मुख्यमंत्री विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जन्मशताब्दी वर्ष समारोह में सम्मिलित हुए
श्रद्धेय सिंघल जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र, सनातन धर्म और श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के संकल्प को समर्पित : मुख्यमंत्री
श्रद्धेय सिंघल जी ने अपने जीवन में जो संकल्प लिया, उसे पूरा करने के लिए जीवन के अंतिम क्षण तक निरन्तर कार्य किया, उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत
हमें श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के संकल्पों के साथ जुड़कर संतों का सान्निध्य एवं आशीर्वाद लेकर राष्ट्ररूपी यज्ञ को मजबूती प्रदान करना चाहिए
श्रद्धेय सिंघल जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रसेवा, समाज संगठन, सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और संकल्प के साथ निरन्तर कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा
श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने विभिन्न संतों और धर्माचार्यों को एक मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की, उन्होंने बिखरे हुए हिन्दू समाज को एकजुट करने का अभियान चलाया
वनवासी क्षेत्रों और मलिन बस्तियों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए एकल विद्यालयों की श्रृंखला खड़ी करने में भी अशोक जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही
श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के सान्निध्य में अनेक लोगों को श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर मिला, आज उनके सपनों का साकार स्वरूप अयोध्या में भव्य श्रीराम मन्दिर के रूप में दिखाई दे रहा
आज अयोध्या में 05 लाख से अधिक श्रद्धालु राम जी की पैड़ी में एक साथ स्नान कर सकते
प्रदेश में 7,700 से अधिक गौशालाओं में 16 लाख से अधिक गौवंश संरक्षित, प्रदेश सरकार गौवंश की देखभाल हेतु 1,500 रु0 प्रति गाय प्रतिमाह उपलब्ध करा रही
श्रद्धेय अशोक जी के जन्म शताब्दी महोत्सव के अवसर पर दलित बस्तियों, वनवासी क्षेत्रों, एकल विद्यालयों, सभी मठ-मन्दिरों में विभिन्न आयोजन होने चाहिए
लखनऊ : 27 सितम्बर, 2026 : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जीवन और उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि अशोक जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र, सनातन धर्म और श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के संकल्प को समर्पित था। उन्होंने श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि श्रद्धेय सिंघल जी ने अपने जीवन में जो संकल्प लिया, उसे पूरा करने के लिए जीवन के अंतिम क्षण तक निरन्तर कार्य किया। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्यमंत्री जी आज यहाँ विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जन्मशताब्दी वर्ष समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी को श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जन्मशताब्दी पर समर्पित डाक विभाग द्वारा जारी ‘विशेष आवरण’ भी भेंट किया गया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेण्ट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के संकल्पों के साथ जुड़कर संतों का सान्निध्य एवं आशीर्वाद लेकर राष्ट्ररूपी यज्ञ को मजबूती प्रदान करना चाहिए। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रसेवा, समाज संगठन, सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और संकल्प के साथ निरन्तर कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने अपनी उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर की थी। इसी दौरान उनका सम्पर्क राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुआ। संघ के सम्पर्क में आने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और सनातन धर्म की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। अशोक जी प्रतिष्ठित परिवार से आते थे और उनके सामने जीवन में सुख-सुविधाओं के सभी साधन उपलब्ध थे, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का मार्ग छोड़कर स्वयं को राष्ट्र एवं समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। उस समय न तो यह कल्पना करना आसान था और न ही कोई यह मानने को तैयार था कि कभी भारतीय जनसंघ अथवा भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र या राज्यों में सरकार बनेगी। उस समय एक स्वयंसेवक और प्रचारक के रूप में कार्य करना अपने आप में तपस्या थी। अशोक जी का एकमात्र ध्येय था कि सनातन धर्म को कोई आँच न आए और इसकी सुरक्षा एवं सम्मान के साथ कोई समझौता न हो।
वर्ष 1528 में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के पावन मन्दिर को तोड़कर विदेशी आक्रान्ता द्वारा वहाँ गुलामी का ढाँचा खड़ा किया गया। इसके बाद लगभग 500 वर्षों के लम्बे कालखण्ड में ऐसा कोई समय नहीं रहा, जब हिन्दू समाज और धर्माचार्यों ने श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए संघर्ष न किया हो। संतों, नागाओं, सिख वीरों, युवाओं, महिलाओं, राजाओं और समाज के प्रत्येक वर्ग ने समय-समय पर श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिया। पंचम गुरु से लेकर निहंग सिखों तक ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति के लिए अपना योगदान दिया। नागाओं ने संघर्ष किया, नारियों और युवाओं ने बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अवध क्षेत्र के अनेक गांवों में लोगों ने पीढ़ियों तक संकल्प को जीवित रखा। ऐसे अनेक परिवार और गाँव थे, जहाँ लोगों ने वर्षों तक पैरों में चप्पल नहीं पहनी और सिर पर साफा नहीं बाँधा। उनका संकल्प था कि जब तक श्रीराम जन्मभूमि पर मन्दिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वे इस प्रकार अपना संकल्प बनाए रखेंगे। यह संघर्ष निरन्तर चलता रहा, लेकिन समाज की शक्ति बिखरी हुई थी। सामर्थ्य और शक्ति की कमी नहीं थी, आवश्यकता थी उस शक्ति को एक मंच पर लाने वाले नेतृत्व की। इस कमी को श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने पूरा किया।
वर्ष 1982 में श्रद्धेय अशोक सिंघल जी को विश्व हिन्दू परिषद का दायित्व मिला और वर्ष 1983 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति उनके जीवन का एकमात्र ध्येय बन गई। अशोक जी सोते-जागते, उठते-बैठते, चलते और यात्रा करते हुए भी श्रीराम के कार्य के बारे में चिन्तन करते थे। भारत की यात्रा हो या विदेश की यात्रा, वनवासी क्षेत्र हों या किसी दलित बस्ती का प्रवास, उद्योगपति का घर हो या किसी श्रमिक की झोपड़ी, उनके मुख पर सदैव श्रीराम का नाम और हृदय में श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति का संकल्प रहता था।
अशोक जी के जीवन का मंत्र था ‘राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम।’ श्रीराम का कार्य पूरा होने तक विश्राम नहीं करना है, इसी संकल्प के साथ उन्होंने जीवनभर कार्य किया। बिना रुके, बिना डिगे, बिना झुके और बिना पीछे हटे उन्होंने निरन्तर कार्य किया। ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र को उन्होंने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया था।
श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने विभिन्न संतों और धर्माचार्यों को एक मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने बिखरे हुए हिन्दू समाज को एकजुट करने का अभियान चलाया। श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के साथ-साथ समाज को संगठित करने और विभिन्न रचनात्मक प्रकल्पों के माध्यम से समाज को सुदृढ़ बनाने का कार्य भी निरन्तर किया। वनवासी क्षेत्रों और मलिन बस्तियों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए एकल विद्यालयों की श्रृंखला खड़ी करने में भी अशोक जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वनवासी क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का कार्य उन्होंने सरकार में किसी पद पर रहते हुए नहीं, बल्कि अपने पुरुषार्थ और समर्पण से किया।
श्रीराम वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से वनवासी क्षेत्रों के बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था का विस्तार किया गया। गोरखपुर में जब उन्हें कोई स्थान नहीं मिला, तो गोरखनाथ मन्दिर परिसर में विश्व हिन्दू परिषद को उपलब्ध कराए गए कार्यालय के एक कमरे में ही पूर्वोत्तर के बच्चों को लाकर उनके अध्ययन की व्यवस्था प्रारम्भ की गई। यह इस बात का प्रमाण है कि अशोक सिंघल जी के लिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचना केवल भाषण का विषय नहीं था, बल्कि उनके जीवन का व्यावहारिक हिस्सा था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 1990 में जब उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार के समय अयोध्या में श्रीराम भक्तों पर कार्रवाई हुई और गोलियाँ चलाई गईं, उस कठिन समय में भी श्रद्धेय अशोक सिंघल जी की सिंह गर्जना सुनायी देती थी। उन्होंने निरंकुश सत्ता के सामने झुकने के बजाय श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष जारी रखा। 02 नवम्बर, 1990 को जब श्रीराम नाम की धुन गाते हुए राम भक्तों पर लाठीचार्ज और गोलियों की बौछार हुई, तब भी श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने सामने आकर इस संघर्ष का नेतृत्व किया। उनका जीवन साहस, संकल्प और समर्पण का उदाहरण रहा।
श्रद्धेय अशोक जी जब केसरिया गमछे में युवाओं को देखते थे और युवाओं की हुंकार को सुनते थे तो उन्हें अत्यन्त प्रसन्नता होती थी। युवाओं की ऊर्जा और समाज की सक्रिय भागीदारी उन्हें अंतःकरण से प्रफुल्लित करती थी। यह हम सभी का सौभाग्य है कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के सान्निध्य में अनेक लोगों को श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर मिला। आज उनके सपनों का साकार स्वरूप अयोध्या में भव्य श्रीराम मन्दिर के रूप में दिखाई दे रहा है।
मेरे पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष थे। श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के साथ उनके लगातार संवाद और बैठकें होती थीं। अशोक जी गोरखपुर आते थे अथवा उनके पूज्य गुरुदेव स्वयं कारसेवकपुरम् जाकर उनसे मुलाकात करते थे। इन बैठकों में श्रीराम मन्दिर के निर्माण की रूपरेखा, आन्दोलन की रणनीति और आगे की कार्ययोजना सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती थी। पूज्य संतों के साथ इन विषयों को नजदीक से देखने और समझने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ। अशोक सिंघल जी अयोध्या के जिस स्वरूप की कल्पना करते थे, आज उसी भाव और संकल्प के अनुरूप अयोध्या को त्रेता युगीन अयोध्या के रूप में विकसित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हम श्रद्धेय अशोक सिंघल जी को इसलिए स्मरण करते हैं क्योंकि उन्होंने जो कहा, उसे करके दिखाया। कोई भी वाणी तब मंत्र बनती है, जब उसे बोलने वाले की वाणी और उसके आचरण में कोई अंतर न हो। जब व्यक्ति जो कहता है, वही अपने जीवन में करता भी है, तभी समाज में उसके प्रति विश्वास उत्पन्न होता है। श्रद्धेय अशोक जी के जीवन में कथनी और करनी की एकरूपता थी। सिंघल जी का सम्पूर्ण जीवन उनके संकल्प का प्रमाण था।
आज अयोध्या धाम में जो परिवर्तन दिखायी दे रहा है, वह महत्वपूर्ण है। जिन लोगों को पहले अयोध्या में परिक्रमा करने से भी रोका जाता था, आज उसी अयोध्या धाम में भव्य दीपोत्सव का आयोजन होता है। अयोध्या आज देश और दुनिया के सामने अपनी प्राचीन आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के साथ नए स्वरूप में प्रस्तुत हो रही है। श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने जिस संकल्प के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया था, आज अयोध्या में भव्य श्रीराम मन्दिर के रूप में उस संकल्प का साकार स्वरूप दिखाई दे रहा है। यह उनके तप, संघर्ष, संगठन क्षमता और जीवनभर किए गए अथक प्रयासों का स्मरण कराने वाला अवसर है।
अयोध्या ने लगभग 500 वर्ष तक उपेक्षा झेली है। यहाँ पर स्वच्छता, बिजली, सड़क सहित अन्य बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं। पहले राम जी की पैड़ी का जल प्रदूषित था। प्रदेश सरकार द्वारा राम जी की पैड़ी का सौन्दर्यीकरण किया गया। आज राम जी की पैड़ी हरिद्वार की हर की पैड़ी के समान है। आज राम जी की पैड़ी में अविरल और निर्मल सरयू जी का दर्शन होता है। 05 लाख से अधिक श्रद्धालु राम जी की पैड़ी में एक साथ स्नान कर सकते हैं। आज प्रत्येक वर्ष अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन किया जाता है। जहां पर पहले सकरी और टूटी गलियाँ थीं, आज वहाँ पर राम पथ, धर्म पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ 4-लेन से जुड़े हुए हैं।
महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या में इण्टरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण किया गया है। माता शबरी के नाम पर भोजनालय, निषादराज के नाम पर रात्रि विश्रामालय, पूत्य संतों के नाम पर मन्दिर एवं मूर्तियों की स्थापना की गयी है। आज अयोध्या सोलर सिटी बन गयी है। राम द्रोही इसे स्वीकार नहीं कर सकते, वह कुछ न कुछ युक्ति निकालकर अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। जो लोग राम मन्दिर का विरोध करते थे, वह भी आज अपने को राम भक्त कहलाने की कोशिश करते हैं। यह विश्व हिन्दू परिषद की वैचारिक विजय है। उन्होंने कहा कि राम काज में कालनेमि भी आएंगे, सभी बजरंगियों को कालनेमि से बचने और पहचानने की आवश्यकता है।
राम जन्मभूमि आन्दोलन का मामला जब न्यायालय में था, तब एक तरफ श्रद्धेय अशोक जी तथा पुरातत्व वेक्ताओं एवं विषय-विशेषज्ञों की टीम जुटाए गए तथ्यों के साथ होती थी। दूसरी तरफ काँग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथियों द्वारा श्रीराम जन्मभूमि के विरोध में जुटाए गए झूठे तथ्य होते थे, जिसका कोई वजूद नहीं था। यह राम मन्दिर के आन्दोलन में बाधा पैदा करते थे, जिससे फैसला हिन्दुओं के पक्ष में न आए। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दिया था कि प्रभु श्रीराम एवं प्रभु श्रीकृष्ण का कोई वजूद नहीं है। श्रीराम जन्मभूमि न्यास ट्रस्ट द्वारा आमंत्रण दिए जाने के बावजूद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास एवं उद्घाटन में यह लोग नहीं गए थे। इस समय उनको अपना वोट बैंक दिखाई देता था।
श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने जो ज्वाला 1980 के दशक में प्रज्वलित की थी, वह सिर्फ श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर की प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि सभी मान बिन्दुओं की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए है। हर गुलामी के चिन्हों को समाप्त करने की है। भारत को भारत एवं भारतीयता के अनुरूप भारत के मान बिन्दुओं की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा से जोड़ने का अभियान है। इस अभियान में हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना है। श्रद्धेय अशोक जी जितने प्रखर सनातनी थे, अंतःकरण से उतने ही कोमल हृदय के थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि श्रद्धेय अशोक जी के जन्म शताब्दी महोत्सव के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए। यह आयोजन दलित बस्तियों, वनवासी क्षेत्रों, एकल विद्यालयों, सभी मठ-मन्दिरों में होने चाहिए। गौरक्षा का विषय सिर्फ भाषण का विषय नहीं, गौरक्षा आचरण का विषय है। प्रदेश सरकार ने राज्य में सभी अवैध बूचड़खानों को बंद कराया। प्रदेश में सख्त कानून बनाते हुए 7,700 से अधिक गौशालाओं का निर्माण कराया। इन गौशालाओं में 16 लाख से अधिक गौवंश संरक्षित हैं। प्रदेश सरकार गौवंश की देखभाल हेतु 1,500 रुपये प्रति गाय प्रतिमाह उपलब्ध करा रही है। हम गाय को माता मानते हैं। हमें गौपालन के धर्म के साथ जुड़ना चाहिए।
इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय महामंत्री श्री मिलिंद परांडे, परिषद के अन्य पदाधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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