मुख्यमंत्री ने वाराणसी में विज्ञान भारती के
दो दिवसीय 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया

मदन मोहन मालवीय जी के प्रयासों
से बी0एच0यू0 ज्ञान की धरा बनी : मुख्यमंत्री

विज्ञान का अर्थ लोक कल्याण, दुनिया में जिस
देश ने प्रगति की, उसके पास विज्ञान का यही भाव

पहले कृषि घाटे का सौदा नहीं था, किसान स्वयं नवाचार करता था

सरकार ने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना शुरू कर डिजाइन व
पैकेजिंग के माध्यम से कारीगरों को बाजार से जोड़ने का कार्य किया

प्रदेश का निर्यात 02 लाख करोड़ रु0 से अधिक हो चुका,
जिसका सबसे प्रमुख कारण एम0एस0एम0ई0 सेक्टर

96 लाख एम0एस0एम0ई0 यूनिटों में 03 करोड़ से अधिक लोग कार्य कर रहे



लखनऊ : 13 जून, 2026 :ः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज जनपद वाराणसी भ्रमण के अवसर पर महामना मदन मोहन मालवीय की कर्मस्थली काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में विज्ञान भारती के दो दिवसीय 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया। उन्होंने विज्ञान भारती की पुस्तिका का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा कि मदन मोहन मालवीय जी के प्रयासों से यह विश्वविद्यालय ज्ञान की धरा बनी है। विज्ञान का अर्थ ही लोक कल्याण है। दुनिया में जिस देश ने प्रगति की है, उसके पास विज्ञान का यही भाव था। आधुनिक विज्ञान का कुल समय चार से पांच सौ वर्षां का रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की प्राचीन गौरवशाली परम्परा को अध्ययन करने पर देखने को मिलता है कि एक समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी, चार सौ वर्ष पूर्व विश्व अर्थव्यवस्था में हमारी हिस्सेदारी लगभग 24 से 25 प्रतिशत थी, लेकिन स्वतंत्रता के समय यह हिस्सेदारी घटकर डेढ़ से 02 प्रतिशत रह गयी। हमें देखना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। पहले किसान केवल किसान नहीं, बल्कि वह इनोवेटर था। कृषि घाटे का सौदा नहीं था। उस समय का किसान स्वयं नवाचार करता था। हमारा व्यापारी केवल व्यापारी नहीं, बल्कि देश को जोड़ने की महत्वपूर्ण कड़ी था। हमारी अर्थव्यवस्था खेती बाड़ी से जुड़ी हुई थी तथा किसान अपने उत्पाद को दुनिया में भेजने का कार्य करता था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है। पहले हमारी सबसे बड़ी ताकत एम0एस0एम0ई0 और कृषि क्षेत्र था। उन्होंने आचार्य जगदीश चन्द्र बसु के दो पौधे लगाने वाले कहानी बताते हुए कहा कि जीव-जन्तुओं ही नहीं, बल्कि पौधों में भी चेतना होती है। बचपन में उन्होंने अपने माँ के द्वारा पौधरोपण का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान जहाँ से भी मिले, उसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने जगदीश चन्द्र बसु की पंक्तियों को भी उद्धृत करते हुए कहा कि भारत व उसकी परम्परा को धिक्कारा गया, जिसके फलस्वरूप सभी सुविधाओं से लैस भारत कमजोर हो गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि माँ गंगा के प्रति भारत की प्राचीन सनातन आस्था रही है। कोई ऐसा कार्य नहीं है, जिसमें विज्ञान न हो। उन्होंने ऑर्गेनिक खेती तथा जीरो बजट खेती का उल्लेख करते हुए रसायनों के अनावश्यक प्रयोग से खेतों को होने वाले नुकसान की तरफ भी ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पूर्व, कारीगरों को बदहाल बनाया गया, उनके उत्पादों को बेकार कहा गया। परिणामस्वरूप यह उत्पाद बाजारों से बाहर हो गए। वर्ष 2017 के बाद सरकार ने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना शुरू कर डिजाइन व पैकेजिंग कार्य शुरू किया। कारीगरों को बाजार से जोड़ने का कार्य किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज हमारा निर्यात 02 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिसका सबसे प्रमुख कारण हमारा एम0एस0एम0ई0 सेक्टर है। सरकार ने एम0एस0एम0ई0 सेक्टर को खुली छूट दी, जिसके परिणामस्वरूप 96 लाख यूनिटों में 03 करोड़ से अधिक लोग कार्य कर रहे हैं। आज प्रदेश में बेरोजगारी दर 03 प्रतिशत से नीचे आ चुकी है। आज सभी को अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने तक्षशिला विश्वविद्यालय में जीवक के आयुर्वेद अध्ययन को रेखांकित करते हुए कहा कि सभी वनस्पतियों में औषधीय गुण पाये जाते हैं।
कार्यक्रम को विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो0 शेखर पाण्डेय ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री श्री हंस राज विश्वकर्मा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर, विधायक डॉ0 अवधेश सिंह, श्री सौरभ श्रीवास्तव, श्री त्रिभुवन राम एवं श्री सुशील सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूनम मौर्य, बी0एच0यू0 के कुलपति प्रो0 अजित कुमार चतुर्वेदी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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