13 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के अंतर्गत भीमबैठका के शैलचित्रों एवं धरोहर जागरूकता पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

लखनऊ: 21 अगस्त, 2026

उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय, लखनऊ द्वारा आयोजित 13 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के दूसरे दिन पुरातत्व एवं सांस्कृतिक धरोहर से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास ने ैजनकल व िजीम ठतपबा ैजतनबजनतमे ंदक ठीपउइमजां ब्ंअमेरू भ्पेजवतल ंदक च्ंपदजपदहे विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भीमबैठका शैलाश्रयों के इतिहास, उनकी खोज तथा वहां प्राप्त प्रागैतिहासिक भित्ति चित्रों की ऐतिहासिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. व्यास ने इन शैलचित्रों की संरचना, चित्रांकन शैली तथा रंगों एवं चित्र निर्माण में प्रयुक्त प्राकृतिक सामग्रियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन भित्ति चित्रों में प्रागैतिहासिक मानव के जीवन, आखेट, नृत्य, युद्ध, सामूहिक गतिविधियों तथा पशु-जगत का अत्यंत सजीव चित्रण मिलता है। विभिन्न कालखंडों से संबंधित इन चित्रों की शैलीगत विविधता मानव सभ्यता एवं सांस्कृतिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण स्रोत है।
द्वितीय सत्र में डॉ. साधना व्यास ने थ्वेजमतपदह भ्मतपजंहम ।ूंतमदमेेरू ज्ीम त्वसम व िज्मंबीमते ंदक ैजनकमदजे” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने सांस्कृतिक एवं पुरातात्त्विक धरोहर के प्रति जागरूकता विकसित करने में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक धरोहर संबंधी ज्ञान एवं संरक्षण के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, जबकि विद्यार्थी भविष्य में धरोहर संरक्षण के जागरूक संवाहक बन सकते हैं। उन्होंने विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थानीय विरासत, स्मारकों और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति संवेदनशीलता एवं संरक्षण की भावना विकसित करने पर विशेष बल दिया।
इस अवसर पर पुरातत्व निदेशक श्रीमती रेनू द्विवेदी ने पद्मश्री से सम्मानित डॉ. नारायण व्यास को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा डॉ. साधना व्यास को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, लखनऊ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. राजेंद्र यादव की उपस्थिति भी रही।
कार्यक्रम में लगभग 100 प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की, जबकि 50 प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम से जुड़े रहे। विभाग की निदेशक श्रीमती रेनू द्विवेदी ने अतिथियों एवं वक्ताओं का अभिवादन करते हुए उनका स्वागत किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन डॉ. मनोज कुमार यादव द्वारा किया गया।
दोनों सत्रों में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के व्याख्यानों को अत्यंत रुचि एवं उत्साह के साथ सुना तथा पुरातत्व, सांस्कृतिक धरोहर एवं उसके संरक्षण से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

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