बलरामपुर- जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन के निर्देशन में जनपद में बाढ़ पूर्व तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने, राहत एवं बचाव तंत्र को सशक्त करने तथा जनसामान्य को आपदा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार में राहत एवं बचाव दलों का प्रशिक्षण एवं समन्वय कार्यक्रम आयोजित किया गया।
 बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सुश्री ज्योति राय ने की। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब जनपद के बाढ़ संभावित एवं संवेदनशील गांवों में 'बाढ़ राहत चौपाल' आयोजित कर ग्रामीणों को सीधे आपदा प्रबंधन से जोड़ा जाएगा। इन चौपालों के माध्यम से लोगों को बाढ़ आने से पहले की तैयारियों, आपदा के समय अपनाई जाने वाली सावधानियों तथा बाढ़ के बाद स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी आवश्यक जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि प्रत्येक नागरिक आपदा के समय स्वयं सुरक्षित रहे और दूसरों की मदद करने में भी सक्षम बने।
अपर जिलाधिकारी सुश्री ज्योति राय ने राहत एवं बचाव दलों को निर्देशित किया कि चौपालों में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, लेखपाल, रोजगार सेवक, आपदा मित्र तथा अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि गांव स्तर पर मजबूत आपदा प्रबंधन नेटवर्क तैयार हो सके। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता जितनी मजबूत होगी, आपदा का प्रभाव उतना ही कम होगा।
उन्होंने बताया कि शासन द्वारा जनपद की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीआरएफ तथा फ्लड पीएसी की एक-एक टीम पहले से ही बलरामपुर में तैनात कर दी गई है। आधुनिक संसाधनों से लैस ये टीमें जिला प्रशासन के निर्देशन में किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बैठक में यह भी तय किया गया कि गुरुवार से राहत एवं बचाव दल बाढ़ प्रभावित रहे गांवों का भ्रमण, रैकी एवं राहत चौपालों का आयोजन प्रारंभ करेंगे। इस दौरान स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित कर संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित स्थलों की जानकारी तथा आपदा के समय अपनाई जाने वाली कार्ययोजना साझा की जाएगी। इससे ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ेगी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सकेगी।
जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने राहत एवं बचाव दलों को जनपद में की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में 'गोल्डन आवर' सबसे महत्वपूर्ण होता है। समय पर सूचना और तत्काल कार्रवाई से जनहानि एवं अन्य नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने सभी टीमों से हर सूचना पर त्वरित, समन्वित और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करने का आह्वान किया।
उल्लेखनीय है कि स्वयं जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन, अपर जिलाधिकारी तथा उपजिलाधिकारी लगातार बाढ़ संभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। राहत चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित कर प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी संभावित स्थिति में जनपद पूरी तरह तैयार रहे।
बैठक में एसडीआरएफ प्रभारी कार्तिकेय मिश्रा, फ्लड पीएसी प्रभारी मेजर चुम्मन यादव, आपदा मित्र मास्टर ट्रेनर रमजान अली, मोतीराम यादव सहित एसडीआरएफ एवं फ्लड पीएसी के अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है—आपदा आने पर केवल राहत पहुंचाना ही नहीं, बल्कि पहले से ऐसी तैयारी करना कि जन-धन की हानि न्यूनतम रहे और प्रत्येक नागरिक स्वयं भी सुरक्षित रहे तथा दूसरों की सुरक्षा में सहभागी बन सके।

               हिन्दी संवाद न्यूज से
                रिपोर्टर वी. संघर्ष
                   बलरामपुर। 

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