औरैया // जिले में जैविक पूसा बासमती 1718 धान अब दाना भराव (Dough Stage) की अवस्था पर है बालियां हरी से हल्की पीली पड़ने लगी हैं और झुकना शुरू हो गई हैं सुबह की ओस और खेत के किनारे नमी बताती है कि फसल को अब आखिरी सिंचाई मिल चुकी है यही वो समय है जब दाने में दूध भरता है और खुशबू बनती है 15 से 20 दिन में कटाई के लायक हो जाएगी।
पूसा बासमती 1718 धान किसानों के लिए सोना है पूसा बासमती 1718 धान IARI पूसा दिल्ली द्वारा 2017 में विकसित की गई किस्म है यह हमारी सबसे प्रसिद्ध किस्म पूसा बासमती 1121 का ही सुधरा हुआ रूप है 1121 में बैक्टीरियल ब्लाइट (झुलसा / गर्दन मरोड़) की बड़ी समस्या थी 1718 में उस रोग के लिए जीन डालकर उसे प्रतिरोधी बना दिया गया है यह 135 से 138 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं इसकी औसत पैदावार 18 से 22 क्विंटल प्रति एकड़ है पौधा छोटा और मोटा है आंधी बारिश में 1121 की तरह गिरता नहीं है पकने के दौरान इसमें सुगंध बहुत तेज आती है।
यह किस्म कम पानी ज्यादा दाम देश की टॉप 3 विदेशी मुद्रा कमाने वाली बासमती किस्मों में से एक है इसलिए मंडियों में सबसे ज्यादा मांग इसकी है।
जिले के प्रगतिशील किसान ने बताया यह प्राकृतिक तरीके से की गई खेती है इसलिए कोई रसायन छिड़काव की आवश्यकता नहीं है पानी अब बिल्कुल बंद कर दें नहीं तो दाना काला पड़ जाएगा किनारे पर चूहों से बचाव के लिए निगरानी रखें जब 80% बालियां सुनहरी पीली हो जाएं और दाना नाखून से दबाने पर न टूटे तब कटाई करें।
यह फसल प्रकृति द्वारा किसानों के उस विचार को सच कर रही है जो बिना रसायन बिना ज्यादा पानी के भी खेती संभव है को सच बनाती है 1718 ने साबित किया जहर मुक्त खेती ही असली खेती है।
रिपोर्ट :- जितेन्द्र कुमार हिन्दी संवाद न्यूज उत्तर प्रदेश
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts, please let me know