जय हिंद इंडस्ट्रीज दो साल में करेगी 600 करोड़ रुपये का निवेश
इस चरणबद्ध निवेश के जरिये मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर होगा जोर
पुणे/चेन्नई, 12 अगस्त 2026: प्रिसिजन एल्युमीनियम डाई-कास्टिंग कंपोनेंट्स की अग्रणी वैश्विक आपूर्तिकर्ता और पूरी तरह वर्टिकली इंटीग्रेटेड कंपनी जय हिंद इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (जेएचआई) ने अपनी उत्पादन क्षमता और मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अगले दो वर्षों में 600 करोड़ रुपये के चरणबद्ध निवेश की घोषणा की है। यह निवेश हाई प्रेशर डाई कास्टिंग (एचपीडीसी) और ग्रैविटी डाई कास्टिंग (जीडीसी) कारोबार को बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
कंपनी ने चेन्नई स्थित अपने प्लांट के विस्तार के लिए पहले ही 200 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी। अब इसमें 400 करोड़ रुपये और जोड़ने का फैसला किया गया है। इसके साथ कंपनी का कुल प्रस्तावित निवेश बढ़कर 600 करोड़ रुपये हो गया है।
यह अतिरिक्त निवेश वित्त वर्ष 2026-27 से 2027-28 के बीच चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। निवेश पुणे के आकुर्डी और उर्से तथा चेन्नई स्थित कंपनी की प्रमुख उत्पादन इकाइयों में किया जाएगा। विस्तार योजना के तहत चेन्नई में एक नई अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित की जाएगी। इसके अलावा 1,200 टन से 3,500 टन क्षमता वाली 12 से अधिक नई हाई प्रेशर डाई कास्टिंग मशीनें लगाई जाएंगी। कंपनी अपनी प्रिसिजन मशीनिंग क्षमता भी बढ़ाएगी। साथ ही हीट ट्रीटमेंट, इम्प्रेग्नेशन और पाउडर कोटिंग जैसी जरूरी इन-हाउस प्रक्रियाओं का विस्तार किया जाएगा और प्लांट के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा।
कंपनी एक विशेष पाउडर कोटिंग सुविधा भी स्थापित करेगी। इससे एक ही जगह पर उत्पादों की बेहतर सरफेस फिनिशिंग, जंग से ज्यादा सुरक्षा और लंबे समय तक टिकाऊपन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा उत्पादन प्रक्रिया पर बेहतर नियंत्रण भी संभव होगा।
जय हिंद इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रसन फिरोदिया ने कहा, "जय हिंद इंडस्ट्रीज में हम हमेशा ग्राहकों की जरूरत बढ़ने से पहले ही अपनी क्षमता बढ़ाने में विश्वास रखते हैं। बड़े और जटिल एल्युमीनियम कास्टिंग उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हम उत्पादन क्षमता, सटीकता और भरोसेमंद आपूर्ति को मजबूत कर रहे हैं। यह निवेश कंपनी को अपने ग्राहकों की आने वाली परियोजनाओं की जरूरत पूरी करने में मदद करेगा। साथ ही भारत से वैश्विक स्तर की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने में भी योगदान देगा, जो सरकार के 'मेक इन इंडिया' विजन के अनुरूप है।"

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