उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग (यूपीएसआईसी)
लखनऊ | 22 अगस्त 2026

यूपीएसआईसी ने पुराने बकाया प्रकरणों में से 92.5% का निस्तारण किया; कैट्स-यूपीएसआईसी के माध्यम से शुभारंभ से अब तक 43,000 से अधिक आरटीआई अपीलों का निस्तारण

आज दिनांक 22-08-2026 को उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के माननीय मुख्य सूचना आयुक्त एवं माननीय सूचना आयुक्तगण द्वारा माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से शिष्टाचार भेंट की गई। इस अवसर पर आयोग के कार्यों, प्रगति एवं सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में चर्चा हुई।

इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के समक्ष शिकायत एवं अपील ट्रैकिंग प्रणाली (कैट्स-यूपीएसआईसी) पर अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इस प्रणाली का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा 5 जनवरी 2024 को उत्तर प्रदेश में आरटीआई अपीलों एवं शिकायतों की ऑनलाइन फाइलिंग तथा हाइब्रिड सुनवाई सुनिश्चित करने हेतु किया गया था।

13 मार्च 2024 को, जब नवनियुक्त राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्तों ने आयोग में पदभार ग्रहण किया, उस समय पुराने आंकड़ों (ऑफलाइन) में 24,987 प्रकरण लंबित थे। इनमें से आयोग द्वारा अब तक 23,113 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है—अर्थात 92.5% की निस्तारण दर। पुरानी प्रणाली से केवल 1,874 प्रकरण ही अब शेष हैं।

नई कैट्स-यूपीएसआईसी प्रणाली पर अब तक 66,203 प्रकरण पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 43,022 का निस्तारण किया जा चुका है, तथा 22,828 प्रकरण आयोग के 11 सुनवाई कक्षों में, राज्य के समस्त 75 जनपदों को आच्छादित करते हुए, वर्तमान में लंबित हैं।

यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को पूर्णतः पेपरलेस प्रक्रिया प्रदान करता है—जिसमें ऑनलाइन फाइलिंग, हाइब्रिड सुनवाई, प्रकरण अभिलेखों तक ई-बुक पहुँच तथा पूर्ण पारदर्शिता हेतु वास्तविक समय स्थिति ट्रैकिंग सम्मिलित है। विभिन्न सरकारी विभागों के जनसूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय प्राधिकारी इस प्रणाली पर पंजीकृत किए जा चुके हैं।

कैट्स-यूपीएसआईसी की ऑनलाइन एवं हाइब्रिड व्यवस्था के अंतर्गत अपीलार्थियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में ऑनलाइन जुड़ने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इसके माध्यम से अपीलार्थी देश के विभिन्न हिस्सों तथा विदेश से भी अपने प्रकरण की सुनवाई में ऑनलाइन भाग ले सकते हैं।

विशेष रूप से दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले एवं आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को इसका लाभ प्राप्त हो रहा है, क्योंकि वे बिना लंबी दूरी की यात्रा किए ऑनलाइन आवेदन/अपील दाखिल करने के साथ-साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में भी सम्मिलित हो सकते हैं। इससे उनके समय एवं यात्रा व्यय की बचत हो रही है तथा सूचना के अधिकार की प्रक्रिया अधिक सुलभ एवं समावेशी बनी है।

ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई में नागरिकों की सहभागिता को दर्शाने वाली तस्वीरें भी इस प्रगति विवरण के साथ संलग्न की जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने मई 2022 में ही इस प्लेटफॉर्म का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया था, जो माननीय उच्चतम न्यायालय के अक्टूबर 2023 के उस निर्देश से काफी पहले था, जिसमें समस्त राज्य सूचना आयोगों के लिए हाइब्रिड सुनवाई अनिवार्य की गई थी। इस प्रकार उत्तर प्रदेश इस दिशा में अनुपालन करने वाले प्रथम राज्यों में सम्मिलित है।

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