उतरौला, बलरामपुर-एम.वाई. उस्मानी इंटर कॉलेज, उतरौला के प्रांगण में शुक्रवार रात्रि मरहूम शायर मुनव्वर राना की स्मृति में एक भव्य ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए नाम चीन शायरों और कवियों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ आयोजक सुमैय्या राना ने किया, जबकि मुशा यरे का संचालन प्रसिद्ध शायर नदीम फारूकी ने किया। इस अवसर पर समाज वादी पार्टी के जिला अध्यक्ष मणिलाल कश्यप को पूर्व विधायक अनवर महमूद खान द्वारा माला, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय का भी भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम में सैय्यदा खातून, डॉ. एहसान खान, मसूद खान, सांसद शिरोमणि वर्मा, डॉ. रफीउल्लाह खान, शत्रोहन वर्मा, महिला सभा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जुही सिंह, शारुन खान, डॉक्टर अब्दुल मन्नान खान, अल्ताफ काजी, डॉ. अनीस बैग, सिराजुद्दीन खान सहित समाज वादी पार्टी के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।मुशायरे में जौहर कानपुरी, हाशिम फिरोजाबादी, शबीना अदीब, महेंद्र मधुर, बिलाल सहारनपुरी, मुमताज नसीम, खुर्शी द हैदर, तबरेज राना, प्रतिभा यादव, अल्त मस अब्बास, अफजल इलाहाबादी, सबा बलरामपुरी, अरमान रज़ा बलरामपुरी, इफ्हाम उतरौल वी, राज उतरौलवी, शुजा उतरौलवी, आमिर आमरी एवं यूसुफ इक बाल सहित अनेक शायरों ने अपने कलाम पेश किए। प्रसिद्ध शायरा शबीना अदीब ने अपनी ग़ज़ल “तुझे आरज़ू थी, जिस की वही प्यार ला रही हूँ, मेरे ग़म में रोने वाले तेरे पास आ रही हूँ” सुनाकर खूब वाह वाही लूटी।शायर जौहर कानपुरी ने अपने अश आर"इरादे हों जवां जिनके वही बाज़ी पल टते हैं, मुखालिफ के लिए हर आदमी आँधी नहीं होता।"पेश कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। सबा बलरामपुरी ने अपनी ग़ज़ल"दिल की बस्ती में उजालों का सफर बाकी है,टूट कर बिखरे हैं सपने तो क्या, हौसला बाकी है।"सुनाकर महफ़िल को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया।अफजल इलाहाबादी ने पढ़ा" अब तो हर एक अदाकार से डर लगता है, मुझको दुश्मन से नहीं यार से डर लगता है।"वहीं अल्तमस अब्बास ने अपने अंदाज़ में कहा"बड़े सलीके से ज़िन्दगी को अज़ाब करके चला गया था,
वो एक शख्स जो मुझको खराब करके चला गया था।"
हाशिम फिरोजाबादी के अशआर—
"हमने हर दौर में सच बोल के देख लिया,
लोग नाराज़ हुए, बात बदलती ही नहीं।"
को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजक सुमैय्या राना ने सभी अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। देर रात तक चले इस मुशायरे ने साहित्य प्रेमियों को यादगार शाम का अनुभव कराया।

             हिन्दी संवाद न्यूज से
            असगर अली की खबर
              उतरौला बलरामपुर। 

Post a Comment

If you have any doubts, please let me know

और नया पुराने