’उत्तर प्रदेश में नॉर्थ साउथ कॉरिडोर से मजबूत होगी उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी, विकास को मिलेगी नई रफ्तार’

लखनऊः 24 सितम्बर, 2026

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, विशाल जनसंख्या, औद्योगिक क्षमता, कृषि उत्पादन तथा पड़ोसी राज्यों और नेपाल के साथ इसकी सीमा इसे राष्ट्रीय परिवहन व्यवस्था में विशेष महत्व प्रदान करती है। ऐसे में प्रदेश के उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम हिस्सों के बीच तेज, सुगम और बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करना आर्थिक एवं सामाजिक विकास की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में नॉर्थ साउथ कॉरिडोर के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
वर्तमान में प्रदेश में निर्मित अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एक्सप्रेस-वे मुख्य रूप से पूर्व से पश्चिम दिशा में आवागमन को सुगम बनाते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास, सामाजिक एवं सामरिक दृष्टिकोण से नेपाल सीमा से लगे जनपदों को प्रदेश के दक्षिणी एवं मध्य भाग के महत्वपूर्ण जनपदों से जोड़ना आवश्यक है। इसके साथ ही प्रदेश को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों से बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करने की आवश्यकता को भी महसूस किया गया है। इसी व्यापक दृष्टिकोण के तहत नॉर्थ साउथ कॉरिडोर के अंतर्गत मार्गों के नवनिर्माण, चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्निर्माण का कार्य प्रस्तावित किया गया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में नई मद सृजित करते हुए 200 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान प्रदेश में उत्तर-दक्षिण दिशा में बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है। योजना का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा से जोड़ते हुए आर्थिक गतिविधियों को गति देना, आवागमन को आसान बनाना और क्षेत्रीय विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
’06 कॉरिडोर का किया गया चयन’
प्रदेश में पूर्व से स्थापित एक्सप्रेस-वे एवं हाईवे नेटवर्क को उत्तर दिशा से दक्षिण दिशा में जोड़ने के लिए नॉर्थ साउथ कॉरिडोर योजना के अंतर्गत कुल 06 कॉरिडोर का चयन किया गया है। इन कॉरिडोर के माध्यम से नेपाल सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जनपदों को दक्षिणी एवं मध्य क्षेत्र के महत्वपूर्ण जनपदों से जोड़ने के साथ-साथ राज्य को देश के अन्य प्रमुख राज्यों से बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है। इस योजना के अंतर्गत चयनित मार्गों के विकास से उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों को भी बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी, जहां वर्तमान में प्रमुख एक्सप्रेस-वे अथवा राष्ट्रीय राजमार्गों तक पहुंच अपेक्षाकृत सीमित है। बेहतर सड़क संपर्क का सीधा प्रभाव स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों, रोजगार के अवसरों और आम नागरिकों के आवागमन पर पड़ने की संभावना है।
कुशीनगर-देवरिया-बरहज क्षेत्र को मिलेगा बेहतर संपर्क
नॉर्थ साउथ कॉरिडोर के अंतर्गत चयनित महत्वपूर्ण कॉरिडोर में कुशीनगर- देवरिया-बरहज-दोहरीघाट-गाजीपुर-जमुनिया कॉरिडोर भी शामिल है। इस कॉरिडोर के अंतर्गत देवरिया से कसया मार्ग के किमी 31.05 तथा देवरिया से बरहज मार्ग के किमी  21.750 के हिस्से में 04 लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। देवरिया से कसया मार्ग के लिए स्वीकृत लागत 292.067 करोड़ रुपये तथा देवरिया से बरहज मार्ग के लिए स्वीकृत लागत 172.26 करोड़ रुपये है। इन मार्गों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण से इस क्षेत्र में सड़क यातायात की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आवागमन को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी। यह क्षेत्र पूर्वांचल के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। कुशीनगर, देवरिया, बरहज और आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ प्रमुख मार्गों तक पहुंच और बेहतर हो सकेगी। कृषि एवं अन्य स्थानीय उत्पादों को बाजारों तक पहुंचाने में भी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी उपयोगी साबित हो सकती है।
सिद्धार्थनगर में भी सड़क विकास को मिलेगी गति
नॉर्थ साउथ कॉरिडोर योजना के तहत एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य जनपद सिद्धार्थनगर में बढ़पुर पिपरहवा के चौनेज 0.00 से 9.400 तक प्रस्तावित है। कुल   9.400 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के 04 लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए  261.50 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत के साथ स्वीकृति प्रदान की गई है। सिद्धार्थनगर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सड़क संपर्क का विशेष महत्व है। यह क्षेत्र नेपाल सीमा के निकट होने के कारण व्यापार, पर्यटन, आवागमन और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस प्रकार की सड़क परियोजनाएं सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
’पूर्वांचल के विकास को मिलेगा आधार’
नॉर्थ साउथ कॉरिडोर की परिकल्पना का एक महत्वपूर्ण पहलू पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है। पूर्वांचल में कृषि, पर्यटन, धार्मिक स्थलों तथा छोटे-बड़े व्यापारिक केंद्रों की पर्याप्त संभावनाएं हैं। बेहतर सड़क संपर्क इन क्षेत्रों को बड़े बाजारों से जोड़ने में सहायक हो सकता है। विशेष रूप से नेपाल सीमा से लगे जनपदों को प्रदेश के मध्य एवं दक्षिणी हिस्सों तथा अन्य राज्यों से जोड़ने से आवागमन का एक वैकल्पिक और मजबूत नेटवर्क विकसित किया जा सकेगा। इससे मौजूदा प्रमुख मार्गों पर यातायात के दबाव को व्यवस्थित करने में भी सहायता मिल सकती है।
आर्थिक विकास और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
किसी भी क्षेत्र की आर्थिक प्रगति में मजबूत सड़क नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अच्छी सड़कें न केवल यात्रा का समय कम करती हैं, बल्कि माल ढुलाई, कृषि उत्पादों के परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी सुगम बनाती हैं। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। नॉर्थ साउथ कॉरिडोर के माध्यम से विकसित होने वाला सड़क नेटवर्क प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आर्थिक गतिविधियों की कनेक्टिविटी को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को बड़े आर्थिक केंद्रों से जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सड़क निर्माण के साथ गुणवत्ता पर भी जोर
नॉर्थ साउथ कॉरिडोर के अंतर्गत मार्गों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण यातायात क्षमता बढ़ाने की दृष्टि से लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित सड़क ढांचे के निर्माण के लिए भी आवश्यक है। इसलिए परियोजनाओं में निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। नॉर्थ साउथ कॉरिडोर उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी के विस्तार की एक व्यापक अवधारणा है। इसके माध्यम से नेपाल सीमा से लेकर प्रदेश के महत्वपूर्ण मध्य एवं दक्षिणी क्षेत्रों और आगे अन्य राज्यों तक संपर्क मजबूत करने की दिशा में आधार तैयार किया जा रहा है। चयनित 06 कॉरिडोर और विभिन्न मार्गों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण से प्रदेश के सड़क नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी। इन परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती, पूर्वांचल और मध्यवर्ती क्षेत्रों के बीच आवागमन अधिक सुगम हो जायेगा। बेहतर सड़कें विकास, रोजगार, व्यापार, पर्यटन और निवेश की संभावनाओं को मजबूत करने का माध्यम बनेगी। प्रदेश सरकार की नॉर्थ साउथ कॉरिडोर केवल सड़कों का विस्तार नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से विकास की एक साझा धारा से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है।

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