मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आबादी की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है। प्रदेश में उपजाऊ भूमि और अच्छा जल संसाधन मौजूद है। इसको टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इसमें भारत मौसम विज्ञान विभाग की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा समय पर जानकारी मिलने से अन्नदाता किसानों को होने वाली क्षति, अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान तथा खाद्यान्न संकट से बचने में काफी हद तक सफल हो सकते हैं। लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र प्रारम्भ होने से उत्तर प्रदेश को काफी लाभ प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री जी आज यहां मिशन मौसम के अन्तर्गत मौसम विज्ञान केन्द्र, लखनऊ के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र के रूप में उन्नयन की घोषणा करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी तथा कार्यक्रम में उपस्थित केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ0 जितेन्द्र सिंह एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग की टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश तथा विकसित भारत की संकल्पना को नई साइंटिफिक कड़ी के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्राचीन काल से ही प्रत्येक मनुष्य के मनो-मस्तिष्क में मौसम को लेकर जिज्ञासा रही है। आकाश में चमकती बिजली, बादलों से होने वाली वर्षा या अन्य प्रकार की मौसम सम्बन्धी स्थितियां लोगों के लिए कौतूहल का विषय रही हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने समय के अनुरूप स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पंचांग का निर्माण किया था। ग्रहों एवं नक्षत्रों को ध्यान में रखते हुए की गई गणना मौसम की सटीक जानकारी का आधार बनती थी। लोग प्राकृतिक घटनाओं के आधार पर मौसम का अनुमान लगाते थे। पशु-पक्षियों के व्यवहार में परिवर्तन कई बार मौसम के अनुमान का आधार बनता था, जिसे मुहावरों, लोकोक्तियों, लोक गाथाओं आदि में वर्णित किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग अपनी स्थापना के 150 वर्ष पूर्ण कर चुका है। आजादी के बाद अपेक्षित ध्यान न देने के कारण किसानों की प्रगति तथा प्राकृतिक आपदाओं से जन-धन की हानि रोकने के प्रयासों में कमी नजर आयी। विगत 12 वर्षों में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में प्रारम्भ हुए अभियान के परिणामस्वरूप भारत मौसम विज्ञान विभाग की कार्यप्रणाली में अन्तर आया है। पहले ध्यान न दिए जाने के कारण विभाग के लिए मौसम की सटीक जानकारी देना कठिन था। आज भारत मौसम विज्ञान विभाग की भविष्यवाणियों में सटीकता आई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 13 मई, 2026 को आंधी-तूफान के कारण उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में जन-धन की हानि हुई। 02 दिन पश्चात मौसम विभाग से ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ की सक्रियता के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गई, तो ज्ञात हुआ कि ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ ठीक से काम कर रहा था, लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ कमियां थी। इसके उपरान्त प्रशासन के साथ हुई बैठक में निर्देश दिए गए कि स्थानीय स्तर पर संस्थाओं को सक्रिय किया जाए तथा लोगों को सटीक जानकारी दी जाए। इसके कुछ दिन बाद दूसरी बार आपदा आने पर तकनीक का प्रयोग करते हुए 03 घण्टे पूर्व ही मोबाइल पर वॉर्निंग दी गई।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में माँ शाकुम्भरी देवी का मन्दिर है। देहरादून और शिवालिकों में भारी बारिश हुई। उस दौरान मन्दिर में कीर्तन चल रहा था। बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां उपस्थित थे, लेकिन समय पर अलर्ट मिलने के कारण, उन श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया तथा जन-धन की व्यापक हानि को रोका गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा तकनीक का प्रयोग करते हुए सही समय पर सटीक जानकारी देने का सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पहले मीरजापुर, सोनभद्र, चन्दौली आदि जनपदों में आकाशीय बिजली गिरने से जनहानि का खतरा बना रहता था। प्रत्येक वर्ष 100-150 व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती थी। आज से लगभग 05 वर्ष पूर्व प्रयागराज से पटना के मध्य एक ही दिन में 90 लोगों की मृत्यु हुई थी, जिसमें से 30 लोगों की मृत्यु उत्तर प्रदेश में हुई थी। तत्काल एन0डी0आर0एफ0, एस0डी0आर0एफ0, एस0डी0एम0ए0 तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग के साथ बैठक की गयी। आज मीरजापुर, सोनभद्र व चन्दौली में होने वाली मृत्यु का आंकड़ा सैकड़ों से घटकर एक दर्जन के आस-पास रह गया है। अब समय पर अलर्ट जारी किया जाता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि क्लाइमेट चेन्ज के कारण मौसम चक्र में बदलाव आया है। सम्पूर्ण मौसम चक्र में लगभग एक माह का अन्तर आया है। यदि इसी प्रकार की परिस्थितियां रहीं, तो एक समय के उपरान्त देश व दुनिया के समक्ष खाद्यान्न का संकट खड़ा हो सकता है। मनुष्य ने स्वयं के स्वार्थ के लिए प्रकृति का दोहन किया है। प्रकृति के साथ हम सभी का व्यवहार ’माता भूमि पुत्रोऽहं पृथिव्या’ का होना चाहिए था। यदि हम इससे विमुख होते हैं, तो पृथ्वी भी हमसे विमुख होती दिखाई देती है। यदि हम अपने संस्कारों को पुनर्जीवित कर लें तथा धरती माता के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, तो इसे सुधारने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश का अपना एक सेटेलाइट हो, इसके लिए सरकार की ओर से इसरो से अनुरोध किया गया है, ताकि मौसम की सटीक जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके। यदि यू0पी0 स्पेसिफिक सेटेलाइट स्थापित किया जाता है, तो प्रदेश सरकार मदद करने के लिए तैयार है। लाइटनिंग के कारण होने वाली मृत्यु के मामले में राज्य सरकार अपने स्तर पर और मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से पीड़ित परिवारों को धनराशि उपलब्ध कराती है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में किसान के साथ-साथ सह किसान अर्थात बटाईदार के परिवार के सदस्य को भी 05 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध करायी जाती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में तथा हिमालय से आने वाली नदियों में बार-बार बाढ़ आती है। यमुना बेसिन, गंगा बेसिन, सरयू, राप्ती व गंडक आदि नदियों में लगातार बाढ़ आती है। अलग-अलग समय पर बाढ़ के कारण व्यापक जन-धन की हानि होती है। इसके प्रभाव से बचने के लिए प्रदेश सरकार ने अनेक प्रयास किए हैं। प्रदेश में मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किये जा रहे हैं। इस दिशा में भारत मौसम विज्ञान विभाग बहुत अच्छा कार्य कर रहा है तथा वर्तमान में समय पर मौसम की जानकारी उपलब्ध करा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ब्लॉक स्तर पर 2,000 ऑटोमेटिक रेन गेज स्थापित किये गये हैं। इनके माध्यम से वर्षा की मात्रा के बारे में सही जानकारी प्राप्त हुई है। अन्नदाता किसानों को इसके बारे में जानकारी दी जा रही है। यह उपकरण हमें वर्षा, तापमान, ह्यूमिडिटी, वायु की गति और दिशा का रियल टाइम डाटा कलेक्ट कर इनकी स्टडी करने में सहायता करते हैं। इसके साथ ही आजमगढ़, वाराणसी, अलीगढ़, झांसी व लखनऊ जनपदों में एक्स-बैण्ड डॉप्लर वेदर रडार विभिन्न चरणों में स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे आंधी, तूफान, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि आदि की निगरानी करने में सहायता मिलेगी। प्रदेश में लाइटनिंग अर्थात आकाशीय बिजली के डिटेक्शन सेंसर लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत सरकार के ‘सचेत’ प्लेटफॉर्म से ब्रॉडकास्ट मोबाइल फोन एस0एम0एस0 से लोगों को मौसम के बारे में सचेत करने में सहायता मिली है। इससे व्यापक जन-धन की हानि रोकने में सफलता प्राप्त हुई है। इन कार्यक्रमों के आगे बढ़ने से अन्नदाता किसानों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने में काफी सुविधा होगी। प्रदेश में कृषि, फल तथा सब्जी उत्पादन की अपार सम्भावनाएं हैं। यहां देश की सबसे अधिक उपजाऊ भूमि तथा जल संसाधन उपलब्ध है। प्रदेश की 86 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचित है। यहां का किसान वर्ष में तीन-तीन फसलें उपजाता है। अगर हम किसानों को सही समय पर जानकारी देंगे, तो जिस कृषि भूमि में देश का 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन होता है, प्रदेश उसे बढ़ाकर 35-36 प्रतिशत करने की सामर्थ्य रखता है।
मुख्यमंत्री जी ने भारत मौसम विज्ञान विभाग को आश्वस्त करते हुए कहा कि अच्छी टेक्नोलॉजी, क्वॉण्टम कम्प्यूटिंग तथा किसी प्रकार की अन्य तकनीक को लाने के लिए विभाग द्वारा जो कार्यक्रम प्रदेश में लागू होंगे, उसके लिए राज्य सरकार पूरी मदद करने को तैयार है।
केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ0 जितेन्द्र सिंह ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी का सान्निध्य हमारे लिए प्रेरणादायक अवसर है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ हमने अनेक कार्यक्रम प्रारम्भ किए हैं। सभी कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री जी का पूरा सहयोग मिलता है। विगत एक से डेढ़ वर्ष में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में यहां केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण, लखनऊ न्यायपीठ के कार्यालय भवन व भारत के पहले लोटस गार्डेन का लोकार्पण किया गया है। आज के इस कार्यक्रम के अतिरिक्त हमारी दो अन्य योजनाएं पाइपलाइन में हैं। हम यहां इण्डस्ट्रियल बायोटेक पार्क स्थापित करने जा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार के साथ चर्चा जारी है। साथ ही, एन0सी0आर0 में प्रधानमंत्री जी के नेशनल क्वाण्टम मिशन से सम्बन्धित एक हब के निर्माण का काम भी शीघ्र ही शुरू करने वाले हैं।
डॉ0 जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विगत 12 वर्षों में देश में बहुत प्रगति हुई है। आज तर्क आधारित युग है। आंकड़े इस बात को प्रमाणित करते हैं। वर्ष 2014 तक देश भर में केवल 17 वेदर रडार्स थे। जम्मू कश्मीर, पंजाब तथा उत्तराखण्ड जैसे कई प्रदेश ऐसे थे, जहां एक भी रडार नहीं था। आज इनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है। मिशन मौसम के तहत 50 और रडार्स जुड़ने वाले हैं। अगले दो वर्षां में हम 100 रडार तक पहुंच जाएंगे, जिससे लोगों को एक-एक क्षण की जानकारी दे पाएंगे।
उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। साथ ही, यहां बहुत बड़ी उपजाऊ भूमि भी है। यहां की जलवायु में विविधता है। यहां सूखा, बाढ, तूफान, हीट वेव जैसी स्थितियां भी होती हैं, इसलिए यहां आई0एम0डी0 का एक सेण्टर होना आवश्यक था। इस सेण्टर के स्थापित होने के बाद से मौसम सम्बन्धी पूर्वानुमान की विश्वसनीयता और बढे़गी। वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में केवल 01 डॉप्लर वेदर रडार था। आज यहां 03 डॉप्लर वेदर रडार लग चुके हैं तथा 06 और लगने वाले हैं। वर्ष 2014 में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन 59 थे। आज बढ़कर 107 हो गए हैं। ऑटोमेटिक रेनफॉल गेज पहले 132 थे, यह बढ़कर 140 हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में केवल 03 एयरपोर्ट ऑब्जरवेटरीज थीं। आज इनकी संख्या बढ़कर 11 हो गयी है। अब लखनऊ, वाराणसी तथा प्रयागराज में आई0एम0डी0 की सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश को सात लाइटनिंग डिटेक्टर सेंसर्स उपलब्ध कराए गए हैं।
डॉ0 जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आज जो यहां सेण्टर स्थापित हो रहा है, इसके अधिकार क्षेत्र में उत्तराखण्ड भी होगा। इससे हमें कृषि क्षेत्र, एविएशन तथा जलवायु सम्बन्धी शोध में लाभ मिलेगा। अभी तक देश में सात रीजनल सेण्टर थे। इनमें सातवां सेण्टर परसों ही शुरू हुआ है। प्रयागराज में एक विण्ड प्रोफाइलर रडार लगाने का प्रस्ताव है, जिससे तूफान और आंधी का ऑब्जरवेशन हो सकेगा तथा इसकी सूचनाएं दी जा सकेंगी। जो सूचनाएं दी जा रही हैं, उसे गम्भीता से ली जाएं। रेड अलर्ट में सावधानी बरती जाएं।
कार्यक्रम को भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ0 मृत्युंजय मोहपात्रा, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, आई0एम0डी0 नई दिल्ली के प्रमुख डॉ0 डी0आर0 पटनायक, मौसम विज्ञान केन्द्र, आई0एम0डी0 लखनऊ के प्रमुख डॉ0 एम0आर0 रानाल्कर ने भी सम्बोधित किया।
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