वर्मा ने जीत दर्ज की, अब 2022 में भाजपा ने रामप्रताप वर्मा पर फिर से भरोसा जताते हुए अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि समाजवादी पार्टी से हसीब खान कांग्रेस से धीरेन्द्र प्रताप सिंह, बहुजन समाज पार्टी से रामप्रताप वर्मा पहलवान, AMIM से डॉ अब्दुल मन्नान पूरे दमख़म से मैदान में ताल ठोक रहे हैं, भाजपा को छोड़कर सभी दलों ने नए प्रत्याशियों पर दांव लगाया है।
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