बलरामपुर- जनपद को स्वच्छ, सुंदर एवं हरित बनाने के अभियान के तहत जिला प्रशासन के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए उतरौला-बहराइच बाईपास पर विशेष हरित क्षेत्र विकसित करने की पहल की गई है। चीनी मिल द्वारा बाईपास स्थित चीनी मिल केमिकल डिवीजन के साइट डेवलपमेंट के अंतर्गत यहां मियावाकी पद्धति से विशेष पौधरोपण किया जा रहा है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिक से अधिक पौधरोपण एवं उनका समुचित संरक्षण कर जनपद में हरित क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है।
उतरौला-बहराइच बाईपास पर मियावाकी प्लांटेशन के माध्यम से विकसित होने वाला ग्रीन जोन न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाएगा, बल्कि सड़क के किनारे हरियाली विकसित होने से पर्यावरणीय दृष्टि से भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह पहल बाईपास के साइड को सुव्यवस्थित एवं आकर्षक स्वरूप प्रदान करने के साथ ही 'स्वच्छ एवं सुंदर बलरामपुर' की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
*क्या है मियावाकी प्लांटेशन*
मियावाकी पौधरोपण एक विशेष सघन वनीकरण पद्धति है, जिसे जापानी वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी ने विकसित किया था। इस तकनीक में सीमित भूमि पर स्थानीय जलवायु एवं मिट्टी के अनुकूल विभिन्न प्रजातियों के पौधों को सामान्य पौधरोपण की तुलना में अधिक सघनता से लगाया जाता है। इसका उद्देश्य कम स्थान में तेजी से घना और विविधतापूर्ण हरित क्षेत्र विकसित करना है।
मियावाकी पद्धति में स्थानीय एवं देशज प्रजातियों के पौधों के चयन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। पौधों को पास-पास लगाए जाने से वे प्रकाश एवं पोषक तत्वों के लिए प्राकृतिक प्रतिस्पर्धा करते हुए तेजी से विकसित होते हैं। उचित देखभाल के बाद ऐसा क्षेत्र समय के साथ घने लघु वन (Mini Forest) का स्वरूप ले सकता है।
सघन हरियाली विकसित होने से धूल एवं वायु प्रदूषण को कम करने, कार्बन अवशोषण, स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देने, तापमान के प्रभाव को कम करने तथा पक्षियों एवं छोटे जीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास तैयार करने में सहायता मिलती है। विशेष रूप से शहरी एवं सड़क किनारे सीमित स्थानों में हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए यह पद्धति उपयोगी मानी जाती है।
जिलाधिकारी ने मियावाकी प्लांटेशन की पहल की सराहना करते हुए पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई एवं संरक्षण सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया, जिससे लगाए गए पौधे विकसित होकर स्थायी हरित क्षेत्र का स्वरूप ले सकें।
जिला प्रशासन द्वारा जनपद में स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्थलों एवं प्रमुख मार्गों को हरित एवं आकर्षक बनाए जाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

                हिन्दी संवाद न्यूज से
                 रिपोर्टर वी. संघर्ष
                    बलरामपुर। 

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