बलरामपुर- जनपद में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने तथा जनजातीय समुदायों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने बुधवार को विकास खंड बलरामपुर स्थित राजकीय रेशम फार्म, बालपुर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने रेशम उत्पादन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का जायजा लिया तथा विभागीय अधिकारियों को रेशम उद्योग के समग्र विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने रेशम कीटों के पालन, रेशम कृषकों को रेशम कीटों के वितरण, शहतूत के पौधों के वितरण, रेशम उत्पादन की वर्तमान स्थिति एवं किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़ा जाए तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण कीट, पौध एवं तकनीकी सहयोग समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो सके।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने रेशम के काकून एवं रेशम धागे के विपणन की उपलब्धता की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जनपद में रेशम उद्योग को केवल कच्चे उत्पादों की बिक्री तक सीमित न रखते हुए वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) को विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि केवल रेशम के काकून अथवा धागे की बिक्री करने की अपेक्षा यदि स्थानीय स्तर पर रेशमी कपड़े, परिधान एवं अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएं तो इससे कहीं अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। इससे न केवल रेशम कृषकों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
जिलाधिकारी ने थारू जनजाति को रेशम उद्योग से जोड़ने पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत थारू समुदाय के युवाओं एवं महिलाओं को रेशम धागे से वस्त्र एवं अन्य उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने उन्हें पावरलूम एवं आधुनिक बुनाई तकनीकों से जोड़ते हुए उत्पादन से लेकर तैयार उत्पादों के विपणन तक की पूरी श्रृंखला विकसित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जनपद के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले थारू समुदाय के लिए रेशम उद्योग आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकता है। प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग एवं विपणन की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराकर उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार से जोड़ा जा सकता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी तथा जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित होंगे।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रेशम उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रशिक्षण, पावरलूम से जुड़ाव एवं विपणन की एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि बलरामपुर में रेशम उद्योग को नई पहचान मिले और अधिक से अधिक किसान एवं जनजातीय परिवार इस क्षेत्र से जुड़कर लाभान्वित हो सकें।
निरीक्षण के दौरान सहायक निदेशक रेशम, जिला रेशम अधिकारी श्री सतीश पांडे सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
हिन्दी संवाद न्यूज से
रिपोर्टर वी. संघर्ष
बलरामपुर।
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